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jamshedpur-karim-city-college-जमशेदपुर करीम सिटी कॉलेज ने आयोजित की ऑनलाइन मुशायरा ‘मरासिम’, जिसने सूरज पे थूकना चाहा, उसका कैसे उतर गया पानी……..

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”जिसने सूरज पे थूकना चाहा
उसका कैसे उतर गया पानी”

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जमशेदपुर : : जमशेदपुर स्थित करीम सिटी कॉलेज के शिक्षा संकाय की ओर से एक शानदान ऑनलाइन मुशायरा ‘‘मरासिम’’ के नाम से आयोजित किया गया जिसमें देश के कई शहरों से शायरों ने भाग लिया और अपनी अनमोल रचनाएँ प्रस्तुत कीं. श्रोता के तौर पर देश और विदेशों से लगभग 100 साहित्य प्रेमी इस मुशायरे से जुड़े और उर्दू शायरी का भरपूर आनन्द उठाया. कार्यक्रम की अध्यक्षता शहर के प्रसिद्घ शायर और साहित्यकार असलम बद्र ने की. संचालक की भूमिका निभाते हुए प्रसिद्घ शायर तथा साहित्यकार प्रो़ अहमद बद्र ने मुशायरे की परम्परा पर रोशनी डाली. कॉलेज के प्रोफेसर इंचार्ज डॉ मोहम्मद रेयाज़ ने सभी शायरों का स्वागत करते हुए कहा कि आज आदमी की जिन्द्गी एक ऐसे समय से गुजर रही है कि हर व्यक्ति अपने आपको मानसिक तौर पर बीमार महसूस कर रहा है. ऐसे में मुशायरे की अहमीयत काफी बढ़ जाती है. इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा संकाय की प्रभारी डॉ सुचिता भुइया तथा कनवेनर डॉ़ शीबा नुर्रहमान को बधाई दी. गूगल-मीट पर होने वाले इस मुशायरे की शुरुआत बंगलोर के शायर कलीमुल्लाह शाद के नातिया कलाम से हुई. उनके बाद अलीगढ़ से जुड़े सादात सुहैल ने तरन्नुम के साथ अपनी खूबसूरज गज़ल पेश की. फिर शहर के मशहूर शायर गौहर अज़ीज़ ने अपनी दो गज़ले अपनी ऑनलाइन महफिल की नज़्र कीं. उनका यह शेर काफी पसन्द किया गया. ”क्या ज़रूरी है कि फूलों को मसल कर देखें, वे तो खुशबू से ही पहचान बता देते हैं”. गौहर अज़ीज़ के बाद जलगाँव से शकील कुरैशी और उनके बाद सईद अहसन की अपने कलाम चार-चार मिसरों की शक्ल में पेश की. उन्होंने कोविड-19 पर भी एक एक़ता सुनाया. ”देखो गज़ब खुदा का, है तेशा लिए हुए
हम सबके ही गुनाह का समरा लिए हुए, हर आदमी के वास्ते वक़्ते हिसाब का, आई वबा क़यामते सुग़रा लिए हुए”. अब संचालन कर रहे अहमद बद्र की बारी थी. उन्होंने अपनी गज़लों से लोगों को काफी प्रभावित किया. खास तौर पर इस शेर पर उन्हें बेतहाशा दाद मिली. ”जिसने सूरज पे थूकना चाहा, उसका कैसे उतर गया पानी”, अहमद बद्र के बाद मज़ाहिया शायर शमीम अहमद मदनी ने कलाम सुनाया और श्रोताओं को खूब हंसाया. प्रो रिज़वाँ वास्ती ने ‘‘आँखें’’ के शीर्षक से एक सुन्दर सी कविता और उसके बाद गज़ल पेश की. उनके बाद मुशायरे के अध्यक्ष जनाब असलम बद्र ने अपनी तीन गज़लों के कुछ चुनिन्दा शेर पेश किए. मुशायरे के अन्त में डॉ़ शीबानुर्रहमान ने सभी शायरों तथा मुशायरे में शामिल हुए तमाम लोगों को धन्यवाद कहा.

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