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dhanteras-2021- धनतेरस 2 नवंबर को, जानें चौघड़िया मुहूर्त, शुभ मुहूर्त व पूजा की विधि

राशिफल

शार्प भारत डेस्कः इन दिनों लोग अपने घरों की साफ- सफाई में जुटे हुए है. हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक जिस घर में साफ सफाई रहती है मां लक्ष्मी का प्रवेश उसी घर में होता है. आगामी 2 नवंबर को धनतेरस है. धनतेरस के दिन लोग बर्तन, जेवर आदि की रखीदारी करते हैं. वहीं धनतेरस के दिन से ही पांच दिवसीय दीपोत्सव का भी शुभांरभ हो जाता है. इस वर्ष धनतेरस 2 नवंबर को है. जानते है धनतेरस के दिन के मुहूर्त- (नीचे भी पढ़ें)

धनतेरस मुहूर्त- शाम के 06 बजकर 18 मिनट और 22 सेकंड से लेकर रात के 08 बजकर 11 मिनट और 20 सेकंड तक शुभ मुहूर्त है.
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक. इस समय भी खरीदारी का शुभ मुहूर्त माना जाता है.
विजय मुहूर्त- दोपहर 1 बजकर 33 मिनट से 2 बजकर 18 मिनट तक. (नीचे भी पढ़ें)

शाम और रात के मुहूर्त-
गोधूलि मुहूर्त- शाम 5 बजकर 05 मिनट से 5 बजकर 29 मिनट तक
प्रदोष काल- 5 बजकर 35 मिनट से 08 बजकर 11 मिनट तक. यह समय पूजा के लिए विशेष माना जाता है.
धनतेरस मुहूर्त- शाम 06 बजकर 18 मिनट 22 सेकंड से 08 बजकर 11 मिनट 20 सेकंड तक. इस समय पूजा और खरीदी दोनो की जा सकती है.
वृषभ काल- शाम 6 बजकर 18 मिनट से 8 बजकर 14 मिनट तक.
निशिता मुहूर्त- रात्रि 11 बजकर 16 मिनट से 12 बजकर 07 बजे तक. (नीचे भी पढ़ें)

दिन का चौघड़िया-
लाभ- सुबह 10 बजकर 43 मिनट से 12 बजकर 04 मिनट तक.
अमृत- दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से 1 बजकर 26 मिनट
शुभ- दोपहर 02 बजकर 47 मिनट से 04 बजकर 09 मिनट तक. (नीचे भी पढ़ें)

रात का चौघड़िया
लाभ- 07 बजकर 09 मिनट से 08 बजकर 48 मिनट तक.
शुभ- 10 बजकर 26 मिनट से 12 बजकर 05 मिनट तक.
अमृत- 12 बजकर 05 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक. (नीचे भी पढ़ें)

धनतेरस की प्रथा-
मान्यता के अनुसार हेम नाम के एक राजा थे. उन्हें दैव कृपा से पुत्र की प्राप्त हुई. जब ज्योंतिषों ने उस बालक की कुण्डली बनाई तो राजा को बताया कि बालक विवाह से ठीक चौथे दिन उसकी मृत्यु हो जाएगी. राजा यह सुनकर बेहद दुखी हो गए. तभी राजा ने सोचा की मैं अपने पुत्र को ऐसी जगह भेज देता हूं, जहां किसी स्त्री का प्रवेश न हो. तभी राजा ने ठीक इसी प्रकार किया. वहीं दैवयोग में एक दिन एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और दोनों ने गन्धर्व विवाह कर लिया. विवाह से ठीक चार दिन पश्चात उसकी मृत्यु हो गयी. यमदूत उसे लेने पहुंचे. जब यमदूत प्राण ले जा रहे थे तब नवविवाहिता उसकी पत्नी विलाप सुनकर उनका हृदय भी द्रवित हो उठा. परन्तु विधि के विधान को कोई तोड़ नहीं सकता था. तब यम देवता ने कहा कि जो भी कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात मेरे नाम का पूजन करके दीपमाला दक्षिण दिशा की ओर भेट करेंगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा. इसलिए इस दिन सभी लोग अपने घरों में यम का दीपक जलाते है. (नीचे भी पढ़ें)

धनतेरस पूजन विधि-
धनतेरस की शाम उत्तर दिशा में कुबेर,भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस दौरान भगवान का स्नान ध्यान कर दीपक व अगरबत्ती जलाए. भगवान भन्वंतरि पीली मिठाई और कुबेर को सफेद मिठाई चढ़ाएं. फिर माता लक्ष्मी और गणेश की पूजा करें.

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