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jharkhand-election-2019-pm-modi-to-come-jamshedpur-झारखंड पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भगवान बिरसा को किया नमन, खूंटी में सभा शुरू, जमशेदपुर में कुछ देर बाद पहुंचेंगे प्रधानमंत्री, यक्ष प्रश्न-सरयू राय के पत्र का क्या मंच से जवाब देंगे प्रधानमंत्री

राशिफल

जमशेदपुर : झारखंड के चुनावी समर में दूसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरी बार झारखंड के दौरे पर आ रहे है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रांची पहुंच गये है और खूंटी में सभा कर रहे है. सभा में वे भाजपा की सरकारों की उपलब्धियां बता रहे है. उनके साथ खूंटी में सांसद सह केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, पूर्व सांसद कड़िया मुंडा जैसे पुराने और बड़े नेता शामिल हो रहे है. रांची में उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इस सभा के बाद प्रधानमंत्री सीधे जमशेदपुर आयेंगे. दोपहर करीब दो बजे वे जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में सभा को संबोधित करेंगे. सभा को संबोधित करने के साथ ही लोगों के मन में यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या प्रधानमंत्री गोपाल मैदान से भाजपा के बागी और मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले सरयू राय को जवाब देंगे या नहीं. सरयू राय ने हाल ही में चुनाव लड़ने के दौरान ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. जमशेदपुर पूर्वी से निर्दलीय प्रत्याशी सरयू राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर कहा है कि वे आगामी 3 दिसंबर को अपने जमशेदपुर दौरे में टाटा की 86 से अधिक बस्तियों को मालिकाना अधिकार देने की घोषणा करें. श्री राय ने इसके साथ ही मालिकाना के सवाल पर जनता के साथ वादाखिलाफी करने के लिए रघुवर दास को मुख्यमंत्री पद से को हटाने की मांग भी की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में श्री राय ने कहा है कि हाल ही में आपकी मंत्रीपरिषद ने दिल्ली की 1731 बस्तियों को मालिकाना हक देने का निर्णय लिया है. संभवतः लोकसभा के इसी सत्र में यह विधेयक पारित होने वाला है. जमशेदपुर में 86+ बस्तियों के लिए मालिकाना हक देने की मांग विगत 20 वर्षों से उठ रही है। राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री एवं जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी रघुवर दास इस मुहिम के अगुवा रहे हैं. वर्ष 2005 में जब टाटा लीज समझौते का नवीकरण हुआ, तब 17 सौ एकड़ में फैली इन बस्तियों को यह तर्क देते हुए टाटा लीज से अलग किया गया कि इन्हें मालिकाना हक दिया जायेगा. वर्ष 2006 में बस्तियों का सर्वेक्षण भी आरंभ हुआ. विगत सभी चुनावों में भाजपा की ओर से उठाया जानेवाला यह एक प्रमुख विषय रहा है, परंतु अचानक राज्य के मुख्यमंत्री एवं जमशेदपुर पूर्वी से भाजपा के प्रत्याशी रघुवर दास ने पिछले कुछ महीनों से सार्वजनिक रूप से कहना आरंभ किया कि बस्तियों को मालिकाना हक देना उनका मुद्दा कभी नहीं रहा है और मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता है. रघुवर दास की इस बदली हुई बोली से यहां के बस्तीवासियों में आक्रोश है. श्री राय ने लिखा है कि जब वर्ष 2005 में 86 बस्तियों को टाटा लीज से अलग कर सर्वे कराया गया, तो मैंने कहा था कि बिना कानून बनाये इन बस्तियों में रहनेवाले लोगों को मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। उन्होंने काफी प्रयास किया कि सरकार इसके लिए विधानसभा में विधेयक लाये। सरकार तैयार नहीं हुई तो उन्होंने 86 बस्तियों को मालिकाना हक देने संबंधी निजी विधेयक दिनांक 10.02.2006 को झारखण्ड विधानसभा में प्रस्तुत किया, परंतु रघुवर दास, जो उस समय राज्य के वित्त एवं नगर विकास मंत्री थे, ने इस विधेयक का समर्थन नहीं किया. मालिकाना की मांग और विगत पांच वर्षों में मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों द्वारा जमशेदपुर में जनता और पदाधिकारियों के साथ की गई बदसलूकी, जमशेदपुर में बंद हो रहे उद्योग-धंधे और इनका यहां से पलायन को विकट समस्या बताते हुए श्री राय ने लिखा है कि गत सप्ताह विधानसभा चुनाव के लिए जारी भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र में कहीं भी बस्तियों के मालिकाना, बिना वैकल्पिक व्यवस्था किये मकानों को तोड़ने, उद्योगों के बीमार/बंद होने, पलायन और रोजगार जैसे मुद्दों का जिक्र नहीं है। जमशेदपुर पूर्वी क्षेत्र के लिए अलग से चार पृष्ठों का घोषणापत्र जारी हो रहा है, उसमें भी बस्तियों, रोजगार, भय और आतंक के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा गया है। श्री राय ने आग्रह किया है कि प्रधानमंत्री इस पर पहल करते हुए मुख्यमंत्री को तत्काल हटायें ताकि मालिकाना सहित जमशेदपुर की ज्वलंत समस्याओं का समाधान हो सके.

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