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सीट को लेकर एनडीए में भी जोर-आजमाइश, 2014 में पांच सीटें जीतनेवाली आजसू को चाहिए 19 सीटें, मिशन 65 प्लस में भाजपा अब तक अकेले भी भर रही दंभ, 2014 में 24 जगहों पर भाजपा थी दूसरे नंबर पर

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चाईबासा / रांची : झारखंड में विधानसभा चुनाव की तपिश बढ़ती जा रही है. सभी दलों की दावेदारी भी सामने आ रही है. जल्द ही निर्वाचन आयोग की तरफ से तिथियों की घोषणा कर दी जायेगी. सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए व विपक्ष दोनों ओर जोर-आजमाइश की स्थिति बनी हुई है. एनडीए में भाजपा मिशन 65 प्लस पर अकेले ही दंभ भर रही है, जबकि 2014 में पांच सीटें जीतनेवाली आजसू 19 सीटों पर अपना दावा कर रही है. यानी कुल सीटों की संख्या की तुलना में यह तीन सीटें अधिक है. आजसू ने रामगढ़, टुंडी, जुगसलाई, तमाड़, लोहरदगा सीटें जीती थी. इसमें लोहरदगा सीट पर उपचुनाव हुआ तो आजसू को यह सीट गंवानी पड़ी. उपचुनाव में कांग्रेस के सुखदेव भगत ने इस सीट से जीत हासिल की थी. वहीं तमाड़ विधायक विकास मुंडा ने आजसू से किनारा कर लिया है. रामगढ़ की सीट चंद्रप्रकाश चौधरी के सांसद बनने से खाली हो गयी है. वहीं सिल्ली, चंदनकियारी, बड़कागांव में आजसू दूसरे नंबर पर थी.

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मिशन 65 प्लस में नंबर-1 और नंबर-2 पर भाजपा की नजर
मिशन 65 प्लस में नंबर-1 और नंबर-2 की सीटों पर भाजपा की नजर बनी हुई है. यह कयास लगाया जा रहा है कि पार्टी के एक दर्जन से अधिक सीटिंग विधायकों को पत्ता कटनेवाला है. इसमें रांची सीट के लिए मनोज गुप्ता, दीपक मारू, विनय सिंह और अन्य जोर आजमाइश कर रहे हैं. इनकी कई दौर की बातचीत भाजपा के चुनाव प्रभारी ओम प्रकाश माथुर से हो चुकी है. इसी प्रकार कांके, खिजरी, मांडर, गुमला, सिमडेगा, देवघर, बेरमो, घाटशिला, बगोदर, चतरा जैसी सीटों पर भी दूसरे की दावेदारी चल रही है.

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आजसू में भी कोलाहल कम नहीं
आजसू पार्टी में पूर्व मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी अपनी पत्नी को रामगढ़ से चुनाव लड़ाना चाह रहे हैं. वहीं सुदेश सिल्ली के अलावा कहीं दूसरे सेफ सीट से भाग्य आजमाने की चक्कर में हैं. दूसरे स्थान पर रहनेवाली तीनों सीटों पर भी नजर पार्टी की बनी हुई है. चुनाव के पहले लोहरदगा के पूर्व विधायक कमल किशोर भगत के जेल से छूटने के बाद भी उनकी दावेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. गोमिया विधानसभा से उप चुनाव लड़ चुके लंबोदर महतो कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. उप चुनाव में ये 14 सौ मतों से पराजित हुए थे. आजसू में कई दावेदार ऐसे भी हैं, जो कोई कसर चुनावी दंगल में नहीं छोड़ना चाहते हैं. आजसू को मांडू, पांकी, चक्रधरपुर, सरायकेला, जरमुंडी और सिंदरी सीटें चाहिए. 2014 में इन सीटों में से 3 पर झामुमो, 2 पर कांग्रेस और 1 पर भाजपा ने जीत हासिल की थी. वहीं भाजपा 4 सीटों पर सेकेंड पोजिशन पर थी, जबकि झामुमो एक और एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी रनर अप थे. आजसू इन छह सीटों में कहीं भी तीसरे नंबर पर भी नहीं थी, फिर भी इस पार्टी को ये सीटें चाहिए. रांची की तीन सीट पर भी आजसू ने नजरें गड़ाये रखी है.

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संताल और कोल्हान पर भाजपा का फोकस
भाजपा को कोल्हान की 14 में से 6 सीटें झामुमो के हाथों गवांना पड़ा था. भाजपा ने संताल परगना की 18 में से 6 सीट, 13 सीटें उत्तरीछोटानागपुर में जीती थी. 9 सीटें भाजपा को दक्षिण छोटानागपुर में मिली थी, जबकि पलामू प्रमंडल में मात्र 4 सीटों पर ही पार्टी को संतोष करना पड़ा था. भाजपा 2014 के चुनाव में 24 जगहों पर दूसरे स्थान पर थी. इनमें निरसा, जगन्नाथपुर, कोलेबिरा, जामताड़ा, बरही, लिट्टीपाड़ा, बरहेट, नाला, जामा, मांडू, डुमरी, गोमिया, बहरागोड़ा, सरायकेला, चाईबासा, मनोहरपुर, चक्रधरपुर, खरसांवां, तोरपा, विशुनपुर, सारठ, पोड़ैयाहाट, बरकट्ठा, सिमरिया, हटिया, लातेहार सीटें शामिल है.

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