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jamshedpur-education-report-स्कूल-कॉलेज में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बिजनेस करने के गुर सिखायेगी इंस्टीच्यूट ऑफ प्रोजेक्ट एंज इंजीनियरिंग-आइपीइ, एक साल के इंटरप्रेन्योरिंग प्रोग्राम की होगी लांचिंग, 200 घंटे के कोर्स के दौरान बताये जायेंगे इंटरप्रेन्योर बनने के स्किल

राशिफल

जमशेदपुर : शनिवार को राजेंद्र विद्यालय के साइंस गैलरी में इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोजेक्ट एंड इंजीनियरिंग की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया. इस दौरान पत्रकारों को बताया गया कि इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोजेक्ट एंड इंजीनियरिंग (आइपीइ) की ओर से तीन दिसंबर को एक साल के इंटरप्रेन्योरिंग प्रोग्राम की लांचिंग की जायेगी, जिसमें झारखंड के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के स्कूल व कॉलेजों में पढ़ाई करने वाले 11 साल से लेकर 25 साल तक के विद्यार्थियों के साथ ही प्रोफेशनल भी हिस्सा ले सकेंगे. 200 घंटे की अवधि के इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम के दौरान टाटा स्टील के पूर्व अधिकारियों के साथ ही देश की कई अन्य दिग्गज कंपनियों के प्रतिनिधि विद्यार्थियों को छात्र जीवन में ही वे सारे स्किल की ट्रेनिंग देंगे, ताकि वे भविष्य में जॉब सीकर के बजाय जॉब क्रिएटर बन सकें. इस मौके पर आइपीइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरआर झा ने पत्रकारों को बताया कि झारखंड में देश का सर्वाधिक खनिज संपदा है. लेकिन इसके बावजूद नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड विकास के पैमाने पर नीचे से दूसरे स्थान पर है जबकि बिहार अंतिम पायदान पर है. उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी में जहां हर छह माह में जहां बदलाव हो रहा है वहीं, हर 10 साल पर दुनिया की हर चीजों में तेजी से बदलाव हो रहा है. लेकिन इस रफ्तार में मानव संपदा स्किल्ड नहीं बन पा रहे हैं, यही कारण है कि झारखंड-बिहार ही नहीं बल्कि देश के कई प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी पढ़ाई करने के बाद भी अधिकांश इंजीनियरों का प्लेसमेंट नहीं हो पा रहा है, क्योंकि वे आउट ऑफ द बॉक्स नहीं सोच पा रहे हैं. नया कुछ नहीं कर पा रहे हैं. श्री झा ने कहा कि झारखंड के ह्यूमन रिसोर्स को स्किल्ड बना कर उन्हें स्वरोजगार के प्रति प्रेरित किया जायेगा, ताकि उनके माध्यम से अन्य को भी रोजगार मिल सके. बताया कि आइपीइ का लक्ष्य है कि आने वाले 10 सालों में झारखंड को टॉप 10 राज्यों की सूची में शामिल किया जा सके. इस मौके पर आइपीइ के उपाध्यक्ष डॉ एसके सिंह, महासचिव केपीजी नायर, सदस्य संतोष रंजन, डॉ श्वेता शर्मा भी उपस्थित थी.
कोर्स के दौरान क्या सिखाये जायेंगे
उपाध्यक्ष डॉ एसके सिंह ने कहा कि इस कोर्स के दौरान विद्यार्थियों को मुख्य रूप से वेस्ट मटीरियल को रीसाइकिल कर उपयोगी उत्पाद बनाने से संबंधित इंडस्ट्री की जानकारी, डिजिटल लिट्रेसी के साथ ही रूरल इकोनॉमी एंड डेवलपमेंट से संबंधित इंडस्ट्री से जुड़ी अहम जानकारी दी जायेगी. इसमें विद्यार्थियों को लीडरशिप, सॉफ्ट स्किल, पर्सनालिटी डेवलपमेंट, एथिक्स मैनेजमेंट के साथ ही संबंधित इंडस्ट्री के लिए जरूरी तकनीकी जानकारी दी जायेगी.
रविवार को राजेंद्र विद्यालय ऑडिटोरियम में शहर के विद्यार्थियों व अभिभावकों को किया जायेगा जागरूक
रविवार की सुबह 10.30 बजे राजेंद्र विद्यालय अॉडिटोरियम में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया है. जिसमें शहर के विभिन्न स्कूल, कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ ही अभिभावकों को उक्त प्रोग्राम की जानकारी दी जायेगी. इसमें शामिल होने के लिए किसी प्रकार की कोई रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं है.
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी पहले करें पढ़ाई, उद्यम शुरू करने के बाद दे सकेंगे कोर्स फीस
आइपीइ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरआर झा ने कहा कि इंटरप्रेन्योरिंग प्रोग्राम की कोर्स अवधि एक साल है. इस दौरान कुल 200 घंटे की ट्रेनिंग दी जायेगी. इसके बाद प्रतिभागियों को एक सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जायेगा. कोर्स फीस 25,000 रुपये तय की गयी है. कहा कि अगर किसी प्रतिभागी की आर्थिक स्थिति खराब है तो इस प्रकार के विद्यार्थी भी बगैर कोर्स फीस के प्रोग्राम में शामिल हो सकते हैं. ट्रेनिंग लेने के बाद जब वे स्किल्ड हो जायेंगे, खुद का वे उद्यम शुरू कर लेंगे उसके बाद वे कोर्स फीस दे सकते हैं. उन्हें भी स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से यह घोषणा की गयी है.

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