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बहरागोड़ा विधानसभा : कुणाल को भाजपा में अपने पिता का इतिहास दोहराने की चुनौती

राशिफल

  • भाजपा में शामिल होने के बाद डॉ दिनेश षाड़ंगी ने दो हार को बदला था जीत में
  • कुणाल को अपनी जीत को भाजपा में आकर जीत में बदलने की चुनौती

बहरागोड़ा : बहरागोड़ा विधानसभा क्षेत्र में विधानसभा चुनाव 2019 में झामुमो के विधायक कुणाल षाड़ंगी को भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपने पिता डॉ दिनेश षाड़ंगी के वर्ष 2000 के इतिहास को दोहराने की चुनौती है. डॉ षाड़ंगी ने भाजपा में शामिल होकर अपनी लगातार दो हार को जीत में बदला था. कुणाल षाड़ंगी को झामुमो में मिली जीत को भाजपा में शामिल होकर जीत में बदलने की चुनौती है. उल्लेखनीय है कि डॉ षाड़ंगी 1990 में जनता दल और 1995 में समता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव हार गए थे. उसके बाद यह कहा जाने लगा कि उनके भाग्य में राजतिलक नहीं है. वर्ष 1997 में डॉ षाड़ंगी भाजपा में शामिल हुए. तब भाजपा के एक खेमे ने उनका जोरदार विरोध किया. विधानसभा चुनाव 2000 में भाजपा ने डॉ षाड़ंगी को अपना उम्मीदवार बनाया. उन्होंने झामुमो के विद्युत वरण महतो को चतुष्कोणीय मुकाबले में लगभग 1300 मतों से पराजित किया. इससे उन्हें नयी पहचान मिली और वे राज्य के पहले स्वास्थ्य मंत्री बने. विस चुनाव 2005 में भी वे भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीते. 2009 के विधानसभा चुनाव में वे हार गए. अब विधानसभा चुनाव 2019 में उनके पुत्र झामुमो विधायक कुणाल षाड़ंगी भाजपा में शामिल हुए. भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है. विपरीत परिस्थितियों में कुणाल को झामुमो के समीर महंती के साथ होने वाले दो-कोणीय मुकाबले में अपनी जीत को जीत में बदलने की कठिन चुनौती है.

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