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गुरूवार, जून 17, 2021
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Jamshedpur-womens-college : वीमेंस कॉलेज में मना विज्ञान दिवस, केमेस्ट्री को प्रकृति विज्ञान से जोड़कर एक बेहतर और स्थायी समाधान की ओर बढ़ने पर बल, प्रजेंटेशन प्रतियोगिता में रत्नप्रिया व इनोवेटिव मॉडल्स में फ्यूचर सिटी प्रथम

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जमशेदपुर : वीमेंस कॉलेज में रविवार को विज्ञान दिवस समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विज्ञान के कई इनोवेटिव मॉडल्स की प्रदर्शनी लगाई गई। जिसमें कॉलेज के भौतिकी, रसायन, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान विभाग, मैथ, होम साइंस एण्ड सीएनडी, साइकोलॉजी, बीबीए, बीसीए, बीएससी आईटी, बायोटेक सहित शिक्षा विभाग की छात्राओं के समूह ने हिस्सा लिया। वर्ष 2021 में विज्ञान दिवस की थीम ‘फ्यूचर ऑफ एसटीआई: इम्पैक्ट्स ऑन एजुकेशन, स्किल्स एण्ड वर्क’ है। इसी विषय पर तकनीकी भवन के सेमिनार हॉल में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि सह मुख्य वक्ता प्रोफेसर ए. के. सिन्हा ने सीवी रमन के वैज्ञानिक बनने और संघर्षों की जानकारी देते हुए यह बताया कि विज्ञान में नवाचार एक्सपेरिमेंटल बने रहने से ही आता है। हमें गिव अप नहीं करना है। हर असफलता यह बताती है कि कुछ है जिस पर और बेहतर ढंग से काम करके सफलता पाई जा सकती है। उन्होंने कोविड 19 और उससे जुड़े वैज्ञानिक तथ्यों पर रौशनी डाली और बताया कि क्योर से बेहतर प्रिवेंशन होता है। इसलिए कोविड के दौर में वैक्सीन तक तो हम पहुँच गए हैं लेकिन हमें केमेस्ट्री को प्रकृति विज्ञान से जोड़कर एक बेहतर और स्थायी समाधान की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैज्ञानिक रिसर्च संबंधी नीतियों और कार्य प्रणाली की जानकारी भी दी। ग्रीन केमेस्ट्री को उन्होंने वैश्विक जरूरत बताया। हिमालय क्षेत्र में मौजूद खास तरह की बेरी में पाये जाने वाले रोग प्रतिरोधक गुणों और एंटी ऑक्सिडैंट तत्त्वों पर अपने शोध के मार्फत उन्होंने विस्तार से इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोड़ा कि विज्ञान दिवस की सार्थकता तभी है जब हम परंपरागत ज्ञान और अत्याधुनिक तकनीकी को एक साथ लेकर मानव समाज को बेहतर और स्थायी महत्व की जीवनशैली मुहैया करा सकें। चाईना में केमिस्ट्री और पादप विज्ञान को मिलाकर सेज पौधे से जीवन रक्षक ड्रग्स बनाने में शानदार उपलब्धियां हासिल की गई हैं। झारखण्ड भी वनस्पतियों की विविधता से समृद्ध है। हमें मेडिसिनल प्लांट पर जमकर शोध करना चाहिए। ट्राइबल स्टडीज और ग्रीन केमेस्ट्री को मिलाकर नवाचारी शोध किये जा सकते हैं। (नीचे भी पढ़ें)

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विशिष्ट अतिथि डॉ. एच. एल. यादव ने कहा कि न्यूनतम उपलब्ध संसाधनों के साथ जो सर्वश्रेष्ठ आउटपुट दिया जाये, वही नवाचारी विज्ञान है। सीवी रमन ने छोटी सी लैब में स्पेक्ट्रोमीटर के माध्यम से इतनी अनमोल और मौलिक खोज की। वीमेंस कॉलेज में ऐसा परिवेश प्रोफेसर महांती के नेतृत्व में बना है कि आने वाले दिनों में यहाँ से भी कोई फीमेल इंडियन नोबेल लॉरिएट निकले, इसमें कोई संदेह नहीं। डॉ. डी. एन. महतो ने कहा कि सी वी रमन की उपलब्धि इसलिए भी खास है कि उन्होंने इंडिजेनस माइंड, इंडिजेनस रिसोर्स और इंडिजेनस मेथड से एक युनिवर्सल खोज की। औपनिवेशिक दौर में विदेशी निर्भरता के बगैर उन्होंने भारतीय ज्ञान विज्ञान परंपरा को शिखर पर पहुंचाया। यह विज्ञान के माध्यम से भारतीय राष्ट्र की शक्ति का प्रतीक था। (नीचे भी पढ़ें)

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इससे पूर्व मुख्य आयोजक केयू की पूर्व कुलपति सह वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर शुक्ला महांती ने स्वागत संबोधन करते हुए मुख्य अतिथि केयू के प्रति कुलपति प्रोफेसर ए. के. सिन्हा, विशिष्ट अतिथि केयू के भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. डी. एन. महतो और एनआईटी, जमशेदपुर के भौतिकी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एच. एल. यादव का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि महान भारतीय वैज्ञानिक सी. वी. रमन द्वारा दी गई रमन इफेक्ट की थियोरी को वैश्विक सम्मान और पहचान देते हुए विज्ञान दिवस 28 फरवरी को आयोजित किया जाता है। भारतीय मेधा की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति का यह प्रमाण है। पिछले विज्ञान दिवस की थीम ‘वीमेंस इन साइंस’ थी। यह वीमेंस कॉलेज स्त्रियों की विज्ञान शिक्षा को लेकर उतना ही संकल्पित है। इसी कड़ी में हमने भौतिकी में एमएससी शुरू की और बॉटनी, केमेस्ट्री, जुलॉजी में एमफिल-पीएचडी के पाठ्यक्रम भी शुरू कर दिये हैं। इस अवसर पर कॉलेज के विभिन्न विभागों के अध्यक्ष, शिक्षक-शिक्षिकाएं, शिक्षकेत्तर कर्मी शामिल हुए। स्वागत गान संगीत विभागाध्यक्ष डॉ सनातन दीप ने किया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. रमा सुब्रमण्यम, संचालन भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन केमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. अन्नपूर्णा झा ने किया। प्रजेंटेशन प्रतियोगिता में प्रथम- रत्नप्रिया, द्वितीय- कुमारी अपर्णा, तृतीय- मौमिता गाँधी रहीं. वहीं इनोवेटिव मॉडल्स प्रतियोगिता की विजेता थीम : प्रथम-फ्यूचर सिटी, द्वितीय- फ्यूचर क्लासरूम, तृतीय- ऑटोमेटेड जेसीबी रही.

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