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Arka-Jain-University : एजेयू में फार्मेसी विभाग का ‘नेचुरल एंड नॉवेल फार्मास्यूटिकल रिसर्च’ विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस संपन्न, प्राकृतिक उत्पादों पर गहन शोध करने पर बल

जमशेदपुर : अरका जैन विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग ने फिलीपीन्स के सान पेड्रो कॉलेज के फार्मेसी विभाग के सहयोग से ‘नेचुरल एंड नॉवेल फार्मास्यूटिकल रिसर्च’ विषय पर तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन किया गया. कांफ्रेंस में फार्मेसी की दुनिया के देश-विदेश के कई नामचीन अकादमिक, औद्योगिक एवं प्रबंधकीय हस्तियों ने अपनी बातें रखीं और करीब पांच सौ प्रतिभागियों ने इसका लाभ उठाया. तीन-तीन पूर्ण अधिवेशन और तकनीकी सत्रों में करीब 50 पर्चे पढ़े गए. कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र में झारखण्ड ड्रग्स कंट्रोल डायरेक्टरेट के सहायक निदेशक सुमंत कुमार तिवारी कांफ्रेंस के मुख्य अतिथि और सीयू शाह कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी के पूर्व प्राचार्य डॉ एसजी देशपांडे विशिष्ट अतिथि थे. इस सत्र में अरका जैन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एसएस रज़ी, सान पेड्रो कॉलेज के प्रेसिडेंट सिस्टर एइडा फ़्रेंसिलो, संकायाध्यक्ष प्रो फातिमा तेसोरो, अरका जैन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ़ फार्मेसी के डीन डॉ ज्योतिर्मय साहू ने प्रतिभागियों को सम्बोधित किया. डॉ ज्योतिर्मय साहू ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि दवाओं की खोज एक चुनौतीपूर्ण वैज्ञानिक कार्य बन रहा है, जो कि प्राकृतिक उत्पाद की स्क्रीनिंग से संभव है. इसके लिए विशेषज्ञता और अनुभव की आवश्यकता होती है. (नीचे भी पढ़ें)

कुलपति प्रो एसएस रज़ी ने कहा कि प्राकृतिक उत्पादों ने इस धरती पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए मनुष्य का अस्तित्व संभव हुआ है. प्रकृति की उत्कृष्ट घटना हर्बल दवा की खोज को प्राप्त करने के लिए हमेशा सुनहरे निशान के रूप में खड़ी होती है. मुख्य अतिथि सुमंत कुमार तिवारी ने अरका जैन विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग की अकादमिक गतिविधियों की प्रशंसा करते हुए हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया. डॉ देशपांडे ने नयी बीमारियों की बढ़ती संख्या और नए मोलेक्युल्स की खोज की ज़रूरत को समझते हुए प्राकृतिक वस्तुओं से निर्मित दवाओं की महत्ता को रेखांकित किया। सान पेड्रो कॉलेज के डॉ एर्विन फॉलेर ने कहा कि प्राकृतिक उत्पादों और पारंपरिक दवाओं का बहुत महत्व है. कांफ्रेंस में बारह अतिथि वक्ताओं ने नेचुरल एंड नोवेल रिसर्च पर अपने सारगर्भित वक्तव्य रखे, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों से नई दवाओं का निर्माण का रास्ता प्रशस्त होने के आसार बताए गए. विशेषज्ञ वक्ताओं के रूप में डॉ कृष्णप्रिया मोहनराज, डॉ अजय सेमल्टी, प्रो फातिमा तेसोरो, श्रवण कुमार, रंजीत बार्शिकार, डॉ नागराज राव, डॉ मोना सेमल्टी, जोसफ कुएरेक्वीन्सी, डॉ अजीत ठाकुर, डॉ वंदना पत्रवाले, डॉ एर्विन फॉलेर, डॉ अम्बर व्यास व अन्य उपस्थित थे. (नीचे भी पढ़ें)

कांफ्रेंस के समापन सत्र में डॉ ज्योतिर्मय साहू एवं डॉ एर्विन फलर ने इस बात पर मुहर लगायी कि कांफ्रेंस के चर्चे से यह बात स्पष्ट होती है कि प्राकृतिक उत्पादों और उनके डेरिवेटिव को कई वर्षों से चिकित्सीय एजेंटों और संरचनात्मक विविधता के स्रोत के रूप में मान्यता दी गई है और प्राकृतिक उत्पादों में बहुआयामी रासायनिक संरचनाओं की विविधता की एक विस्तृत श्रृंखला होती है, इस बीच, जैविक क्रिया संशोधक के रूप में प्राकृतिक उत्पादों की उपयोगिता ने भी काफी ध्यान आकर्षित किया है और हमें प्राकृतिक उत्पादों पर गहन शोध करने की आवश्यकता है. कांफ्रेंस का संचालन डॉ मनोज पाठक, खुशबू राज व योगिता कुमारी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रो सुमंत सेन ने किया.

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