जमशेदपुर : टाटा स्टील के टिनप्लेट डिवीजन की विस्तार परियोजना में हुए हादसे के बाद घायल ठेका मजदूर के इलाज और अस्पताल से डिस्चार्ज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. एक तरफ जहां पीड़ित परिवार और स्थानीय स्तर पर कंपनी व वेंडर पर वादाखिलाफी व दबाव बनाकर अस्पताल से हटाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया है. घायल मजदूर संजय शर्मा के परिजनों का आरोप है कि हादसे में शरीर की कई हड्डियां टूटने के बावजूद बेहतर इलाज सुनिश्चित नहीं किया गया और ऊपर से दबाव बनाकर उन्हें समय से पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज करा दिया गया. परिवार का कहना है कि ठेकेदार बीएन दत्ता एंड कंपनी द्वारा अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है और न ही उचित मुआवजा दिया गया है. (नीचे भी पढ़े)
इस मामले को लेकर समाजसेवी धर्मवीर कुशवाहा ने भी नाराजगी जताई है और उचित इलाज व न्याय न मिलने पर कंपनी गेट पर धरना देने की चेतावनी दी है. पीड़ित परिवार अब स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है. दूसरी ओर, मामले के तूल पकड़ने के बाद टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है. अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज और उनके परिजनों को सर्जिकल (ऑपरेशन) और नॉन-सर्जिकल (कंजर्वेटिव) दोनों प्रकार के इलाज के विकल्पों, उनके फायदों, जोखिमों और संभावित जटिलताओं के बारे में कई बार विस्तार से समझाया गया था. अस्पताल के अनुसार, मरीज ने स्वयं बातचीत के बाद कंजर्वेटिव (बिना ऑपरेशन) इलाज के विकल्प को चुना था, जिसे मेडिकल रिकॉर्ड में विधिवत दर्ज कर परिजनों की सहमति ली गई थी. टीएमएच ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल की ओर से इलाज से इंकार करने या ऑपरेशन रोके जाने के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं और तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं.





