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jamshedpur-teachers-falicitation-जमशेदपुर में प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन ने किया शिक्षकों का सम्मान, शामिल हुए कांग्रेस के मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव, कोल्हान के 500 से अधिक शिक्षकों को मिला सम्मान

राशिफल

जमशेदपुर : प्राईवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) की ओर बुधवार को जमशेदपुर के माइकल जॉन ऑडिटोरियम में शिक्षक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इस मौके पर राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कोल्हान प्रमंडल के तीन जिलों पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले के 500 से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया गया. समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद और पांच राज्यों से आये प्रतिनिधि मौजूद थे. झारखण्ड प्रदेश पासवा अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे की अध्यक्षता में जमशेदपुर में प्राईवेट शिक्षकों के लिए आयोजित अब तक के सबसे बड़े सम्मान समारोह में सभी शिक्षकों को स्मृति चिह्न, प्रमाण पत्र और ट्राफी देकर सम्मानित किया गया. वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने इस मौके पर समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘संघ शक्ति, शक्ति कलयुगे’ अर्थात कलयुग में एकजुटता जरूरी है, कोई अकेले कुछ नहीं कर सकता है। वर्ष 2011 में पासवा का गठन किया गया, संगठन बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के हित को ध्यान में रखते हुए निरंतर इसी सेवा भाव से कार्य करते रहे. उन्हांने कहा कि आज भी भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वाच्च है, बचपन में वे भी जब स्कूल-कॉलेज जाते थे, तो सबसे पहले शिक्षकों का पैर छूकर प्रमाण करते थे. (नीचे पूरी खबर देखें)

शिक्षक को प्रकाश स्वरूप माना जाता है, माता-पिता में तो यह स्वार्थ हो सकता है कि उनका बेटा बड़ा होगा डॉक्टर-इंजीनियर या अन्य उच्च पदों आसीन होकर सेवा करेगा, लेकिन गुरु निःस्वार्थ भाव से शिक्षा देता है और वह अपने सभी विद्यार्थियों को यह सिखता है कि अपना दीपक आप बनें. डॉक्टर रामेश्वर उरांव ने कहा कि वे हमेशा सच बोलते है, पिछली बार भी जब सरकारी स्कूल की जगह प्राईवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की इच्छा का जिक्र किया और बयान दिया, तो कुछ लोगों ने इस पर विवाद भी खड़ा करने की कोशिश की, बाद में कुछ सरकारी स्कूल के शिक्षक भी उनके पास मिलने आये और उन्होंने बताया कि वे पढ़ाना तो चाहते है, लेकिन उन्हें पठन-पाठन के अलावा भी कई अन्य तरह का कार्य भी मिल जाता है, जिससे परेशानी होती हैं. उन्होंने प्राईवेट स्कूल के शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण काल में जब लोग एक-दूसरे से मिलने में भी कतरा रहे थे, उस वक्त प्राईवेट स्कूल के शिक्षकों ने ही ऑनलाइन माध्यम से बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने का काम किया. यह समाज शिक्षकों के इस कार्य को कभी भुला नहीं सकता है, उन्होंने बताया कि सरकार को यह अंदेशा थी कि छठ में बाहर से बड़ी संख्या में लोग आएंगे और कोरोना संक्रमण के मामले में बढ़ोत्तरी हो सकती है, इसी कारण दिल्ली में भी स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया, लेकिन राज्य सरकार की उच्चस्तरीय कमेटी कक्षा तीन से ऊपर के सभी स्कूल या नर्सरी से ऊपर सभी स्कूलों में ऑफलाइन क्लास शुरू करने पर विचार करेगी. (नीचे पूरी खबर देखें)

