जमशेदपुर : टाटा स्टील एविएशन सर्विसेज ने 9 जून मंगलवार को सुबह 9:30 बजे जमशेदपुर एयरपोर्ट पर सफलतापूर्वक पूर्ण स्तरीय आपातकालीन अभ्यास (फुल स्केल इमरजेंसी एक्सरसाइज -FSEE) आयोजित किया. यह अभ्यास डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) द्वारा निर्धारित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) के प्रावधानों के अनुरूप आयोजित किया गया. जमशेदपुर एयरपोर्ट, जो सार्वजनिक उपयोग श्रेणी के अंतर्गत लाइसेंस प्राप्त हवाई अड्डा है, का संचालन टाटा स्टील के एविएशन विभाग द्वारा किया जाता है. नियामकीय आवश्यकताओं के तहत, हवाई अड्डे पर समय समय पर पूर्ण स्तरीय आपातकालीन अभ्यास आयोजित किए जाते हैं, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का आकलन किया जा सके तथा हवाई अड्डा आपदा प्रबंधन से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच समन्वित और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके. (नीचे भी पढ़े)
इस अभ्यास का उद्देश्य आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय की क्षमता का परीक्षण करना तथा विमानन संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए उपलब्ध कार्यबल और उपकरणों की तत्परता का आकलन करना था. इसके साथ ही, इस अभ्यास ने सुधार की संभावित जरूरतों की पहचान करने और वास्तविक आपात परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयारियों को और सुदृढ़ करने का अवसर भी प्रदान किया. मॉक ड्रिल में जिला प्रशासन के प्रतिनिधियों, पुलिस अधिकारियों, एयरपोर्ट सुरक्षा कर्मियों, टाटा स्टील फायर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज, नगर अग्निशमन सेवा, सरकारी स्वास्थ्य एजेंसियों, टाटा मेन हॉस्पिटल की चिकित्सा टीमों, बीएसएनएल के प्रतिनिधियों, एयरलाइन ऑपरेटरों तथा एयरपोर्ट अधिकारियों सहित विभिन्न एजेंसियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई. (नीचे भी पढ़े)
अभ्यास के दौरान मीडिया प्रबंधन और समन्वय की जिम्मेदारी कॉरपोरेट कम्युनिकेशन विभाग द्वारा संभाली गई. अभ्यास के दौरान एक काल्पनिक विमान दुर्घटना जैसी आपातस्थिति का परिदृश्य तैयार किया गया, जिसके माध्यम से बचाव एवं अग्निशमन क्षमताओं, चिकित्सा प्रतिक्रिया व्यवस्था, संचार प्रणालियों तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया. इस संपूर्ण मॉक ड्रिल की योजना, संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी टाटा स्टील के सीनियर एग्जीक्यूटिव, एविएशन ऑपरेशंस, केके पांडेय ने संभाली. अभ्यास के दौरान प्राप्त निष्कर्षों और अवलोकनों पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर समीक्षा एवं नियामकीय अनुपालन के लिए डीजीसीए को प्रस्तुत की जाएगी.







