वीमेंस कॉलेज में सात दिनों का ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम संपन्न

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जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित जमशेदपुर वीमेंस कॉलेज और स्पोकेन ट्यूटोरियल, आईआईटी बॉम्बे के संयुक्त संयोजन में सात दिवसीय ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम का समापन 19 जुलाई को हुआ। सुबह 11.30 बजे से गूगल मीट ऐप्लीकेशन के माध्यम से जुड़े स्पोकेन ट्यूटोरियल, आईआईटी बॉम्बे के पदाधिकारियों श्यामा अय्यर और रूद्र विश्वास सहित देश भर से सीधे जुड़े 237 व लाइव स्ट्रीमिंग पर मौजूद करीब 574 प्रतिभागी शिक्षक-शिक्षिकाओं और शोधार्थियों का प्राचार्या प्रो (डॉ.) शुक्ला महांती ने स्वागत किया। उन्होंने आयोजन के सकारात्मक परिणामों पर विस्तार से चर्चा की। बताया कि यह कार्यक्रम केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन संचालित पंडित मदनमोहन मालवीय नेशनल मिशन ऑन टीचर्स एण्ड ट्रेनिंग योजना के तहत आयोजित हुआ। कार्यक्रम का केन्द्रीय विषय लेटेक (LaTex) था। यह अधिगम, शिक्षण और शोध से संबंधित एक विशेषीकृत प्रोग्रामिंग है। शोधपत्र लेखन, पुस्तक लेखन, गणितीय आँकलन, समीकरण संधारण, संदर्भीकरण, प्रस्तुतिकरण और पीडीएफ संपादन जैसी युक्तियों ने इसे एक जरूरी और भरोसेमंद स्किल बनाया है, जिसका लाभ प्रतिभागीगण को जरूर मिलेगा। अकादमिक नवाचार में इसकी असरकारी भूमिका होगी। यह शोध और शोध लेखन को अधिकाधिक वैज्ञानिक, तर्कसंगत और सुगम बनाने में मददगार है। इस कार्यक्रम से उच्च शिक्षा के अध्यापकों और शोधार्थियों को अपने अकादमिक स्तर को ऊँचा उठाने में मदद लगेगी। स्पोकेन ट्यूटोरियल की राष्ट्रीय समन्वयक श्यामा अय्यर ने मेजबान वीमेंस कॉलेज की प्राचार्या के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि आज का समय तकनीकी का है। राष्ट्र निर्माण में तकनीकी की अनिवार्य भूमिका है। विद्यार्थी राष्ट्र का भविष्य हैं। अतः इस तरह के कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षक और विद्यार्थी स्किल्ड बनते हैं और तकनीकी रूप से समृद्ध बनकर राष्ट्र निर्माण का मजबूत अंग बनते हैं। उन्होंने आगे भी वीमेंस कॉलेज के साथ ऐसे नवाचारी अकादमिक आयोजन करते रहने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम के संयोजक और भौतिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेन्द्र कुमार जायसवाल ने सात दिन चलने वाले कार्यक्रम का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और कहा कि यह पहला ऑनलाइन संकाय विकास कार्यक्रम था। प्राचार्या प्रो. (डॉ.) शुक्ला महांती के कुशल दिशा-निर्देश में अखिल भारतीय स्तर पर विभिन्न विषयों और संस्थानों के शिक्षकगण व शोधार्थियों की सक्रिय प्रतिभागिता के साथ पूरा कर लिया गया है। प्रतिभागीगण की तरफ से पटियाला से डॉ. अनुदीप सिंह, दिल्ली से डॉ. तुलिका महांती, हजारीबाग से डॉ. सयंतन शील, बीआईटी सिंदरी से प्रोफेसर घनश्याम, जमशेदपुर से डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने कार्यक्रम की गुणवत्ता और उपादेयता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के समन्वयक व ओड़िआ विभागाध्यक्ष डॉ सुधीर कुमार साहू ने धन्यवाद ज्ञापन किया। तकनीकी सहयोग ज्योतिप्रकाश महांती, तपन कुमार मोदक और प्रभाकर ने किया।

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