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jamshedpur-karim-city-college-करीम सिटी कॉलेज के वेबिनार में अनलॉक्ड वर्ल्ड पर हुई चर्चा, विद्वानों ने की यह चर्चाएं

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जमशेदपुर : कोल्हान विश्वविद्यालय के करीम सिटी कालेज शिक्षा संकाय द्वारा “एजुकेशनल सिनेरियो इन द अनलॉक्ड वर्ल्ड अहेड” विषयक पर दो दिवसीय वेबिनार का आयोजन 16 जून से आरंभ हुआ. दो दिवसीय चलने वाली राष्ट्रीय वेबिनार का प्रथम दिन गूगल मीट एप्लीकेशन के माध्यम से करीब सभी शिक्षक- शिक्षिकाये एवं छात्र- छात्राएं सीधे तौर पर लाईव स्ट्रीमिंग के माध्यम से शामिल हुए. वेबिनार की मुख्य संरक्षक डॉ सुचेता भुइयां रही. प्रभारी प्राध्यापक डॉ मोहम्मद रियाज ने उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा विभाग के शिक्षको की प्रशंसा इस विषम परिस्थितियों में शिक्षा की लौ को जलाने के लिए शिक्षकगण बधाई के पात्र है. सह सम्बंधित विषयक संक्षेपक कोल्हान यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ पीके पाणि ने मुख्यत: सरकारी स्कूलों के शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि लगभग 285 मिलियन विद्यार्थी से शिक्षा से वंचित हैं।साथ ही उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा वर्तमान परिदृश्य में एकमात्र समाधान है लेकिन शिक्षक-छात्र संबंध उस स्थिति में मौजूद नहीं है. प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता के रूप में डॉ चंन्द्र पॉल सिंह चौहान, (गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष(आइयूसी-टीइ) मौजूद रहे. इस सत्र का आयोजन प्रोफ़ेसर शिवानूर रहमान ने किया. डॉ चंन्द्र पॉल सिंह चौहान ने कहा कि इस नए दौर में शिक्षक की भूमिका को पुनःपरिभाषित तथा ज्ञान-धारक के रूप में एक शिक्षक की धारणा जो अपने विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान करती है, वह 21 वीं सदी की शिक्षा के उद्देश्य के लिए उपयुक्त नहीं है। छात्रों को ज्ञान, और यहां तक की एक तकनीकी कौशल सीखने में सक्षम होने के साथ, उनके फोन, टैबलेट और कंप्यूटर पर कुछ क्लिकों के माध्यम से कक्षा और व्याख्यान थियेटर में शिक्षक की भूमिका को फिर से परिभाषित करना होगा. इसका अर्थ यह हो सकता है कि शिक्षकों की भूमिका को समाज के सदस्यों के योगदान के रूप में युवा लोगों के विकास को सुविधाजनक बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. अब हमें मलेरिया की भांति ‘कोरोना वायरस के साथ जीना सीखना होगा. कोविड-19 से बचाव को ही इसके खिलाफ प्रभावी हथियार बताते हुए लोगों से कहा कि वे फिलहाल संक्रमण से बचाव के लिए अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों को अब अपनी जीवन शैली का हिस्सा बना लें. अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि शून्य रह सकती है क्योंकि वर्तमान भारत की स्थिति का नकारात्मक परिदृश्य उसकी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पहले के मुकाबले काफी कम रहने के जोखिम को दर्शा रहा है. द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में मिथिला यूनिवर्सिटी के डॉ अरविंद कुमार मिलन ने कहा कि लाकडाउन के दौरान चर्चा तथा वार्तालाप के अभाव में विद्यार्थियों द्वारा नए विचारों एवं सिद्धांतों की उत्पत्ति भी प्रभावित हो रही है।एकाग्रचित्त ना हो पाना, ना समझ आना, कक्षा का वातावरण ना होना, एकपक्षीय संवाद, अधूरा ज्ञान, मूल्य रहित शिक्षा इन सब बिंदुओं के अनुरूप परिवर्तित होते हुए हमें विद्यार्थियों को नए युग की शिक्षा प्रणाली में ढालना होगा. प्रौद्योगिकी हमारी जगह नहीं ले सकती. द्वितीय सत्र का संचालन डॉ संध्या सिन्हा ने किया. आयोजन सचिव प्रोफेसर सिवानुर रहमान रहे। संयुक्त आयोजन सचिव प्रोफेसर रितुराज तिग्गा एवं तकनीकी सहयोग प्रोफेसर सिवानुर रहमान व बीएड विभाग के कुछेक विधार्थियों ने किया. इस मौके पर शिक्षा संकाय के समस्त प्रोफेसर मौजूद रहे. इस अवसर छात्र-छात्राएं भी सक्रिय रूप से मौजूद थे.

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