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Jamshedpur-Womens-College : वीमेंस कॉलेज में कोल्हान क्षेत्र की आदिवासी महिलाओं के विकास पर केन्द्रित वेबिनार संपन्न, कॉलेज में 21 सितंबर को होगा कैंपस सिलेक्शन

Jamshedpur : बिष्टुपुर स्थित जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का विषय था झारखंड की जनजातीय महिलाओं का विकास : कोल्हान क्षेत्र के विशेष संदर्भ में। इसमें झारखंड के जनजाति स्त्री समुदाय का विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व करने वाली महिला शख्सियतों ने संबोधित किया। सांसद गीता कोड़ा, विधायक सह महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री, झारखंड सरकार जोबा मांझी, पर्यावरणविद पद्मश्री जमुना टुडू और टाटा कॉलेज, चाईबासा की पूर्व प्राचार्या प्रोफेसर कस्तूरी बोयपाई ने बतौर आमंत्रित वक्ता संबोधित किया। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्य आयोजक प्रो डॉ शुक्ला महांती ने सभी का स्वागत किया तथा विषय की रूपरेखा रखी। उन्होंने विभिन्न आंकड़ों के माध्यम से झारखंड में जनजाति महिलाओं की वास्तविक स्थिति को सबके सामने रखा और विमर्श के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि झारखंड की आदिवासी महिलाओं के लिए एजुकेशन, वर्क फोर्स और स्वास्थ्य ये तीन बेहद चुनौती भरे क्षेत्र हैं जिनमें आमूलचूल सुधार की आवश्यकता है। जेंडर रेशियो के लिहाज से अच्छी स्थिति में होने के बावजूद यहां की जनजातीय महिलाएं आर्थिक उत्पादन की प्रक्रिया में काफी पीछे हैं। उन्होंने बताया कि चाईबासा में काम करते हुए एक रक्तदान शिविर का आयोजन कराया था। केवल 40 प्रतिशत आदिवासी समुदाय की बच्चियाँ ही रक्तदान के योग्य थीं। 60 प्रतिशत बच्चियाँ एनिमिक पाई गईं। यह डराने वाली तस्वीर है। कोल्हान का वास्तविक विकास एक इंटीग्रेटेड विकास होना चाहिए। आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक और स्वास्थ्यगत मजबूती ही एक मुकम्मल मजबूती होगी।

सांसद गीता कोड़ा ने कहा कि 2011 के सेंशस की तुलना में 2020 के आंकड़े देखें तो निश्चित रूप से जनजातीय महिलाएं बेहतर स्थिति में दिखेंगी। वे शिक्षा में भी हैं और रोजगार में भी। दिक्कत यह है कि वोकल नहीं होने के कारण बहुत सारी अच्छी योजनाओं का लाभ वे नहीं ले पा रहीं। शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाकर और स्थानीय स्तर पर रोजगार पाने की काबिलियत से जोड़कर इस स्थिति को बदला जा सकता है। आंकड़े बताते हैं कि गोईलकेरा और सोनुआ जैसे इलाकों में ही ह्यूमन ट्रैफिकिंग ज्यादा हुई है। इसका मूल कारण लोकल स्तर पर रोजगार की उपलब्धता नहीं होना ही है। बहुत से सारे खनिज यहाँ हैं, औषधीय वनस्पतियां हैं, आयुर्वेद जैसी परंपरागत चिकित्सा पद्धतियाँ हैं, आदिवासी बच्चियों को इन्हीं सबके लिए प्रशिक्षित करके वहीं पर रोजगार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं को थोपा नहीं जाना चाहिए, बल्कि योजनाएं बनाने से पहले स्थानीय जरूरतों को समझना चाहिए

मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि संस्थागत प्रसव से लेकर दूसरी कल्याणकारी योजनाओं को सुदूर गांव की जनजातीय महिलाओं तक पहुंचाने का काम तेजी से कियाजा रहा है। गाँव तक योजना का लाभ भौतिक रूप से पहुंचे और शहर की तरह ही हर जरूरी विकास वहां हो, इस दिशा में भी काम हो रहा है। यह सही है कि रफ्तार कम है लेकिन आने वाले दिनों में हम तेजी से लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे। आदिवासी बच्चियों को आगे आना होगा। यदि हम अठारह की उम्र के बाद ब्याह दिये जाने पर अपने अथक साहस और परिश्रम के बल पर एक नये परिवार को संभालना संवार सकती हैं तो कोई भी चुनौती इससे बड़ी नहीं है। आज समय बदला है। आदिवासी माता-पिता भी अपनी बच्चियों को राजनीति और खेलकूद में निस्संकोच भेज रहे हैं। यह बड़ा बदलाव है। पद्मश्री जमुना टुडू ने गाँव और शहर के गैप को भरे जाने की बात कही। कहा कि गांव की आदिवासी महिला को रोजगार सबसे पहले चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य व अन्य मसले स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से सुलझ जाएंगे। टाटा कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ कस्तूरी बोयपाई ने कहा कि विकास शब्द दूसरे विश्वयुद्ध के बाद चलन में आया। इसका कोई एक रूप नहीं है। विकास तभी सही है जब वह होलिस्टिक हो। आज जिस सतत विकास की बात हो रही है वर्तमान के उपभोग और भविष्य के संरक्षण के लिए वह जनजातीय समाज की विशेषता है और इस विशेषता को सबसे अधिक जनजातीय स्त्रियों ने ही संरक्षित किया है। कोल्हान क्षेत्र में महिलाओं को स्थानीय महिला उद्यमिता से जोड़ना होगा। शिक्षा के नाम पर नाम लिखना सिखा देना ही शिक्षा नहीं है। जबतक हर स्तर की जागरूकता नहीं आएगी तब तक विकास केवल अच्छा सा शब्द है, और कुछ नहीं। संचालन और धन्यवाद ज्ञापन आईक्यूएसी की समन्वयक डॉ रत्ना मित्रा ने किया। तकनीकी समन्वयन का कार्य ज्योतिप्रकाश महांती व के प्रभाकर राव ने किया। गूगल मीट ऐप्लीकेशन व यूट्यूब लाईव स्ट्रीमिंग के जरिए करीब 800 प्रतिभागियों ने शिरकत की।

वीमेंस कॉलेज में 21 सितंबर को होगा कैंपस सिलेक्शन
Jamshedpur : वीमेंस कॉलेज में 21 सितंबर को आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र (आयडा) की एक प्रतिष्ठित कंपनी कैंपस सिलेक्शन के लिए आ रही है। प्राचार्या प्रोफेसर (डॉ.) शुक्ला महांती ने बताया कि यह कंपनी मार्केटिंग इक्जीक्युटिव पद के लिए योग्य छात्राओं का चयन करेगी। एमबीए और एमकॉम अंतिम वर्ष की छात्राएँ जो मार्केटिंग और बिजनेस स्ट्रेटजी का विशेष अध्ययन कर रही हैं, वे इसमें शरीक हो सकेंगी। इच्छुक छात्राएँ अपना सीवी (बायोडाटा) [email protected] पर 14 सितंबर तक ईमेल कर सकती हैं। बताया गया कि यह नियुक्ति 15 से 20 हजार रूपये प्रतिमाह के वेतन स्तर में होगी तथा कार्यस्थल बालीगुमा, डिमना होगा। कोविड 19 के चलते जरूरी सुरक्षा प्रावधानों और अन्य विस्तृत जानकारी के लिए छात्राएँ 14 सितंबर को 12.30 बजे से गूगल मीट ऐप्लीकेशन के माध्यम से जुड़ सकती हैं। लिंक है- https://meet.google.com/zpd-bnyg-npv

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