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jharkhand-mukti-morcha-झामुमो के कोल्हान के विधायकों और नेताओं का दल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिला, टाटा समूह के खिलाफ मुख्यमंत्री को सारी बातों को अवगत कराया, जारी रहेगा आंदोलन

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जमशेदपुर : झारखंड मुक्ति मोर्चा पूर्वी सिंहभूम जिला समिति की ओर से राज्य के मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र सौंपा गया है. इसके माध्यम से झारखंड राज्य के मूलवासी और आदिवासियों को आर्थिक सामाजिक न्याय दिलाने एवं रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग की गई है. ज्ञापन के माध्यम से कहा गया, कि झारखंड राज्य में टाटा स्टील और उसकी आनुषंगिक इकाइयां कार्यरत है, मगर टाटा स्टील ग्रुप द्वारा झारखंड राज्य के आदिवासियों और मूल वासियों को ट्रेड अप्रेंटिस जैसे निम्न स्तरीय रोजगार भी मुहैया नहीं कराया जा रहा है. समिति की ओर से मुख्यमंत्री को 7 सूत्री मांग पत्र सौंपते हुए कहा गया, कि टाटा कमिंस प्राइवेट लिमिटेड का पैन का हस्तांतरण झारखंड से पुणे महाराष्ट्र के लिए करने का प्रयास किया जा रहा है, उसे तुरंत रद्द किया जाए. (नीचे देखे पूरी खबर)

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इसके अलावा टाटा कमिंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा कानूनी क्षेत्राधिकार भी मुंबई उच्च न्यायालय को हस्तांतरित करने का फैसला लिया गया है, जिसे अभिलंब रद्द कराने, महाराष्ट्र सरकार के श्रम कानूनों को कंपनी पर लागू करने का फैसला अविलंब रद्द करने की मांग की गई है. वहीं टाटा मोटर्स और टाटा कंपनी पुणे से कलपुर्जे और इलेक्ट्रॉनिक सामान मंगाती है, इसे अविलंब बंद करने एवं उक्त सामानों की आपूर्ति के लिए आदित्यपुर स्थित इंडस्ट्रियल एरिया को कार्यभार दिए जाने की मांग की गई है. टाटा स्टील के भूमि अधिग्रहण से विस्थापन एवं उत्पीड़न का दंश झेल रहे आदिवासियों एवं मूल वासियों के परिवार को पुनर्वासित करते हुए कंपनी सकारात्मक प्रयास अभिलंब प्रारंभ करें, ताकि उन्हें रोजगार, अच्छी स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा एवं मूलभूत सुविधाएं मिल सके. ट्रेड अप्रेंटिस के पदों पर शत-प्रतिशत मूल वासियों और आदिवासियों की बहाली सुनिश्चित किया जाए. अन्य पदों पर बहाली के समय मूल वासियों और आदिवासियों को प्राथमिकता दी जाए. वहीं टाटा ग्रुप द्वारा प्रतिवर्ष अपने सीएसआर में उपलब्ध राशि को सार्वजनिक करने एवं सीएसआर फंड से 2015 से आज तक झारखंड राज्य में किए गए विकास कार्यों की सूची प्रकाशित करने की मांग की गई. साथ ही आगामी वर्ष में किए जाने वाले विकास योजनाओं को सार्वजनिक करने की मांग की गई है. कंपनी द्वारा विस्थापित एवं क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले परिवारों को टाटा प्रबंधन टीएमएच के तहत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से पूर्वी सिंहभूम जिला झामुमो कमेटी ने मांग पत्र को गंभीरता से लेते हुए टाटा संस के अध्यक्ष को झारखंड सरकार के माध्यम से प्रेषित किए जाने और टाटा संस के अध्यक्ष के माध्यम से टाटा स्टील एवं ग्रुप की अन्य कंपनियों को हमारी मांगों को अविलंब पूरा करने हेतु निर्देशित किए जाने की मांग की है, ताकि भविष्य में टाटा स्टील एवं टाटा ग्रुप के किसी भी कंपनी के प्रबंधन के साथ स्थानीय एवं मूल वासियों का किसी प्रकार का टकराव न हो, और शांतिपूर्ण माहौल में कंपनी और क्षेत्र का विकास हो. विदित रहे कि बीते 17 नवंबर को कोल्हान में संचालित हो रहे टाटा समूह के सभी संस्थानों के गेट पर झामुमो द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया था. जिसके बाद से टाटा समूह एवं झामुमो आमने-सामने है. वैसे यह विवाद उस वक्त उभर कर सामने आया जब टाटा समूह की दो कंपनियों टाटा मोटर्स और टाटा कमिंस द्वारा पैन हस्तांतरण का मामला प्रकाश में आया. हालांकि टाटा कमिंस ने इसको लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, कि किसी कीमत पर यहां के मजदूरों के साथ अन्याय होने नहीं दिया जाएगा.

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