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indira-ekadashi-अक्टूबर माह का पहला व्रत इंदिरा एकादशी शनिवार को, जानें पूजा का शुभ मूहुर्त व कथा

राशिफल

शार्प भारत डेस्क : अक्टूबर महीना शुरु होते ही सबसे पहला व्रत इंदिरा एकादशी का है. आश्विन मास के कृष्ण पक्ष यानी शनिवार को को इंदिरा एकादशी है. इस व्रत की मान्यता इसलिए भी बढ़ जाती है कि इस समय पितृपक्ष चल रहा होता है. मान्यता है कि पितरों की आत्मा की शांति के लिए इंदिरा एकादशी रखी जाती है. मान्यता के अनुसार यदि कोई पूर्वज जाने-अनजाने में हुए अपने पाप कर्मों के कारण यमराज के पास अपने कर्मों का दंड भोग रहे है तो इस एकादशी पर विधिपूर्वक व्रत कर इसके पुण्य को उनके नाम पर दान कर दिया जाए तो उन्हें मोक्ष मिल जाता है. (नीचे भी पढ़ें)

इंदिरा एकादशी शुभ मुहूर्त-
इंदिरा एकादशी प्रारंभ- 01 अक्टूबर (शुक्रवार) की रात 1 बजकर 03 मिनट से
एकादशी तिथि का समापन- 02 अक्टूबर (शनिवार) की रात 11 बजकर 10 मिनट तक.
पारण का समय- 03 अक्टूबर (रविवार) सुबह 06 बजकर 15 मिनट से. (नीचे भी पढ़ें)

व्रत कथा-
सतयुग में इंद्रसेन नाम का एक राजा माहिष्मति क्षेत्र में शासन करते थे. इंद्रसेन परम् विष्णु भक्त और धर्मपरायण राजा थे और सुचारू रूप से राज-काज कर रहे थे. एक दिन अचानक देवर्षि नारद का उनकी राज सभा में आगमन हुआ. राजा ने देवर्षि नारद का स्वागत सत्कार कर उनके आगमन का कारण पूछा. नारद ने बताया कि कुछ दिन पूर्व वो यमलोक गये थे वहां पर उनकी भेंट राजा इंद्रसेन के पिता से हुई. आपके पिता ने आपके लिए संदेशा भेजा है. उन्होंने कहा कि जीवन काल में एकादशी का व्रत भंग हो जाने के कारण उन्हें अभी तक मुक्ति नहीं मिली है और उन्हें यमलोक में ही रहना पड़ रहा है. मेरे पुत्र और संतति से कहिएगा कि यदि वो अश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखें तो उसके भाग से मुझे मुक्ति मिल जाएगी. वहीं नारद मुनि की बात सुन कर राजा इंद्रसेन ने व्रत का विधान पूछा और व्रत करने का संकल्प लिया. राजा ने पितर पक्ष की एकादशी तिथि पर विधि पूर्वक व्रत का पालन करते हुए व्रत किया. पितरों के निमित्त मौन रह कर ब्राह्मण भोज और गौ दान किया. इस प्रकार राजा इंद्रसेन के व्रत और पूजन के भाग से उनके पिता को यमलोक से मुक्ति और बैकुंठ लोक की प्राप्ति हो गयी. उस दिन से ही इस व्रत का नाम इंदिरा एकादशी पड़ गया.

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