
जमशेदपुर : जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के खिलाफ यूथ कांग्रेस के प्रवक्ता देवाशीष घोष ने प्रेस बयान जारी किया है. सरयू राय को लेकर यह कहा गया है कि सरयू राय का नगर निगम का पैरवी के पीछे कौन सी रणनीति है किसको फायदा होगा. इससे और इससे आदिवासियों की अस्तित्व और पहचान को कैसे चोट पहुंच सकती है ? इसकी संवैधानिकता का बुनियादी सवाल को देखे बगैर न जमशेदपुर में नगर निगम और न औधोगिक नगरी का दर्जा मिल सकता है. श्री घोष ने कहा कि जमशेदपुर में नगर निगम या औद्योगिक नगरी का डिमांड वैसे लोग और भारतीय जनता पार्टी तथा सरयू राय मांग रहे है. चूंकि बाहरी आबादी खास कर बिहार के लोग जमशेदपुर के वैसे भूमि पर अवैध तरीके से मकान बनाकर रह रहे है, जो कि टाटा के लीज मे थी और वह भूमि आदिवासियों की रैयती भूमि है इसलिए रैयतों को भूमि वापसी के बजाय नगर निगम के गठन के प्रस्ताव को बाहरी आबादी की पैरवी करने वाले सरयू राय और भाजपा के लोग कर रहे है. इन लोगों ने कहा कि सच्चाई यह है आदिवासी की रैयती भूमि को लीज से बाहर कर दिये जाने के बाद कायदे से आदिवासियों को वापस कर दिया जाना ही संविधान के तहत निर्धारित है. अब सरयू राय इस पेंच से अपने बिहार उत्तर प्रदेश के सामंतवाद मनुवादी आबादी को बचाने के लिए नगर निगम का गठन कर उन अवैध कंस्ट्रक्शन को वैध कराने की असफल कोशिश कर रहे है, लेकिन यह भी संभव नही है क्योंकि पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर भी शिडयूल एरिया के अन्तर्गत आता है, जहां आदिवासी कस्टमरी लॉ के तहत ही संविधान की पांचवी अनुसूची के प्रावधानों को लागू करना होगा. देवाशीष घोष ने कहा कि सरयू राय और भाजपा के पिछली सरकार मे टाटा कमिंस का पुणे मे हेड ऑफिस शिफ्टिंग का मामले मे आज सवाल के घेरे मे है और यह इश्यू आज झारखंड के राजस्व या अन्य नुकसान मात्र की मामला नही है. मामले के तह मे यह है कि टाटा कमिंस अब महाराष्ट्र सरकार के रूल रेगुलेशन के दायरे मे रहकर जमशेदपुर के आदिवासियों के जमीन पर चलेगी और भगवः भाजपा को इस पर कोई आपत्ति नही है. श्री घोष ने बताया कि चूंकि झारखंड मे भगवः भाजपा की राजनीति महाराष्ट्र से अधिक कीमती नही है. महाराष्ट्र मे नागपुर है, जहां राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का हेड ऑफिस है तो मराठा मानुष की राजनीति तथा ब्राह्मणवादी वर्ग की राजनीति को बढ़ाने का काम करेंगे. मगर सरकार बदली और पुणे शिफ्ट का कार्रवाई को पूरी करने के लिए झारखंड सरकार से सहमति चाहिए होती है सो टाटा स्टील प्रबंधन ने इसकी आवेदन झारखंड सरकार के पास अब भेजी है कि वह टेल्को के टाटा कमिंस के हेड ऑफिस पुणे शिफ्ट कर रहे है. इससे वर्तमान झारखंड सरकार को कैसे स्वीकार होगा सो, झामुमो तथा गठबंधन मे शामिल काग्रेस पार्टी झारखंड प्रदेश के लोगों ने भी इस पर गंभीरता से लिया लेकिन भारतीय जनता पार्टी और सरयू राय जैसे लोगो को इस मुद्दे पर झारखंडी हित से क्या मतलब है इसलिए वे झामुमो के इस आन्दोलन को ही दूसरा रंग देना चाहते है.
भाजमो ने मंत्री बन्ना गुप्ता पर उठाये सवाल
सरयू राय की पार्टी भारतीय जनतंत्र मोर्चा (भाजमो) के जिला अध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने कहा हैकि झारखंड सरकार के स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधक मंत्री सह पश्चिम विधानसभा के विधायक बन्ना गुप्ता के पिछले दिनों टाटा स्टील के अधिकारियों पर भगवान बिरसा की अनदेखी करने सहित अन्य लगाए गए आरोपों पर कड़ा हमला बोला है. श्री श्रीवास्तव ने बयान जारी कर कहा है कि झारखंड सरकार को राज्य से लगातार उद्योगों के हो रहे पलायन पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए. झारखंड सरकार के मंत्री का इस तरह से गैरजिम्मेदाराना बयान देकर यह कहना की टाटा कंपनी मनमानी कर रही है और लीज शर्तो का उल्लंघन कर रही है यह सब बेबुनियाद आरोप सिर्फ मंत्री जमशेदपुर की जनता को गुमराह कर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए परपंच रच रहें हैं. मंत्री पर जनता को जवाबदेही है उन्हें जनता को बताना चाहिए की झारखंड में उद्योगों के संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार के द्वारा क्या कदम उठाया जा रहा है किंतु मंत्री अपनी जिम्मेवारी से उलट जमशेद जी टाटा कि प्रतिमा पर धरना प्रदर्शन कर नौटंकी का नया नाच दिखा रहे हैं. जमशेदपुर में स्थित एमजीएम अस्पताल की स्तिथि बद से बदतर हो गई है और मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन मंत्री अपने प्रतिनिधि को केबिन में बैठकर खानापूर्ती कर रहे हैं. मंत्री की कारेसथानी का पर्दाफाश करने के लिए भाजमो के कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर इनके झूठ को बेनकाब करेंगे.




