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sohrai-festival-दीपावली साथ सोहराय की तैयारियों में जुटा आदिवासी समुदाय, विभिन्न रंगों से सजने लगे घर-द्वार

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जमशेदपुरः गुरुवार को दीपावली के साथ साथ आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व सोहराय भी है. यह पर्व झारखंड, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, बंगाल के संथाल, उराव, हो समाज के द्वारा मनाया जाता है. यह पर्व 4 नवंबर गुरुवार से शुरू हो होगा जो पांच दिन तक चलेगा. इसे लेकर आदिवासी समाज के लोग तैयारी में जुट गए है. सोहराय पर्व को लेकर महिलाएं बेहद उत्साहित रहती है. वें अपने घरों की साफ सफाई कर रंग- बिरंगी मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से अपने घर के बाहर सजाती है. मानसिंह बास्के ने बताया कि धान पकने के बाद पहली कटनी सोहराय में होती है. बेहतर फसल और धान आने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है. (नीचे भी पढ़ें)

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पहले दिन गोट बोंगा के अवसर पर ग्रामीण अपने अपने गाय और बैलों को इकट्ठा करते है और शाम में उनके आगमन से पूर्व प्रवेश द्वार की साफ- सफाई कर सजाकर तैयार करते है. इस दिन लोग अपने गाय या बैलों को सजाते है. दूसरे दिन गोड़ा बोंगा मनाया जाता है. तीसरे दिन खुंटो बोंगा मनाया जाता है. इस दौरान आदिवासी लोग अपने गाय और बैलों के साथ नृत्य कर खुशियां मनाते है. वहीं चौथे दिन गांव की महिलाएं व पुरुष एक टोली बनाकर एक- दूसरे के घर बांसुरी बजाते हुए जाते है. अंतिम दिन लोग अपने खेत की नई फसल निकाल खिचड़ी बनाते है.

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