
जमशेदपुर : दक्षिण पूर्व रेलवे कोलकाता में पदस्थापित प्रिंसिपल चीफ सिक्योरिटी कमिश्नर आरपीएफ देवेंद्रनाथ बी कासर को विशिष्ट सेवा के लिए स्वतंत्रता दिवस 2020 के अवसर पर राष्ट्रपति पुलिस पदक ( पीपीएम) से सम्मानित किया किया. उन्हें यह पदक अपराध, राजनीतिक योजना, रेलवे सुरक्षा और यात्री सुरक्षा में नवाचार को नियंत्रित करने के लिए स्थायी प्रणाली में सुधार को लागू करने के लिए जाना जाता है. उनके विशिष्ट करियर की भारतीय रेलवे में बहुत सराहना की जाती है. अब तक उन्होंने जीएम अवार्ड, डीजी इंसिग्निया, डीजी कमेंडेशन, फिक्की का पुरस्कार और पुलिस पुलिसिंग भारतीय पुलिस पदक भी हासिल की है. उन्होंने भारतीय रेलवे में महिलाओं और बच्चों की तस्करी के लिए आंतकवादी हमलो, नक्सली गतिविधियों से लेकर विभिन्न सुरक्षा थकरों से निपटने में महारात हासिल है. उन्होंने 2008 में आपरेशन ईगल नामक अभिनव रमनीतियों के साथ अच्छी तरह से योजनाबद्ध तरीके से संचालन किया. अब तक उनके द्वारा किए गए कार्यो को रेलवे बोर्ड व मीडिया ने काफी सराहा गया. उन्होंने 2013 में झारखंड, पश्चिम बंगाल के सटे वन पटरियों में नक्सली गतिविधियों की जानकारी और खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए आपरेशन रिवर फ्लो शुरु किया था. रेलवे में उत्कृष्ठ कार्य करने केलिए 2013 में भारतीय पुलिस पदक से नवाजा गया था. उन्होंने बताया कि 22 वर्ष की आयु में,यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सुरक्षा कमांडेंट के पद पर नियुक्ति हुई. रेलवे में 28 वर्षों की सेवा के दौरान, उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.उन्होंने इस ऑपरेशन को तीन राज्यों, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में लॉन्च किया. आरपीएफ टीमों का गठन कमांडेंट जॉन कॉटर की 'परिवर्तन प्रबंधन' अवधारणा के क्षेत्र पर्यवेक्षण के तहत किया गया था, जिसका उपयोग कर्मचारियों को प्रेरित करने और सचेत करने के लिए किया गया था. इसके तहत, 2300 तस्करी, अपहरण, खोए और भागे हुए बच्चों को ट्रैक किया गया. इस ऑपरेशन को फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स एंड कॉमर्स (फिक्की) द्वारा स्मार्ट पुलिसिंग अवार्ड से सम्मानित किया गया और वर्ष 2017 में दूसरी बार उनकी सेवा के दौरान उन्हें डीजी के प्रतीक चिन्ह से सम्मानित किया गया.
[metaslider id=15963 cssclass=””]








