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गुरूवार, जून 17, 2021
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jdp-asa-chief-salkhan-murmu-पूर्व सांसद सालखन मुर्मू का बयान-आदिवासी जन्म से हिंदू नहीं है, बाबूलाल मरांडी संघी गुलाम, भाजपा व आरएसएस आदिवासियों को गुलाम बनाकर छोड़ेगी

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जमशेदपुर : आदिवासी सेंगेल अभियान (एएसए) व झारखंड दिशोम पार्टी (जेडीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने एक बयान जारी कर भाजपा को ही आड़े हाथों लिया है. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के उस वक्तव्य का विरोध किया है, जिसमें बाबूलाल मरांडी ने कहा था कि आदिवासी जन्म से हिंदू है. इस पर पलटवार करते हुए सालखन मुर्मू ने कहा है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी का वक्तव्य “आदिवासी जन्म से हिंदू हैं”, गलत है, भ्रामक है, अपमानजनक है, खतरे की घंटी है. एससी-एसटी अटरोसिटीज एक्ट 1989 के दायरे में आता है. पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने केवल सत्ता सुख और निजी स्वार्थ के लिए आदिवासी समाज को बेचने का दुस्साहस किया है. बाबूलाल संघी गुलाम हैं. संघ ने बाबूलाल के कंधे में बंदूक रखकर भारत के आदिवासियों को गुलाम बनाने के षड्यंत्र को जगजाहिर कर दिया है. इस कारण पूरे भारत में आदिवासियों को जबरन हिंदू बनाने के इस षड्यंत्र के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद करना जरूरी है. चुकी भाजपा व आरएसएस आदिवासी विरोधी हैं, सरना धर्म विरोधी हैं. आदिवासी सेंगेल अभियान और झारखंड दिशोम पार्टी इस मनुवादी षड्यंत्र के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विरोध सप्ताह का आह्वान करती है. 11 मार्च से 17 मार्च 2021 तक भाजपा और आरएसएस का पुतला दहन कर विरोध दर्ज करेगी. बाबूलाल मरांडी के पीछे मोहन भागवत, नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा का हाथ है. बाबूलाल मरांडी के साथ उक्त चारों आदिवासी विरोधियों का पुतला दहन कर राष्ट्रव्यापी विरोध दर्ज किया जाएगा. श्री सालखन ने कहा है कि आशा है कि बाकि सभी आदिवासी संगठन इसमें सहयोग करेंगे. सालखन मुर्मू ने कहा है कि भारत के आदिवासी आर्य नहीं है. वे अनार्य हैं. हिंदू धर्म और संस्कृति आर्यों की देन है जबकि भारत के आदिवासी आर्यों के पूर्व से भारत में निवास करते रहे हैं. आदिवासी आर्यन नहीं बल्कि द्रविड़ या ऑस्ट्रिक भाषा समूह के लोग हैं. आदिवासियों की भाषा-संस्कृति, इतिहास आर्यों ( हिंदू ) से भिन्न है. आदिवासी मूर्ति पूजक नहीं, प्रकृति पूजक है. आदिवासी के पूजा पद्धति, सोच संस्कार, पर्व त्योहार आदि सभी प्रकृति से जुड़े हुए हैं. आदिवासी प्रकृति को ही अपना पालनहार मानते हैं. आदिवासी प्रकृति का दोहन नहीं, पूजा करते हैं. आदिवासियों के बीच ऊंच-नीच और वर्ण व्यवस्था नहीं है. दहेज प्रथा भी नहीं है. आदिवासियों का जन्म, शादी विवाह, श्राद्ध, पर्व त्योहार आदि हिंदू विधि, रीति-रिवाज से नहीं. बल्कि बिल्कुल आदिवासी विधि व्यवस्था से आदि काल से चला आ रहा है. आदिवासियों के बीच स्वर्ग नरक की परिकल्पना नहीं है. वे अपने मृत पूर्वजों की आत्मा को अपने बीच रखते-पाते हैं. आदिवासी अभी भी हिन्दू कानून के अधीन नहीं हैं. पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा है कि आदिवासी भारत के असली मूलवासी या इंडीजीनस पीपुल हैं जबकि बाकि आर्यन बाहर से पधारे हैं. सिंधु घाटी सभ्यता को नष्ट करते हुए अनार्यों पर हमला कर भारत पर कब्जा जमाया है. अब आरएसएस आदिवासियों को वनवासी, वनमानुष बनाने पर उतारू है. आदिवासी सेंगल अभियान और झारखंड दिशोम पार्टी झारखंड, बंगाल, बिहार, ओड़िशा, असम में संगठित रूप से कार्यरत है. इस कारण इस मुद्दे पर सर्वत्र आरएसएस व भाजपा का विरोध सप्ताह दर्ज करेगी ताकि भारत के जनमानस को पता चले कि आदिवासी जन्म से हिंदू नहीं हैं. सालखन मुर्मू ने कहा कि भारत में 2021 का वर्ष जनगणना का वर्ष है. हम भारत के अधिकांश आदिवासी अब तक प्रकृति पूजक हैं. इस कारण सरना धर्म या अन्य विभिन्न नामों से अपनी धार्मिक अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी और एकता को बचाए रखने के लिए कटिबद्ध है. अपनी धार्मिक पहचान के साथ जनगणना में शामिल होना हमारा अधिकार है. मगर भाजपा और आरएसएस हमारे मौलिक अधिकार (फंडामेंटल राइट), मानवीय अधिकार (ह्यूमन राइट्स) और आदिवासी अधिकार ( इंडिजेनस पीपल राइट्स-यूएन ) को दरकिनार कर जबरन हमे हिंदू बनाने पर उतारू है जबकि झारखंड सरकार और बंगाल सरकार ने आदिवासियों की धार्मिक मांग-सरना धर्म कोड का अनुशंसा कर दिया है परंतु भाजपा और आरएसएस ने अब तक इस मामले पर चुप्पी साधकर आदिवासी विरोधी, सरना धर्म विरोधी होने का प्रमाण प्रस्तुत कर दिया है, जो भारत के लगभग 15 करोड़ आदिवासियों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. लगता है भाजपा और आरएसएस बाकि बचे दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़ों को जबरन अपना गुलाम बनाकर छोड़ेगी.

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