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hartalika-teej-vrat- हरतालिका तीज व्रत गुरुवार को, 14 साल बाद बन रहा उत्तम संयोग

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जमशेदपुर : हिंदू पंचांग के मुताबिक महिलाओं के लिए हरतालिका तीज व्रत काफी खास है. इस वर्ष नौ सितंबर (गुरुवार) को हरतालिका तीज व्रत है. तीज के दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है. भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का प्रारंभ 8 सितंबर (बुधवार) की रात 2 बजकर 33 मिनट पर होगा. वहीं तिथि की समाप्ति 9 सितंबर की रात 12 बजकर 18 मिनट पर होगी. ऐसे में उदया तिथि के कारण व्रत 9 सितंबर को किया जाएगा. इस दौरान पूजा करने का विशेष दो मुहूर्त बन रहा है. इस दिन महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास में रहती हैं, शाम को श्रृंगार कर पूजा करती हैं और सुबह अपना व्रत तोड़ती हैं. इस वर्ष तीज में गुरुवार को शुक्ल योग का उत्तम संयोग बन रहा है. इस दिन उपरोक्त संयोग के कारण हरितालिका तीज विशेष पुण्यप्रदायक व मनोरथ सिद्धिप्रद है.
शुभ मूहुर्त-
गुरुवार सुबह 6 बजकर 33 मिनट से सुबह 8 बजकर 33 मिनट तक. वहीं दूसरा शुभ मुहूर्त प्रदोष काल की शाम 6 बजकर 33 मिनट से 8 बजकर 51 मिनट तक है. (नीचे भी पढ़ें)

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पौराणिक कथा
हरतालिका तीज में पौराणिक कथा के मुताबिक मां गौरी ने पार्वती के रूप में हिमालय के घर में जन्म लिया था. माता पार्वती बचपने से ही भगवान शिव की अराधना करती थी. पूरा दिन विवाहित जीवन के लिए इस दिन की जाने वाली पूजा और व्रत किया जाता है. भगवान शिव ने माता पार्वती को हरतालिका तीज के व्रत के बारे में बताया था. पौराणिक कथा के अनुसार मां गौरी न पार्वती के रूप में हिमालय के घर में जन्म लिया था. माता पार्वती बचपन से ही भगवान शिव को वर के रूप में प्राप्त करना चाहती थी और इसके लिए उन्होंने 12 साल तक कठोर तपस्या भी की थी. माता पार्वती ने इस तपस्या के दौरान अन्न और जल ग्रहण नहीं किया था. एक दिन नारद जी ने हिमालय राज को बोला कि भगवान विष्णु आपकी पुत्री पार्वती से विवाह करना चाहती है. वहीं, दूसरी और भगवान विष्णु को जाकर कहा कि महाराज हिमालय अपनी पुत्री पार्वती का विवाह आपसे करना चाहते है. ऐसा में सुनकर भगवान विष्णु ने हां कर दी. वनारद जी ने पार्वती को जाकर कहा कि भगवान विष्णु के साथ आपका विवाह तय कर दिया गया है. ऐसा सुनकर माता पार्वती निराश हो गई और एक एकांत स्तान पर जाकर अपनी तपस्या फिर से शुरू कर दी. माता पार्वती सिर्फ भगवान शिव से ही विवाह करना चाहिती थी और उन्हें प्रसन्न करने के लिए माता पार्वती ने मिट्टी के शिवलिंग का निर्माण किया. मान्यता के अनुसार उस दिन भाद्रपद शुक्ल का तृतीया का दिन था. माता पार्वती ने उस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की स्तुति की. तब भगवान शिव माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हुए और उनकी मनोकामना पूरा होने का वरदान दिया. इस लिए इस वर्त को खास महिलाएं मनाती है और शिव पार्वती की पूजा की जाती है.

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