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jharkhand-bjp-big-news-झारखंड भाजपा में बड़ी घटना-मंझगांव से भाजपा के बागी रहे बड़कुंवर गगराई फिर से भाजपा में शामिल, सरयू राय, अमरप्रीत सिंह काले सरीखे नेताओं के पार्टी में वापसी का रास्ता हो रहा साफ

बड़कुंवर गगराई को भाजपा में वापसी कराते भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश.

रांची : भाजपा से निष्कासित किये गये पूर्व विधायक बड़कुंवर गगराई को फिर से भाजपा में वापस ले लिया गया है. उनको फिर से भाजपा में जगह दी गयी है. उनको राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने संयुक्त रुप से उनको फिर से पार्टी में वापसी करायी. बड़कुंवर गगराई की भाजपा में वापसी कोई छोटी बात नहीं है. बड़कुंवर गगराई को तब भाजपा ने बरखास्त किया था, जब वे भाजपा के खिलाफ मंझगांव विधानसभा से टिकट नहीं मिलने पर बागी उम्मीदवार बन गये थे. हालांकि, उन्होंने उस वक्त कहा था कि वे पहले ही भाजपा से 17 नवंबर 2020 को ही इस्तीफा दे चुके थे. उनको भाजपा में वापस लेकर भाजपा में बदलाव के संकेत दे दिये गये है. उस वक्त जब बड़कुंवर गगराई को भाजपा से बरखास्त किया गया था, उस वक्त ही भाजपा से बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके सरयू राय ने भी चुनाव लड़ा था और तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास को चुनाव में हरा दिया था. बड़कुंवर गगराई में पार्टी में वापसी के बाद यह कयास भी लगने तेज हो गये है कि क्या सरयू राय की भी पार्टी में वापसी होगी. वैसे खुद की वापसी के सवाल पर सरयू राय ने कहा कि भाजपा बाघ है और हम मनुष्य है. वहां तो बाघ को ना फैसला लेगा कि वह क्या करेगा, मनुष्य दमदार बाघ के सामने क्या फैसला ले सकता है. हालांकि, बड़कुंवर गगराई और सरयू राय की बर्खास्तगी के साथ भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले सतीश सिंह, रामकृष्ण दुबे, हरेराम सिंह, रतन महतो, असीम पाठक, डीडी त्रिपाठी, रामनारायण शर्मा और सुबोध श्रीवास्तव का भी निष्कासन कर दिया गया था. यह बड़ा घटनाक्रम भाजपा में माना जा रहा है. बड़कुंवर गगराई की भाजपा में वापसी के कई मायने भी निकाले जा रहे है और यह भी कयास लगने तेज हो गये है कि क्या सरयू राय और अमरप्रीत सिंह काले सरीखे नेताओं की भी वापसी संभव है. वैसे भी रघुवर दास का युग भाजपा में छंटने के बाद अब बाबूलाल मरांडी, दीपक प्रकाश और कुछ हद तक केंद्रीय अर्जुन मुंडा की पार्टी ज्यादा सुनती नजर आ रही है. हालांकि, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर रघुवर दास कायम है और उनका दिल्ली में काफी अच्छी पकड़ है, जो यह कोशिश तो जरूर करेंगे कि किसी भी हाल में सरयू राय, अमरप्रीत सिंह काले की वापसी नहीं हो, लेकिन लोगों का डिमांड भी यहीं है कि सबकी वापसी होकर भाजपा को कोल्हान ही नहीं पूरे झारखंड में नयी मजबूती दिलायी जाये. (भाजपा की क्या है बड़कुंवर को इंट्री कराकर क्या करना चाहती है, नीचे पढ़ें )

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भाजपा के कार्यक्रम में बड़कुंवर गगराई की भाजपा में वापसी का फोटो.

लक्ष्मण गिलुवा के विरोधी रहे थे बड़कुंवर, कोल्हान में चेहरा बनाये जा सकते है बड़कुंवर, लक्ष्मण गिलुवा के निधन के बाद भाजपा में आयी है शून्यता
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके स्वर्गीय लक्ष्मण गिलुवा के विरोधी के तौर पर बड़कुंवर गगराई को देखा जाता है. बड़कुंवर ने अपने निष्कासन के बाद भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था और कहा था कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा के कारण पार्टी हारी है और पार्टी में दुर्भावना से ग्रसित होकर काम कर रहे है. इस बीच कालांतर में ऐसी स्थिति आयी कि कोरोना से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटने के बाद लक्ष्मण गिलुवा का ही निधन हो गया. इसके बाद कोल्हान में भाजपा के पास राजनीतिक शून्यता आ गयी. इसी शून्यता को समाप्त करने के लिए यह संभव है कि बड़कुंवर गगराई को लाया गया हो. वैसे ही कोल्हान में एक भी सीट भाजपा के पास नहीं है. जमशेदपुर हो या फिर चाईबासा या सरायकेला-खरसावां जिला कहीं के सीट पर भाजपा को कोई सीट हासिल नहीं है. विधानसभा चुनाव में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी थी, यहीं वजह है कि नये सिरे से भाजपा ने अपनी कवायद शुरू कर दी है. (नीचे पढ़िये और किसकी हो चुकी है पार्टी में वापसी)

सबसे बाये बड़कुंवर गगराई हाथ जोड़े हुए. बीच में सरयू राय और बगल में केसरिया रंग के बंडी में अमरप्रीत सिंह काले.

14 साल बाद बाबूलाल मरांडी और अन्य लोग पार्टी में शामिल तो सरयू, काले और अन्य में क्या कमी
भाजपा से बागी होकर बाबूलाल मरांडी ने अपनी पार्टी झारखंड विकास मोर्चा बना ली थी. लेकिन 14 साल बाद भाजपा ने झारखंड में उनको वापस ले आया और उनके साथ पार्टी में अभय सिंह समेत झाविमो के कई नेता शामिल हो गये. ऐसे में भाजपा की ही विचारधारा के साथ अपनी पार्टी चलाने वाले भारतीय जनतंत्र मोर्चा के संस्थापक और विधायक सरयू राय की भी वापसी क्यों नहीं की जा सकती है, यह अंदरखाने ही चर्चा हो रही है. वैसे ही अमरप्रीत सिंह काले ने भाजपा से निष्कासित होने के बाद भाजपा को चंदा भेजवाया और भाजपा के ही सारे कार्यक्रमों को बिना पार्टी में होते हुए करते रहे है और अपनी आस्था भाजपा के प्रति जताते रहे है, ऐसे में ऐसे लोगों की वापसी संभव क्यों नहीं हो, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है.

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