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टाटा स्टील में बोनस का फार्मूला तय, साथ-साथ बोनस-वेज रिवीजन करने की योजना, अगर अलग हुआ तो पहले बोनस, फिर होगा वेज रिवीजन, सात साल का हो सकता है समझौता, डीए में बदलाव तय, एमजीबी ज्यादा होगा

जमशेदपुर : टाटा स्टील में वेज रिवीजन समझौता और बोनस का समझौता साथ-साथ करने को लेकर तैयारी चल रही है. दोनों ही काम को लेकर वार्ता चल रही है. वैसे बोनस का समझौता पहले ही हो चुका था और फार्मूला पहले से ही बनाया जा चुका है, इस कारण बोनस समझौता में किसी तरह का कोई विवाद नहीं है, सिर्फ फार्मूला के आधार पर समझौता हो जाना है. वैसे अगर वेज रिवीजन समझौता को लेकर किसी तरह की बात नहीं बन पायी तो अलग-अलग समझौता होगा, लेकिन पहले बोनस हो जायेगा और वेज रिवीजन समझौता बाद में होगा. वैसे वेज रिवीजन समझौता और बोनस समझौता साथ-साथ होने से कर्मचारियों को लाभ होगा क्योंकि बोनस की राशि जो भी निकलेगी, वह बढ़े हुए वेतन के आधार पर ही होगा. लेकिन पहले बोनस समझौता हो जायेगा फिर वेज रिवीजन समझौता होगा तो बोनस में नुकसान होगा क्योंकि पुराने वेतन के आधार पर ही बोनस की राशि कर्मचारियों को मिलेगी. वैसे मैनेजमेंट यह चाहेगा कि पहले बोनस हो जाये और फिर वेज रिवीजन समझौता हो पाये ताकि मैनेजमेंट का पैसा बच सके. दूसरी ओर, टाटा स्टील में जो वेज रिवीजन समझौता को लेकर वार्ता चल रहा है, उसके तहत यह लगभग तय माना जा रहा है कि कर्मचारियों का जो वेज रिवीजन समझौता होगा वह सात साल का हो सकता है, वैसे यूनियन छह साल का ही समझौता करना चाहता है, जो पिछले बार यानी 2012 के समझौता में तय हुआ था. वैसे 2012 में जो वेज रिवीजन समझौता हुआ था, उसके तहत पीएन सिंह और एमडी टीवी नरेंद्रन के बीच नोट ऑफ कंक्लूजन तैयार हुआ था, जिसमें कहा गया था कि अगले बार का समझौता सात साल का समझौता होगा. वैसे नोट ऑफ कंक्लूजन की बातों को लागू ही कर दिया जाये, यह कोई बाध्यता यूनियन या मैनेजमेंट की नहीं होती है. नोट ऑफ कंक्लूजन के तहत यह तय होता है कि आगे बातें होगी, लेकिन फैसला होगा, यह तय नहीं हो पाया है. हालांकि, इसको लेकर किसी तरह का कोई अधिकारिक बयान देने से हर कोई बच रहा है. वेज रिवीजन समझौता में महंगाई भत्ता (डीए) में बदलाव होना तय माना जा रहा है. मैनेजमेंट इस पर सीलिंग लगाना चाह रही है, जिसको लेकर यूनियन ने सहमति दे दी है. वैसे इसको लेकर कोई कुछ बोलने वाला नहीं है. इस बारे में अब तक तय हुआ है कि एमजीबी थोड़ा ज्यादा रहेगा, लेकिन सात साल का समझौता होने से दिक्कतें और नुकसान कर्मचारियों का बढ़ सकता है.

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