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jharkhand-big-political-development-झारखंड में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बाद उनके विधायक भाई बसंत सोरेन को भी चुनाव आयोग की नोटिस, हेमंत के आने का है इंतजार, हेमंत सोरेन दे सकते है मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, गुरुजी को बनाया जा सकता है नया मुख्यमंत्री

राशिफल

रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बाद अब उनके भाई और झामुमो के दुमका से विधायक बसंत सोरेन को भी चुनाव आयोग ने नोटिस जारी कर दिया है. अब तक मुख्यमंत्री को ही नोटिस जारी किया गया था. अब बसंत सोरेन को भी चुनाव आयोग ने नोटिस जारी की है. नोटिस में बसंत सोरेन से पूछा है कि वे यह बताये कि सदस्यता उनकी क्यों नहीं समाप्त की जाये और इस पर अपना स्पष्टता दें. खदान पट्टा अपने नाम पर लेने के मामले में उन्हें अयोग्य ठहराने को लेकर जारी किये गये नोटिस का जवाब दस दिनों में देने को कहा गया है. इसी तरह का एक नोटिस मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी दिया गया है, जिसमें उनको दस मई तक का समय दिया गया है और अब 5 मई का समय बीत चुका है. हेमंत सोरेन के बाद अब बसंत सोरेन को भी नोटिस आने के बाद राज्य में माहौल गर्मा गया है. राजनीतिक हालात बदलते हुए नजर आ रहे है. आपको बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई बसंत सोरेन के खिलाफ खनन पट्टा मामले की शिकायत राज्यपाल रमेश बैस से की थी. हेमंत सोरेन पर उन्होंने अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के नाम पर रांची के चान्हो में 11 एकड़ सरकारी जमीन आवंटित करने का भी संगीन आरोप लगाया था. इसके अलावा एक खनन कंपनी के नाम पर खदान का आवंटन कराया था, जिसमें उसके भाई बसंत सोरेन भी पार्टनर थे. यह शिकायत में कहा गया है कि चूंकि, ये लोग चुने हुए विधायक है और अहम बद पर रहते हुए इन लोगों ने दोहरा लाभ लेने की कोशिश की, जो संविधान के विपरित है. ऐसे ही मामले में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और सपा की सांसद रहते हुए जया बच्चन की संसद की सदस्यता जा चुकी है. इस मसले को लेकर शिकायत मिलने के बाद चुनाव आयोग ने पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक बसंत सोरेन को भी नोटिस दे दिया है. इसके बाद राजनीतिक तापमान सबसे तेजी से ऊपर चला गया है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दे सकते है इस्तीफा, गुरुजी को सीएम बनाने की कवायद
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन के खिलाफ चुनाव आयोग की नोटिस के बाद कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है. इस कड़ी के बाद पूर्व के दृष्टांत और कानूनी जानकारी लेने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके भाई दुमका विधायक बसंत सोरेन की विधायकी जा सकती है. अगर विधायक नहीं रहेंगे तो मुख्यमंत्री भी नहीं रह सकते है. ऐसे में विकल्पों को खोलकर झामुमो चल रही है. झामुमो के सूत्रों के मुताबिक, हेमंत सोरेन अभी मां रुपी सोरेन का इलाज कराने के लिए गये हुए है. वहां से लौटने के बाद वे फैसला ले सकते है. यह संभव है कि वे अपने पद से इस्तीफा दे दें. चूंकि, सरकार को कोई खतरा नहीं है, विधायक पर्याप्त है. इस कारण हेमंत सोरेन की जगह तत्काल में गुरुजी शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री के रुप में चुना जा सकता है. इसके बाद हेमंत सोरेन विधायक से इस्तीफा दे देंगे. बसंत सोरेन भी इस्तीफा दे देंगे, जिसके बाद वहां चुनाव छह माह के भीतर होगा, जिसमें खुद या गुरुजी शिबू सोरेन को चुनाव लड़ाया जा सकता है.

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