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jamshedpur-bjp-जमशेदपुर भाजपा की कमेटी विस्तार व मंडलों की घोषणा को लेकर छूट रहे जिला अध्यक्ष गुंजन यादव के पसीने, सांसद, देवेंद्र, गोस्वामी-कुणाल के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के बेटे के दबाव ने रोकी कमेटी बनाने की रफ्तार, धर्मेंद्र प्रसाद ओबीसी मोरचा अध्यक्ष, अमित अग्रवाल युवा मोरचा अध्यक्ष लगभग तय, एससी-एसटी में दो नाम, ”सवर्णों” की उपेक्षा रोकना बनी चुनौती, मंडलों के नामों पर बन सकती है सहमति, क्या गुंजन खोज पायेंगे अनिल मोदी व बिमल जालान का विकल्प ?

जमशेदपुर भाजपा के अध्यक्ष गुंजन यादव.

जमशेदपुर : जमशेदपुर भाजपा के नये जिला अध्यक्ष गुंजन यादव पर सबकी निगाहें टिकी हुई है. गुंजन यादव अपनी जिला कमेटी का विस्तार करने वाले है. नये मंडलों के अध्यक्षों की घोषणा होने वाली है. इसको लेकर अलग-अलग सूची बनाया गया है जबकि इसको लेकर भाजपा में घमासान की स्थिति है. हालात यह है कि भाजपा के जिला कमेटी में अपने लोगों को जगह दिलाने की कोशिशें तेज कर दी गयी है. इसको लेकर सांसद विद्युत वरण महतो, भाजपा के जमशेदपुर पश्चिम से चुनाव लड़ने वाले पूर्व जिला अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी और भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी की अलग-अलग सूची से भाजपा कमेटी के विस्तार में पेंच फंसा चुकी है, जिसको लेकर खुद गुंजन यादव के पसीनें छूट रहे है कि कैसे सबको एकोमोडेट (जगह) दी जाये. जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह चाहते है कि भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार समर्थकों को किनारे लगा दिया जाये. वो चाहतें है की उनके समर्थकों को जमशेदपुर पश्चिमी का मंडल अध्यक्ष और जिला पदाधिकारी बनाया जाये. सांसद विद्युत वरण महतो और दिनेशानंद गोस्वामी के साथ प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी भी चाहतें है कि भाजपा कमेटी में नियंत्रण उनका हो. इसको ही संतुलन बनाने में जिला अध्यक्ष गुंजन यादव के पसीने छूट रहे है.

इधर पूर्व सीएम रघुवर दास के बाद उनके बेटे ललित दास का भी कमेटी विस्तार में अघोषित हस्तक्षेप हो रहा है. ललित दास अपने नज़दीकी अमित अग्रवाल को भाजपा युवा मोर्चा की कमान दिलाना चाहते है. गुंजन यादव भी है अमित के समर्थन में है, जिस कारण युवा मोरचा के जिला अध्यक्ष के तौर पर अमित अग्रवाल का नाम फाइनल माना जा रहा है, हालांकि, बदलाव की गुंजाइश अंतिम समय तक है. इसी तरह विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए झाविमो के भी पूर्व नेता धर्मेंद्र प्रसाद को ओबीसी मोर्चा के जिला अध्यक्ष बनाये जाने की चर्चा है और लगभग उनका नाम तय माना जा रहा है क्योंकि पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी के वे खास माने जाते है. जुगसलाई विधानसभा के भाजपा प्रत्याशी रहे मुचिराम बाउरी और पोरस मुखी में से एक को अनुसूचित जाति मोर्चा जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिल सकती है. पोटका की पूर्व विधायक मेनका सरदार और बहरागोड़ा के पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी भी अपने समर्थकों को सम्मानजनक जगह दिलाने के लिए ज़ोर आजमाइश करते नजर आ रहे है. पूरी कमेटी में अगर कुछ तय है तो वह है दिनेश कुमार के समर्थकों को साइड लगाए जाना.

जिला पदाधिकारी में से भाजपा के जिला प्रवक्ता रहे अंकित आनंद, भाजयुमो के जिला अध्यक्ष रहे अमरजीत सिंह राजा को किनारे लगाए जाने की संभावना प्रबल है. जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा से टेल्को, बिरसानगर, गोलमुरी के मंडल अध्यक्ष बदले जा सकते है. सीतारामडेरा और बारीडीह मंडल पर भी समीक्षा जारी है. उधर जमशेदपुर पश्चिमी विधानसभा से संजीव सिन्हा को जिला कमेटी में जगह मिल सकती है, जिससे दिनेश कुमार की कमेटी में जिला प्रवक्ता रहे दीपक पारीक के भी साइड किये जाने की संभावना अधिक है. पूरे कमेटी विस्तार में अगर कुछ पूर्व निर्धारित और तय है तो वह है अनिल मोदी और बिमल जालान की जोड़ी. वर्षों से मौसम वैज्ञानिकों की तरह जुगसलाई की यह जोड़ी हर नये जिलाध्यक्ष के साथ पहले से मधुर संबंध बनाने में लग जातें है. मारवाड़ी समाज और चेंबर से निकटता होने की वजह से इनका भाजपा कमेटी में पद फ़िक्स रहता है. वर्षों से अघोषित रूप से इनके लिए एक कोटा तय है. जिला अध्यक्ष चाहे जो रहें अनिल मोदी और बिमल जालान की जगह हमेशा फ़िक्स रहती है. वैसे जमीनी स्तर पर इनका क्या प्रभाव है, यह समीक्षा की बात है. लेकिन फ़िर भी अनिल मोदी को प्रवक्ता और महामंत्री जैसा महत्वपूर्ण पद मिलता रहा है. इस बार भी अनिल मोदी को महामंत्री और बिमल जालान को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलनी लगभग तय है.

इससे पार्टी के समर्पित और मेहनतकश कार्यकर्ताओं में नाराज़गी रहती है. कहतें है न पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं, उसी तरह विस्तार से पूर्व ही गुंजन याफव की कमेटी पर विवाद और संकट के बादल मंडरा रहे है. पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार की तरह सभी ध्रुवों को साधने में गुंजन यादव कामयाब हो पायेंगे या नहीं, यह भी देखने वाली बात होगी. वैसे पैसा वाला और परिक्रमा करने वालों को युवा मोर्चा जैसी महत्वपूर्ण जगह देकर भाजपा खुद कमज़ोर हो रही है. इसकी शुरुआत अमरजीत सिंह राजा से हुई. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए व्यवसायी और पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे ललित दास के नज़दीकी अमित अग्रवाल को युवा मोर्चा का पद भेंट करने की तैयारी अंतिम चरणों में है, जिसको लेकर समर्पित कार्यकर्ताओं में नाराजगी है. आरएसएस और अन्य वरीय भाजपाई चाहतें है कि युवा मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में किसी सवर्ण चेहरे को मौका दिया जाये ताकि सामाजिक संतुलन बनी रहे. लेकिन इसके विरपीत हार से सबक ना लेते हुए भाजपा अड़ियल बनी हुई है और नेपोटिज्म की शिकार है. ऐसे में पार्टी नेताओं, सामाजिक समरसता समेत अन्य पहलुओं पर संतुलन बनाना गुंजन यादव के लिए बड़ी चुनौती है. वैसे सूत्र बता रहे है कि एक से दो दिनों में नयी कमेटी की घोषणा हो जायेगी.

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