जमशेदपुर:विजयादशमी के पश्चात् विजया मिलन के माध्यम से आपसी प्रेम, आत्मीयता और शुभकामनाओं के आदान-प्रदान की परंपरा जमशेदपुर में विशेष उत्साह के साथ निभाई जाती है. इसी सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ‘सहयोग’एवं संस्कार भारती, जमशेदपुर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को नागा मंदिर परिसर में विजया मिलन समारोह का आयोजन किया गया. साहित्य, कला एवं संस्कृति से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की.कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. भारती कुमारी एवं डोला वाजपेयी की वंदना से हुआ. सहयोग की संस्थापक अध्यक्ष डॉ. जूही समर्पिता ने आत्मीय स्वागत भाषण में दोनों संस्थाओं के वर्षों पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव और इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के संकल्प को रेखांकित किया.(नीचे भी पढ़े)

समारोह में मुख्य अतिथि शंभू तिवारी तथा विशिष्ट अतिथि शशि तिवारी उपस्थित थे. आशु तिवारी एवं पुष्पा तिवारी ने सभी अतिथियों को माता की चुनरी भेंट कर सम्मानित किया. कला,साहित्य एवं समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान देने वाले रागिनी भूषण, मुदिता चंद्रा, जूही समर्पिता, संध्या सिन्हा, विजय भूषण, अल्पना भट्टाचार्य, सरित श्रीवास्तव, स्नेहलता सिन्हा, डॉ. भारती कुमारी पूर्वी घोष, एवं विक्की गाबरी को सम्मानित किया गया.समारोह में प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा. गीत, संगीत, नृत्य एवं काव्य-पाठ की मनोहारी प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. नीलांबर चौधरी, राजेंद्र साह राज, लक्ष्मी सिंह रूबी, प्रणति शरण, अनीता निधि, आलोक मंजरी, सुप्रियो भट्टाचार्य, पूर्बी घोष, अन्नी अमृता एवं स्वाति ने गीत प्रस्तुत किए. दीपिका बनर्जी स्मारिका मिश्रा,अल्पना भट्टाचार्य एवं संध्या सिंहा ने नृत्य के माध्यम से समारोह में रंग भरे. ममता कर्ण एवं बसंत जमशेदपुरी ने काव्य-पाठ से साहित्यिक वातावरण को समृद्ध किया.(नीचे भी पढ़े)

कार्यक्रम का कुशल संचालन रीना सिन्हा ‘सलोनी’ने किया. अंत में संस्कार भारती की सचिव अरुणा भूषण ने धन्यवाद ज्ञापन किया. महिलाओं की उत्साहपूर्ण गरबा प्रस्तुति के साथ समारोह का समापन हुआ.इस अवसर पर अरुणा झा, डॉ.आशा गुप्ता, सुधा गोयल, पूर्वी घोष, परवेज अख्तर, नीलांबर चौधरी, डॉ. अंजनी किशोर सहाय, ममता कर्ण, साधना, स्वाति, अनीता सिंह, अनीता निधि एवं प्रणति शरण सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे. समारोह आपसी सौहार्द, सांस्कृतिक समन्वय और आत्मीयता का सुंदर उदाहरण बना. सहयोग एवं संस्कार भारती की इस संयुक्त पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि साहित्य और संस्कृति समाज को जोड़ने तथा भारतीय परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.





