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jharkhand-bjp-झारखंड सरकार के खिलाफ फिर से मुखर हुए रघुवर, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा-अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए हेमंत सरकार ने भाषा विवाद का षडयंत्र रचा, पूर्व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा का आरोप-झारखंड के संसाधन का दुरुपयोग, अयोग्य सरकार, सरकार ने मर्यादा भी तार-तार कर दिया

राशिफल

जमशेदपुर : राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने झारखंड की हेमंत सरकार पर अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए भाषा विवाद का षडयंत्र रचने का आरोप लगाया है. श्री दास ने झारखंड की नयी नियोजन नीति से उत्पन्न भाषा विवाद की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि भारत एक बहुभाषी देश है, भाषा की बहुलता को लेकर कभी कोई कठिनाई पैदा नहीं हुई, लेकिन हेमंत सरकार नियोजन नीति के बहाने भाषा विवाद को जन्म देकर झारखंड के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है. सरकार नई नियोजन नीति लाकर युवाओं को भटकाने की कोशिश कर रही है. दरअसल ,भाषा विवाद का मुद्दा उठाकर सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने का प्रयास कर अपने चुनावी वादों पर परदा डाल रही है. उन्होंने हेमंत सरकार की नियोजन नीति पूरी तरह से असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि उच्च न्यायालय में नयी नियोजन नीति का रद्द होना लगभग तय है. झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन की कांग्रेस पार्टी तथा झामुमो ने चुनाव के दौरान जनता से कई लोकलुभावन वादे किए थे. इन वादों में झारखंड के युवाओं को 26 लाख नौकरियां देना शामिल है. अब ये डपोरशंखी चुनावी वादे पूरे करने में सरकार के हाथ पैर फूल रहे हैं. झारखंड की जनता और युवाओं को उलझाने के लिए भाषा विवाद उत्पन्न किया गया है. उन्होंने 14 जुलाई 2016 को उनके मुख्यमंत्रित्व में राज्य सरकार द्वारा लायी गयी नियोजन नीति की चर्चा करते हुए बताया कि तब एक अधिसूचना जारी कर नियोजन नीति लागू की गई थी. इस नीति के अंतर्गत राज्य के 24 जिलों में स्थानीय निवासियों की नौकरी के लिए प्रावधान किया गया था. यह नीति 10 वर्ष के लिए बनाई गई थी. इस नीति के परिणाम स्वरूप उनकी सरकार ने राज्य के लगभग एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार ने 3 फरवरी 2021 को नियोजन नीति को रद्द कर नई नीति की घोषणा कर दी. इस नई नीति ने भाषा विवाद को जन्म दिया. श्री दास ने कहा कि वर्ष 2021 को नौकरियों का वर्ष घोषित करने वाली हेमंत सरकार ने भाषा विवाद उत्पन्न कर एक बार फिर राजनीतिक कुचक्र रचकर राज्य के युवाओं के सपनों को कुचलने का प्रयास किया है. बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर सत्ता में आयी हेमंत सरकार ने जो नीति बनाई उसमें राष्ट्रभाषा हिंदी की अपेक्षा की गई है. वहीं 4% उर्दू बोलने वालों को इसका हकदार बनाया गया है. दूसरी ओर राज्य के सभी कार्यों की भाषा, शिक्षा-दीक्षा की भाषा हिंदी भाषा में 10वीं या 12वीं पास करने वाला झारखंडी युवा नौकरी हासिल करने का हकदार नहीं होगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विगत चुनाव में एक साल में पांच लाख नौकरी देने का वादा किया था, अब खुद भाषा विवाद उत्पन्न कर उसे उलझा दिया है. उन्होंने कहा कि आज झारखंड में स्थानीय युवा, मूलवासी-आदिवासी हेमंत सोरेन की गंदी राजनीति की भेंट चढ़ गए हैं. एक ओर युवाओं की उम्र लगातार बढ़ रही है, वहीं हेमंत सरकार द्वारा उसके मुख्यमंत्रित्व से जारी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द किया जा रहा है. इसमें लगभग 13 हजार नियुक्तियां शामिल हैं. श्री दास ने हेमंत सरकार को जन विरोधी सरकार बताते हुए कहा कि इस सरकार के अगर पिछले दो साल के कार्यकाल को देखा जाए तो इनकी सरकार का केंद्र बिंदु केवल तुष्टीकरण रहा है. दंगे और मॉब लिंचिंग में ही नहीं, सरकारी नौकरियों में भी हेमंत सरकार तुष्टीकरण को ही बढ़ावा दे रही है। राज्य के लिए यह शुभ संकेत नहीं है. (नीचे देखे जयंत सिन्हा का आरोप)

झारखंड में अयोग्य सरकार चल रही है : जयंत सिन्हा
झारखंड के हजारीबाग से सांसद और पूर्व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने संवाददाता सम्मेलन भाजपा के प्रदेश कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि राज्य में संसाधनों का भरमार है, लेकिन हेमंत सोरेन की सरकार अयोग्य है, जिस कारण ऐसा किया जा रहा है. सरकार पूरी तरह निकम्मी है. विकास की राह पर आगे नहीं बढ़ पा रही है. वित्तीय वर्ष 2021-2022 में 91 हजार 277 करोड़ रुपये का है. इसमें से करीब 40 हजार करोड़ रुपये का योगदान ग्रांट के तौर पर केंद्र से है. लेकिन यह सरकार दिन रात केवल साधन का रोना रोती है. इस संवाददाता सम्मेलन में जयंत सिन्हा के साथ प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा, मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक समेत अन्य लोग मौजूद थे. उन्होंने कहा कि डीएमएफटी कलेक्शन की राशि 6533 करोड़ में से केवल 79 फीसदी ही आवंटित किया गया है. इसका भी केवल 46 फीसदी ही उपयोग किया जा सका है. पारदर्शिता की कमी डीएमएफटी फंड के उपयोग में है. इसके खर्चे की कोई जानकारी लोगों के पास नहीं है. इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और थर्ड पार्टी से ऑडिट की जरूरत राज्य को है.
जयंत सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय कुप्रबंधन का शिकार है. पिछले पांच सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि राज्य को करीब 900 करोड़ के राजस्व का घाटा उठाना पड़ा है. देश भर में कैपिटल एक्सपेंडिचर में सबसे कम निवेश करने वाले राज्यों में से झारखंड है. पड़ोसी राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल में अपने बजट का 19 फीसदी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर खर्च हो रहा है जबकि यहां मात्र 17 फीसदी ही हुआ है. इस एक्सपेंडिचर के तहत सड़क, पुल, अस्पताल का निर्माण करने से विकास की गति को रफ्तार मिलती है. आर्थिक प्रभाव तीन गुना बढ़ता है. इस पर ध्यान देने की बजाये वेतन, पेंशन आदि पर खर्च होने वाला एस्टेब्लिशमेंट एक्सपेंडिचर बढ़ाया गया है. तुलनात्मक तौर पर यह दूसरे राज्यों से 10 फीसदी ज्यादा है जो फिजूलखर्ची है.जयंत सिन्हा ने बताया कि बरही में पिछले दिनों रूपेश पांडेय की हत्या हो गयी थी. उन्हें और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश को उसके परिजनों से नहीं मिलने दिया गया. राज्य में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखा गया. इससे राज्य में विधि व्यवस्था की पोल खुल गयी है.

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