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jamshedpur east-गैस सिलेंडर लेकर सरयू राय ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ भ्रष्टाचार के दिये पुख्ता प्रमाण, कहा-21 करोड़ रुपये का मैनहर्ट का किया घोटाला, फाइल दबा दी

राशिफल

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते पूर्व मंत्री और जमशेदपुर पूर्वी के प्रत्याशी सरयू राय.

जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी में मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ ताल ठोंककर चुनावी मैदान में है. सरयू राय ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन कर मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक नये प्रमाण पेश किये है. उन्होंने अपने प्रमाण में कहा है कि मुख्यमंत्री रघुवर दास दागदार है और जनता की अदालत इसका फैसला करेगी. श्री राय ने बताया कि मुख्यमंत्री रघुवर दास कहते है कि उन पर कोई दाग नहीं है, तो वे बतायें कि कि पांच अभियंता प्रमुखों की कमिटी और उसके बाद निगरानी की तकनीकी समिति द्वारा मैनहार्ट परामर्शी की नियुक्ति में तत्कालीन वित्त मंत्री एवं नगर विकास मंत्री रहते हुए रघुवर दास को दोषी ठहराना और अभी तक कार्रवाई नहीं किया जाना दाग है या नहीं? तथा किसी भी मंत्री और सीएम पर इससे गहरा दाग और क्या हो सकता है? कहावत है कि लम्हों ने खता की-सदियों ने सजा पाई. यह कहावत इस मामले में भी सही ठहरती है कि रघुवर दास ने नगर विकास मंत्री रहते हुए मैनहार्ट को परामर्शी नियुक्त कर जो खता जो 2005 में की, उसकी सजा राजधानी-राँची की करीब 20 लाख जनता भुगत रही है. उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में तत्कालीन नगर विकास मंत्री बच्चा सिंह ने राँची के सिवरेज ड्रेनेज स्कीम तैयार करने के लिए ओआरजी मार्ग को करीब 3 करोड़ में परामर्शी नियुक्त किया था. इसके पीपीआर (प्रारंभिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर सरकार को दिया था ताकि कोई संशोधन सरकार की तरफ से आये तो उसे शामिल कर डीपीआर जमा किया जाये. वर्ष 2005 में रघुवर दास नगर विकास मंत्री एवं वित्त मंत्री बने तो उन्होंने ओआरजी मार्ग को बिना नोटिस दिये उनके साथ हुआ एकरारनामा रद्द कर दिया. रांची हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त आर्बिटेटर ने सूद सहित पैसा ओआरजी मार्ग को देने का निर्देश दिया. रघुवर दास ने नया परामर्शी बहाल करने के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला. निविदा मूल्यांकन समिति ने बताया कि सभी निविदाकर्ता अयोग्य है. रघुवर दास ने अपने कार्यकाल में निविदा (टेंडर) मूल्यांकन समिति की मीटिंग बुलाई और कहा कि निविदा को रद्द करने के बदले कतिपय शर्तों को बदल कर मूल्यांकन किया जाए. निविदा शर्त में शामिल था कि निविदादाता पिछले तीन साल का टर्नओवर जमा करेंगे, जिसका वार्षिक औसत 40 करोड़ रूपये होना चाहिए. मैनहार्ट ने केवल दो वर्षों की ही टर्नओवर दिया फिर भी उसे करीब 24 करोड़ रूपये में परामर्शी बहाल कर लिया गया. यह निर्णय तत्कालीन मंत्री स्तर पर हुआ. विपक्ष ने यह मामला विधानसभा में उठाया. उनके यानी सरयू राय की अध्यक्षता में 3 सदस्यों की समिति बनी. समिति में मैनहार्ट को अयोग्य करार दिया और इसे नियुक्त करने के लिए दोषियों पर कार्रवाई करने की अनुशंसा की. रघुवर दास ने विधानसभा अध्यक्ष को दो बार पत्र लिखकर कोशिश की समिति की जांच पूरी नहीं हो. यह मामला राँची उच्च न्यायालय में गया. उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने आदेश दिया कि प्रार्थी निगरानी आयुक्त के यहां जाए। यदि गड़बड़ी हुई है तो नियमानुसार कार्रवाई करें. प्रार्थी ने निगरानी आयुक्त के यहां आरोप पत्र प्रस्तुत किया. निगरानी के तकनीकी कोषांग ने इसकी जांच की और पाया कि मैनहार्ट की नियुक्ति गलत है. इसमें निविदा प्रकाशन से निविदा निष्पादन तक में त्रुटि हुई है. इसके साथ ही राज्य के पांच अभियंता प्रमुखों की एक समिति ने सरकार के आदेश पर इसकी जांच की। पांचों ने रिपोर्ट दी कि मैनहार्ट अयोग्य था और परामर्शी नियुक्त करने में भूल हुई है. इस बीच तत्कालीन निगरानी महानिरीक्षक ने सरकार को कहा कि उन्हें जांच पर कार्रवाई करने का, निर्देश दिया जाए. उन्होंने पांच पत्र लिखे, पर कोई कार्रवाई नहीं हुआ. उस अवधि में राजबाला बर्मा एवं जेबी तुबिद (पति-पत्नी) झारखंड के निगरानी आयुक्त थे. अब यह मामला पुनः उच्च न्यायालय गया. उच्च न्यायालय ने प्रार्थी को एसीबी से जांच कराने के लिए निगरानी आयुक्त के पास जाने को कहा, परन्तु अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. 3 करोड़ की जगह 24 करोड़ रूपये के खर्च पर मैनहार्ट को परामर्शी नियुक्त करने, विधानसभा समिति, 5 अभियंता प्रमुखों और निगरानी के तकनीकी कोषांग द्वारा जांच में परामर्शी की नियुक्ति अवैध सिद्ध होने के जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद भी यदि मुख्यमंत्री यह कहते है कि वे बेदाग है तो दाग की उनकी अपनी परिभाषा हो सकती है.

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