इस मौके पर पासवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमायल अहमद ने कहा कि मौजूदा समय में प्राईवेट स्कूल ही बच्चों को स्टैंडर्ड एजुकेशन उपलब्ध कराने में सफल रहे है, यह इसलिए संभव हुआ है, प्राइवेट स्कूल में कार्यरत सभी शिक्षक अपनी जिम्मेवारियों को समझते है और पूरा मन लगाकर बच्चों को पढ़ाते हैं. प्राईवेट स्कूलों में पढ़ाई अच्छी होती है, इसी कारण लोग प्राईवेट स्कूल और इंग्लिश मीडियम स्कूल में ही बच्चों का नामांकन कराने चाहते है, यहां तक कि गांव और छोटे शहरों में संचालित प्राईवेट स्कूल में ही लोग अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और प्राईवेट स्कूल के लिए एक मापदंड होना चाहिए, यदि सरकारी स्कूल दो-तीन के कमरे में संचालित हो सकते हैं, तो प्राईवेट स्कूलों को भी अनुमति मिलनी चाहिए. उन्होंने बताया कि कोरोना संक्रमण काल में देशभर के प्राईवेट स्कूलों के शिक्षकों ने कड़ी मेहनत की, लेकिन इस दौरान सरकारी स्कूल एक दिन नहीं खुले, लेकिन उन शिक्षकों को पहली तारीख को वेतन मिलता रहा और कुछ लोगों द्वारा नो स्कूल-नो फीस का नारा देकर प्राईवेट स्कूलों को बंद कराने की साजिश रची गयी. (नीचे पूरी खबर देखें)

एक सर्वेक्षण के अनुसार फीस नहीं मिलने के कारण किराये के मकान में संचालित होने वाले करीब 50 हजार प्राईवेट स्कूल बंद हो गये. पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने समारोह में अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि प्राईवेट स्कूलों के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास बंद होना चाहिए, क्योंकि प्राईवेट स्कूल में भी यहीं के बच्चे पढ़ते है और यहीं के शिक्षक उन्हें पढ़ाते है. उन्होंने कहा कि आज यदि प्राईवेट स्कूल नहीं होते तो झारखंड समेत पूरे देश में शिक्षा का स्तर किस तरह का होता, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता हैं. उन्होंने कहा कि यह सच्चाई है कि कई प्राईवेट स्कूलों में नामांकन के लिए बड़े-बड़े पैरवी आते है, हर लोग अपने बच्चे को अच्छे प्राईवेट स्कूल में ही पढ़ाना चाहते हैं. पासवा के प्रदेश उपाध्यक्ष लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि जिस तरह से प्राईवेट स्कूलों ने कोरोना संक्रमणकाल में भी ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने का काम किया, उससे प्राईवेट स्कूलों की विश्वसनीयता और बढ़ी है और सरकार से भी अपेक्षित सहयोग की जरूरत हैं. पासवा के प्रदेश महासचिव डॉ राजेश गुप्ता, छोटू ने कहा कि कोरोना संक्रमण पर अंकुश लगने के बाद अब राज्य सरकार कक्षा छह से नीचे के स्कूलों में भी ऑफलाइन क्लास की अनुमति देने पर विचार करें. शिक्षक सम्मान समारोह के स्वागताध्यक्ष रमण कुमार झा ने कहा कि जमशेदपुर के लोगों के लिए सौभाग्य की बात है कि पहली बार निजी स्कूलों के शिक्षकों को सरकार सम्मानित कर रही है. शिक्षक सम्मान समारोह में देशभर से आये कई राज्यों के प्रतिनिधियों को भी सम्मानित किया गया, जिसमें मुख्य रुप से प्रदेश पासवा के महासचिव दीबेश राज राजा ने विषय वस्तु प्रवेश कराया जबकि धन्यवाद ज्ञापन पासवा महासचिव सुभाष उपाध्याय ने किया. शिक्षक सम्मान समारोह में कई आंध्र प्रदेश के पासवा महासचिव वंजना नायडू, तेलंगाना के प्रदेश अध्यक्ष एसएनरेड्डी,राष्ट्रीय महासचिव एसआर राचामला, तमिलनाडु के सचिव बिलाल नट्टर, जम्मू कश्मीर के प्रवक्ता अशरफ पीरजादा,श्रीनगर के जनरल सेक्रेटरी बशीर अहमद को सम्मानित किया गया. स्कूलों के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये. वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस के बच्चों का भी सहयोग मिला. राष्ट्रीय गाण के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई.

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