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jamshedpur-cait-कपड़ा और फुटवेयर पर 12 फीसदी जीएसटी लगाने का विरोध, केंद्र सरकार वापस ले फैसला नहीं तो राष्ट्रीय स्तर का होगा आंदोलन

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जमशेदपुर- उल्टे कर ढांचे ( इनवर्टेड ड्यूटी) को हटाने और ठीक करने के लिए जीएसटी कॉउन्सिल के निर्णय को लागू करते हुए केंद्र सरकार ने 18 नवंबर को लागू कर समस्त प्रकार के कपडे एवं फुटवियर पर जीएससटी की दर 5% से बढ़ाकर 12% कर दी है। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने यह कहते हुए अफ़सोस जाहिर किया की जीएसटी कर ढांचे को सरल और युक्तिसंगत बनाने के बजाय, जीएसटी परिषद ने इसे बेहद जटिल जीएसटी कानून में तब्दील कर दिया है। कैट ने कहा कि तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा बताये गए जीएसटी ढांचे के विपरीत बना दिया है। (नीचे भी पढ़ें)

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कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल और राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोन्थालिया ने कहा कि सवाल यह है कि क्या उल्टा कर ( इनवर्टेड ड्यूटी ) ढांचा पूरी तरह से सही है? सूती कपड़ा उद्योग में कोई उलटा कर ढांचा नहीं था, फिर कपड़े और अन्य सूती वस्त्र सामान को 12% के दायरे में क्यों लाया गया। यहां तक कि मानव निर्मित कपड़ा उद्योग में भी, वस्त्र, साड़ी और सभी प्रकार के मेड अप के निर्माण के स्तर पर कोई उल्टा कर मुद्दा ही नहीं था। कपड़ा उद्योग के चरणों को समझे बिना इस तरह का कठोर निर्णय एक प्रतिघाटी का कदम होगा। कपड़ा और जूते जैसी बुनियादी वस्तुओं पर जीएसटी की दर को 5% से बढ़ाकर 12% करने की केंद्र सरकार की अधिसूचना का दिल्ली सहित पूरे देश में व्यापारियों द्वारा विरोध हो रहा है और कैट ने इस तरह की मनमानी के खिलाफ देश भर में एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है।इस आंदोलन का नेतृत्व कैट के अंतर्गत व्यापार के दो महत्वपूर्ण व्यापार एसोसिएशन दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसोसिएशन और फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल एसोसिएशन (फोस्टा) द्वारा किया जाएगा। इसमें टेक्सटाइल और फुटवियर के अलावा सभी तरह के व्यापार के व्यापारिक संगठन, उनसे जुड़े कर्मचारी, कारीगर भी शामिल होंगे। (नीचे भी पढ़ें)

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कैट के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल ने कहा की रोटी, कपड़ा और मकान जीवन की मूलभूत वस्तुएं है।
रोटी पहले ही बहुत महंगी हो गई, मकान खरीदने की स्थिति आम आदमी की है नहीं और कपडा जो सुलभ था उसको भी जीएसटी काउंसिल ने महंगा कर दिया है।आखिर देश के आम आदमी के साथ यह किस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है। इस मामले में केवल केंद्र सरकार ही नहीं बल्कि राज्य सरकारें भी पूर्ण रूप से दोषी है क्योंकि जीएसटी काउंसिल में यह निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं। उन्होंने मांग है कि कपडा एवं फुटवियर पर जीएसटी के बढ़ी दर को तुरंत वापिस लिए जाये। उन्होंने कहा कि कोविड के कारण व्यापार पहले ही तबाह हो चुका है और अब जब इस वर्ष से व्यापार पटरी पर आना शुरू हुआ था, ऐसे में जीएसटी की दर में वृद्धि कर व्यापार के ताबूत में कील ठोकने का काम किया गया है। आल इंडिया ज्वेलरी एवं गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने कहा कि सूत्रों के अनुसार ज्ञात हुआ है कि जीएसटी की फिटमेंट कमेटी ने सोने की ज्वेलरी पर जीएसटी की दर 3 % से बढ़ाकर 5 % करने की सिफारिश की है, जिससे देश में गोल्ड ज्वेलरी का व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा और सोने की तस्करी भी बढ़ने की भी संभावना है। (नीचे भी पढ़ें)

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कैट के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोन्थालिया ने कहा कि फिटमेंट कमेटी ने जीएसटी में वर्तमान कर दर 5 % को 7 %, 12 % को 14 % एवं 18 % को 20 % करने की सिफारिश की है। कर दर में प्रस्तावित यह वृद्धि बेहद तर्कहीन एवं औचित्यहीन है और साफ़ तौर पर फिटमेंट कमेटी की मनमानी है। जिस तरह से लगातार जीएसटी के स्वरुप को विकृत किया जा रहा है और “एक देश -एक कर” का मजाक उड़ाया जा रहा है वह बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा की इस वृद्धि के खिलाफ देश भर के व्यापारी लामबंद हो गए हैं और एक वृहद आंदोलन की तैयारी के लिए आगामी 28 नवम्बर को कैट ने देश के सभी राज्यों के कपड़े एवं फुटवियर व्यापारियों एवं सभी राज्यों के प्रमुख व्यापारी नेताओं की एक वीडियो के जरिये मीटिंग बुलाई है जिसमें आंदोलन की रणनीति को तय किया जाएगा। भरतिया एवं खंडेलवाल ने कहा की जीएसटी लागू करने से पूर्व तत्कालीन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने अपने आवास पर कैट को जिस जीएसटी के बारे में बताया था, उस जीएसटी की धज्जियां उड़ा दी गई हैं और उसके स्थान पर एक बेहद जटिल जीएसटी कर प्रणाली को लागू कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईज ऑफ़ डूइंग बिज़निस तथा एक देश -एक कर की घोषणा का खुल कर मजाक उड़ाया जा रहा है।

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