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arka-jain-university : अरका जैन यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग में हाशिये के साहित्य पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

राशिफल

जमशेदपुर : अरका जैन यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग ने हाशिये के वर्ग द्वारा सृजित साहित्य पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. जिसमें अमेरिका, कनाडा, ब्रिटैन, बांग्लादेश, सऊदी अरब समेत कई देशों के रिसोर्स पर्सन, शोधार्थी व पेपर प्रेजेंटर आभासी मंच से जुड़े. संगोष्ठी की टॉपिक पेरीफेरल राइटिंग: रेफ्लेक्शंस ऑन न्यू पावर, हाइरार्कीज एंड नॉर्म्स थी. मुख्य अतिथि प्रो शक्तिपद पात्र ने कहा कि कल तक जो साहित्य हाशिये पर था आज वो अंग्रेजी या किसी अन्य भारतीय या विदेशी क्षेत्रीय भाषा में लेखन की मुख्य धारा है. साहित्यिक स्रोत का यह रूप विश्व भर में उत्पीड़ित वर्गों और जाति के बारे में है. (नीचे भी पढ़ें)

कुलपति प्रो एस एस रज़ी ने कहा कि सीमांत साहित्य को साहित्यिक उत्पादन के रूप में समझा जाता है जो वाणिज्यिक प्रकाशकों के पारंपरिक सर्किट के बाहर प्रसारित होता है. यह साहित्यिक उत्पादन है जो साहित्यिक कैनन के भीतर शामिल नहीं है, या जिसे, कई मामलों में, जानबूझकर बाहर रखा गया है. उद्घाटन सत्र में निदेशक अमित श्रीवास्तव, निदेशक (परिसर) सह छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ अंगद तिवारी ने भी अपने वक्तव्य रखे. उक्त संगोष्ठी में बीज वक्ता और सेशन चेयर के रूप में डॉ ज़मानत अब्बास, डॉ शबगत उस्मानी, डॉ कुसुमिका सरकार, डॉ सबा, डॉ फौज़िया उस्मानी, शिबानूर रहमान, डॉ शकीबुर रहमान खान, और प्रो मन्दाकिनी भट्टाचार्य ने मार्जिनल लिटरेचर पर विस्तार से चर्चाएं की. करीब पचास पर्चे इस संगोष्ठी में पढ़े गए. समापन सत्र में प्रो मन्दाकिनी भट्टाचार्य ने कहा कि एक ऐसा समय रहा है जब महिलाओं को, दलितों को, वंचितों को सुना या पढ़ा नहीं जाता था पर अब ऐसा नहीं हैं. कल का हाशिया आज का केंद्र बन चुका है जो विश्व साहित्य को समृद्ध किया है. संगोष्ठी के सफल बनाने में अंग्रेजी विभाग के प्रो राजकुमारी घोष, प्रो शाहीन फातमा, डॉ रूपा सरकार और डॉ मनोज कुमार पाठक की महती भूमिका रही.

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