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karim-city-college : करीम सिटी कॉलेज के उर्दू विभाग व मास कम्युनिकेशन विभाग में मना विश्व मातृभाषा दिवस

राशिफल

जमशेदपुर : करीम सिटी कॉलेज के उर्दू विभाग के तत्वाधान में “विश्व मातृभाषा दिवस” का आयोजन किया गया. इस अवसर पर महाविद्यालय सभागार में एक सभा आयोजित हुई जिसकी अध्यक्षता प्राचार्य डॉ मोहम्मद रेयाज ने की. उर्दू विभाग के अध्यक्ष डॉ अफसर काजमी ने उपस्थित सभी शिक्षकों तथा छात्र-छात्राओं का स्वागत किया तथा बताया कि उर्दू हमारी मातृभाषा है. यह भारत की भाषा है. इसे आज भी हिंदुस्तानी जुबान का नाम दिया जाता है. इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया. एम ए उर्दू की छात्रा आसिया अंसारिया ने “उर्दू हमारी मातृभाषा” के शीर्षक से अपनी बात रखी तथा मावरा फैयाज ने अपनी अभिव्यक्ति में इस बात पर बहस की कि “हम उर्दू क्यों पढ़ें-?” प्राचार्य डॉ मोहम्मद रेयाज ने विश्व मातृभाषा दिवस से संबंधित जानकारी दी और छात्र छात्राओं को उर्दू जैसी मीठी भाषा पढ़ने के लिए बधाई दी. प्रोफेसर अहमद बद्र ने उर्दू भाषा और साहित्य पर विस्तार से प्रकाश डाला. प्रोफेसर गौहर अजीज ने इस सभा का संचालन बड़े ही सुंदर ढंग से किया. उन्होंने अपने संचालन में यह बताया कि यह हमारा सौभाग्य है की उर्दू हमारी मातृभाषा है कयोंकि यह भाषा हमारे पास हमारी मां का अनमोल तोहफा है. अंत में डॉक्टर शाहबाज अंसारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया और सभा की समाप्ति की घोषणा की. (नीचे भी पढ़ें)

वहीं दूसरी ओर जनसंचार विभाग करीम सिटी कॉलेज के तत्वाधन में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. जिसमें मुंबई से सिनेमा लेखक निर्देशक अविशाशत्रिपाठी, संताली साहित्कार जोबा मुर्मू, उर्दू के वरिष्ठ पत्रकार शाकिर अजीमाबादी तथा वरिष्ठ साहित्यकार समीक्षक विजय शर्मा ने भाग लिया. बताते चले कि मास कम्युनिकेशन विभाग के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मातृभाषा पर मातृभाषा में मीडिया लेखन की आवश्यकता पर जोर दिया. कार्यक्रम आरंभ कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर मोहम्मद रियाज द्वारा अतिथियों का स्वागत कर किया गया. क्षेत्रीय सिनेमा का बढ़ता दबदबा विषय पर बोलते हुए अविानश त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को बताया कि किस तरह ओटीटी प्लेटफॉर्मन ने सिनेमा को भाषा के बंधनों से आजाद कर दिया है. साथ ही उन्होंने सिनेमा को दृश्य माध्यम होने की वजह से भाषा की रुकावट से ऊपर बताया. जनजातीय भाषा में साहित्य और पत्रकारिता की संभावनाओं पर बोलते हुए जोबा मुर्मू ने बताया कि जब आप अपनी मातृभाषा में बात रखते हैं तभी आपके वर्ग को सच्चा प्रतिनिधित्व मिल पाता है. वहीं दूसरी ओर शाकिर अजीमाबादी ने अपने 40 साल के उर्दू पत्रकारिता के अनुभव को साधा करते हुए कहा कि उर्दू भारत की गंगा जमुनी तहजीब का प्रतिफल है. इसका संवर्धन भारतीय संस्कृति के मूल्यों का संरक्षण है. उन्होंने नई प्रतिभाओं के उर्दू लिखना पढ़ना सबखने पर जोर दिया. भाषाओं के बढ़ते संसार पर बोलते हुए वरिष्ठ साहित्य की रचना कर पाता है. अनुवाद के सहारे साहित्यकार कही भी पहुंच सकता है और कोई भी पुरस्कार हासिल हो सकता है. कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए विभाग की अध्यक्ष डॉ नेहा तिवारी ने भी विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा को सशक्त करने की अपील की और आशा व्यक्ति की कि वे भविष्य में अपनी मातृभाषा को सशक्त करने की अपील की और आशा व्यक्ति की कि वे भविष्य में अपनी मातृभाषाओं में साहित्य, सिनेमा और पत्रकारिता का लेखन करेंगे. इस कार्यक्रम में मास कम्युनिकेशन के सभी सदस्य के विद्यार्थियों ने भाग लिया. साथ ही क्षेत्र की दूसरी यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों भी शामिल हुए. विभाग से डॉ निदा जकारिया, डॉ रश्मि कुमारी और नेहा ओझा, सैयद साजिद परवेद व सैयद शाहजेब सहित देश-विदेश के कई शिक्षक व साहित्यकारों ने भी हिस्सा लिया.

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