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guru-nanak-devji-jayanti-“नानक नाम जहाज है, चढ़ै सो उतरे पार”, पढ़ें गुरु नानक देव जी के संक्षिप्त जीवनी

जमशेदपुरः देशभर में शुक्रवार को गुरु नानक देव जी सिखों के संस्थापक और सिखों के पहले गुरु का 552वां प्रकाश पर्व मनाया जाएगा. उनका जन्म 1469 ईसवी में कार्तिक पूर्णमा के दिन हुआ था. जिसे वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था. उनके पिता का नाम कल्याण (मेहता कालू) जी और माता का नाम तृप्ती देवी था. 18 वर्ष की आयु में उनका विवाह हो गया था, उसके बावजूद वें घूमकर लोगों को शिक्षा देते थे. इसे सिख धर्म में प्रकाश पर्व या गुरु परब के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन सिख समुदाय के लोग प्रभात फेरी, नगर कीर्तन व गुरुद्वारों में लंगर खिलाते है. इस दौरान उनके जीवनी के बारे में बताते हुए डॉ मनजीत कौर ने बताया कि गुरु नानक देव जी का बचपन से अध्यात्म और ईश्वर की प्राप्ति में रुचि रखते थे. (नीचे भी पढ़ें)

एक दिन बात थी जब उनके पिता कल्याणचंद्र ( महेता कालू) ने उन्हें पढ़ने के पंडित जी के पास भेजा तो पंडित जी ने उन्हें ओम लिखने के लिए कहा, लेकिन गुरु साहिब ने ओम के आगे अंकों में एक लिखा, जिसका तात्पर्य यह था कि ईश्वर एक है. गुरुनानक देव जी रूढ़िवादी विचारों के विरूद्ध बचपन से ही काम करते थे. जब वें 11 साल थे उस वक्त उन्होंने जनेऊ पहने से मना कर दिया था, उन्होंने कहा – कि जनेऊ पहनने से दूसरा जन्म होता है, जिसको हम आध्यात्मिक जन्म कहते है तो जनेऊ भी किसी और किस्म का होना चाहिए, जो आत्मा को बांध सके. एक बात की बात है जब गुरु देव जी शिक्षा दे रहे थे तब उनसे कुछ लोगों ने पूछा कि आपके अनुसार हिन्दू बड़ा या मुसलमान तो उन्होंने कहा अवल अल्लाह नूर उपाइया कुदरत के सब बंदे/ एक नूर से सब जग उपजया को भले को मंदे, अर्थात सब बंदे ईश्वर के पैदा किए हुए हैं, न तो हिंदू कहलाने वाला रब की निगाह में कबूल है, न मुसलमान कहलाने वाला. रब की निगाह में वही बंदा ऊंचा है जिसका अमल नेक हो, जिसका आचरण सच्चा हो. इस तरह से गुरु नानक जी ने देश भर में अपनी शिक्षा फैलाई और लोगों को सही राह पर चलने का मार्गदर्शन दिया. यात्रा के दौरान उनके चरन जहा भी पड़े वहां तीर्थ स्थल बना दिया गया है. उन्होंने अंतिम दिन पंजाब के करतारपुर (पाकिस्तान) में लोगों को शिक्षा देते हुए गुजारे थे. उनकी मृत्यु 22 दिसंबर को 1539 ईस्वी में हुआ था.

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