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Jamshedpur : पूर्वी भारत के गुरुद्वारों से निकली दया क्षमा की आवाज, गुरु अर्जुन देव जी का 415 वां शहादत दिवस मना

जमशेदपुर : पूर्वी भारत के सभी शहरों एवं गुरुद्वारों से सोमवार को मानवता का कल्याण, क्षमा और दया के संदेश के साथ गुरु अर्जन देव जी का 415वां शहादत दिवस मनाया गया। तख्त श्री हरमंदिर साहिब जी पटना साहेब के उपाध्यक्ष सरदार इंद्रजीत सिंह ने बताया कि बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल, ओड़िशा के सभी शहरों एवं गुरुद्वारों में श्री अखंड पाठ का भोग डाला गया और विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ अरदास हुई। सिखों को संदेश दिया गया कि वह प्रेम, दया, क्षमा, सहनशीलता, नम्रता, त्याग, तपस्या के गुणों को अपनाएं। 1606 ईश्वी में गुरु अर्जन देव जी को बादशाह जहांगीर के आदेश पर खौलते पानी में डालकर एवं उनके शरीर पर गर्म रेत डालकर शहीद किया गया था। वे सत्य और अहिंसा के रास्ते पर अडिग रहे। उन्होंने परमेश्वर में अपनी रजा बनाए रखी और भक्तों व गुरु हरगोविंदजी को यह संदेश दिया कि सत्य के मार्ग से टला नहीं है। इसके लिए प्राणों की आहुति भी देनी पड़े तो पीछे नहीं हटना है। उन्होंने कहा कि सिख पंथ की पहचान आदि ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का संपादन गुरु अर्जन देव जी ने किया। उनकी देखरेख में दरबार साहिब स्वर्ण मंदिर का निर्माण पूरा हुआ। सिख पंथ को निराली पहचान दी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शांति के पुंज शहीदों के सरताज की शहादत की याद में सभी गुरुद्वारा एवं शहरों में चना एवं मीठा शरबत का वितरण करो और प्रसाद किया गया। वे स्वयं भी टेल्को गुरुद्वारा गए और गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष मत्था नवाया और संगत के समक्ष गुरु का इतिहास रखा। टेल्को में प्रधान गुरमीत सिंह ने शहादत दिवस पर प्रकाश डाला और सरदार सुखदेव सिंह खालसा ने शबद गायन किया।

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बारीडीह : सिखों के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी के 416 शहादत दिवस को समर्पित श्री सुखमणि साहिब जी के लगातार 40 दिनों से चले आ रहे पाठ की समाप्ति हुईl स्त्री सत्संग बारीडीह की पूर्व महासचिव अमरजीत कौर ने 40 दिनों के पाठ की लड़ी घर पर ही शुरू की थीl क्योंकि कोविड-19 के सरकारी आदेश के मद्देनजर घर पर ही पाठ करना प्रारंभ किया और वर्चुअल सिस्टम के माध्यम से सभी को जोड़ा। बीबी अमरजीत कौर के अनुसार आपदा में इसे अवसर के रूप मे लिया गयाl क्योंकि घर में नई पीढ़ी को परंपरा एवं विरासत से भली-भांति अवगत कराया जा सकेगा। श्री सुखमणि साहिब जी के पाठ की समाप्ति अरदास विधि-विधान के साथ की गयी। साथ ही अमरजीत कौर ने यह निर्णय लिया की कोरोना महामारी जल्द से जल्द छुटकारा पाया जाए, इसके लिए आज से 40 दिनो तक श्री सुखमणि साहिब के पाठ प्रारंभ किया गयाl (नीचे भी पढ़ें)

गुरु अर्जन देव जी के बारे में …
गुरु अर्जन देव जी सिखों के पांचवें गुरु थे और चौथे गुरु श्री गुरु रामदास जी के बेटे थे। वे सिख धर्म के पहले शहीद हैं और उनके पौत्र गुरु तेग बहादुर जी ने भी शहादत दी पर पौत्र गुरु गोविंद सिंह जी राष्ट्रीय एवं धर्म की रक्षा के लिए मुगलों के खिलाफ लड़े और उनके चारों बेटों ने इस शहादत प्राप्त की। अमृतसर में स्वर्ण मंदिर की स्थापना गुरु अर्जन देव जी ने की थी और उसकी नीव सूफी संत मियां मीर ने रखी थी। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का संकलन भी उन्होंने अपनी देखरेख में करवाया था। इसी गुरु ग्रंथ साहिब जी के कारण रूढ़िवादी मौलाना और पंडित नाराज हो गए और मुगल बादशाह के कान भरे गए। अमीर खुसरो की मदद करने का आरोप लगा और मुगल बादशाह जहांगीर के आदेश पर ही यासा (इसके तहत किसी व्यक्ति का रक्त धरती पर गिराए बिना यातना देकर शहीद किया जाता था) कानून के तहत लाहौर में गर्म रेत शरीर पर डालकर जेठ महीने की तपती गर्मी में 1606 में किया गया। इस यातना के बावजूद वे ईश्वर को धन्यवाद देते रहे।
“तेरा किया मीठा लागै ।
हरि नामु पदारथु नानक मांगै।।”

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