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jharkhand-political-crisis-झारखंड में एक साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन की जा सकती है विधायकी, राजभवन कभी भी ले सकता है फैसला, संविधान के जानकारों ने यह दी जानकारी

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रांची : झारखंड में सियासी सस्पेंस बरकरार है. शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भाई और झामुमो से दुमका के विधायक बसंत सोरेन को लेकर भी चुनाव आयोग का पत्र राज्यपाल के पास पहुंच गया. राज्यपाल के पास इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भी चुनाव आयोग की सिफारिश के कागज पहुंच चुके है, लेकिन वे इसको लेकर अब तक कोई कदम नहीं उठाये है. इसी तरह बसंत सोरेन के दस्तावेज भी चुनाव आयोग से राजभवन पहुंच चुका है, जिसको राज्यपाल खुद देख चुके है. बताया जाता है कि हेमंत सोरेन और बसंत सोरेन के विधायकी समाप्त करने के लायक मामला मानते हुए चुनाव आयोग ने सिफारिश की है कि उनकी विधायकी को समाप्त कर दिया जाये. चूंकि, राज्यपाल ने ही इसकी जांच और रिपोर्ट तलब की थी, इस कारण चुनाव आयोग खुद फैसला नहीं लेते हुए राज्यपाल को यह पूरा मामला भेज दिया गया है, क्योंकि राज्य के वे ही कस्टोडियन है, जो संविधान को लेकर कोई कदम उठा सकते है. वैसे विधायकी समाप्त करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास भी है. लेकिन राज्यपाल ही कुछ कर सकते है. इस कारण राज्यपाल रमेश बैस पर ही सारी नजरें टिकी हुई है. कयास यह अब लगाया जा रहा है कि राजभवन दोनों ही भाइयों की विधायकी को लेकर एक साथ फैसला ले सकता है. राज्यपाल की रहस्यमयी चुप्पी जरूर राजभवन की ओर भी उंगुली उठा रही है. हालांकि, संविधान के जानकार का कहना है कि फैसला लेने के लिए राज्यपाल के लिए कोई समय निर्धारित नहीं है. अगर राजभवन ऐसा नहीं करता है तो भी मुख्यमंत्री चाहे तो हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकते है ताकि सही फैसला हो सके. दरअसल, विधानसभा के किसी सदस्य की सदस्यता पर अंतिम फैसला राज्यपाल का होता है. चुनाव आयोग ने जो सिफारिश दी है, उस पर तत्काल फैसला लिया जाना चाहिए.

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