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गुरूवार, मई 13, 2021
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jharkhand-इतिहासकारों का मानना है कि वनवास के समय श्रीराम सिमडेगा की गुफाओं में विश्राम किए, जानिए लोहरदगा और गुमला से जूड़ी श्रीराम की कहानी

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शार्प भारत पोर्टल- झारखंड में ऐसे कई धार्मिक स्थल है, जिनका इतिहास हम में कई लोग नही जानते होगे. क्या आपको पता है कि भगवान श्रीराम के चरण झारखंड के भी कुछ जिले में पड़े थे. जब श्रीराम 14 वर्ष वनवास में थे, तो उनकी चरण पादुका झारखंड के सिमडेगा, लोहरदगा में पड़े थे. वनवास में उनके साथ लक्षमण और माता सीता भी थी. ज्ञानियों का मान्यता है कि झारखंड के कई क्षेत्रों में भगवान श्रीराम ने अपना निवास स्थान बनाया था. रामेश्वर से अयोध्या तक तक के यात्रा में झाकखंड से गुजरने और ठहरने के कई प्रमाण मिला है. वही सिमडेगा में रामरेखा धाम की पौराणिक कहानी है कि भगवान राम ने सीताजी को बारिश से बचाने के लिए एक रेखा खींची थी, जिससे पहाड़ का एक हिस्सा झुक गया है. झुकी गुफा-पहाड़ आज भी है. यहीं पर धनुष कुंड, गुप्त गंगा, अग्नि कुंड,सीता चौक में भी भगवान राम की आने की मान्यता है. वही सिमडेगा के पड़ोसी जिले गुमला और लोहरदगा में भी भगवान राम का साक्ष्य मिलते है. झारखंड के पौराणिक बुद्धिमान लोगों का कहना है कि इन धार्मिक स्थलों को धार्मिक सर्किट बनाना चाहिए. वही इसे श्रीराम सर्किट का नाम दिया जाना चाहिए. मानतायों के अनुसार लोहरदगा में माता सीता ने पकवान बनाए थे. पकवान वनवास के समय माता सीता ने बनाया था. वही सीमडेगा के गुफा में भगवान राम के साथ सीताजी और लक्ष्मण गुफा में विश्राम किए थें. गुमला में बजरंग बली का जन्म स्थान है.(नींचे भी पढ़े)

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इतिहासकारों ने बताया है कि रामायण सर्किट में जब बिहार का जिक्र किया गया है, उस समय झारखंड और बिहार एक था, इसलिए दिए गए प्रमाण साक्ष्य है. वहां के लोगों का कहना है कि इन स्थानों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते है, पर वे एक ही जगह पूजा कर के लौट जाते है, इसलिए सर्किट के निर्माण से इसे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. इन 200 किमी जगहों को एक साथ जोड़ कर धार्मिक सर्टिक बनता है.

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