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navratra-special- शारदीय नवरात्रः महा अष्टमी के दिन करें मां महागौरी की पूजा

राशिफल

शार्प भारत डेस्क : नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. मां दुर्गा का आठवां स्वरूप मां महगौरी का होता है. मान्यता है कि जो भक्त पूरे नौ दिन का उपवास नहीं रख सकते है, उन्हें प्रथम और आठवां व्रत रखने से ही उन्हें फल की प्राप्ति हो जाती है. इस दिन कई घरों में माता को श्रृंगार चढ़ाया जाता है और कन्या पूजा भी की जाती है. मां महागौरी के स्वरूप को अन्नपूर्णा, ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी भी कहा जाता है. इनकी चार भुजाएं हैं. उनके ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा है और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है. मां ने ऊपर वाले बांए हाथ में डमरू धारण किया हुआ है और नीचे वाला हाथ वर मुद्रा है. मां का वाहन वृषभ है इसीलिए उन्‍हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है. मां सिंह की सवारी भी करती हैं
महागौरी की कथा-
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती महज आठ साल की थी जब उन्होंने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी. तपस्या इतना कठोर थी कि उनका पूरा शरीर काला पड़ गया था. इस तपस्या को देखकर भगवान शिव प्रसन्न होकर उन्हें स्वीकार किया. इसके बाद भगवान शिव ने पार्वती को गंगाजल से स्नान करने को कहा. जिसके बाद उनका रंग स्वेत में बदल गया. तभी से इनका नाम महागौरी के नाम से विख्यात हो गया.
अष्टमी तिथि- 12 अक्टूबर (मंगलवार) की रात 09 बजकर 49 मिनट से प्रारंभ होकर 13 अक्टूबर 2021, बुधवार की रात 08 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगा. अष्टमी का पूजन 13 अक्टूबर बुधवार को किया जाएगा. (नीचे भी पढ़ें)

महागौरी की आरती-
जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥
हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥
चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥
भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥
सती ‘सत’ हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥
बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥
‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो.
महागौरी के मंत्र
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै।।

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