जमशेदपुर : टाटा स्टील की अधीकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबरों के व्हाट्सऐप ग्रुप में एक मीडिया रिपोर्ट को लेकर शुरू हुई बहस ने गंभीर रूप ले लिया है. यूनियन अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी उर्फ टुन्नू चौधरी की कार्यशैली और मजदूर हित में किए गए कार्यों की प्रशंसा से जुड़ी खबर में कुछ कमेटी मेंबरों के नाम का उल्लेख करते हुए उनके इंटक अधिवेशन में दिल्ली जाने का अवसर मिलने की बात कही गई थी. कोक प्लांट के कमेटी मेंबर राजेश कुमार सिंह द्वारा इस खबर को ग्रुप में साझा किए जाने के बाद कई सदस्यों ने खबर की सत्यता और उसके पीछे की मंशा पर सवाल उठाए. ग्रुप में हुई चर्चा के दौरान कुछ सदस्यों ने कथित तौर पर भ्रामक समाचार मीडिया तक पहुंचाने के स्रोत और उद्देश्य पर सवाल खड़े किए. इसी क्रम में सीआरएम के कमेटी मेंबर अश्वनी माथन और अन्य सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई. अध्यक्ष के कार्यकाल की आलोचना के साथ व्यक्तिगत टिप्पणियां भी सामने आईं. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं, सरोज कुमार सिंह ने अपने संदेश में कहा कि वह मेरिट के आधार पर मतदान करने और आगामी चुनाव में ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ तथा जिम्मेदार प्रतिनिधियों को चुनने के पक्षधर रहे हैं, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने उन्हें अपनी चुनावी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है. बहस के दौरान पिलेट प्लांट के कमेटी मेंबर विभाकर कुमार राय का नाम भी दिल्ली जाने वाले प्रतिनिधियों की सूची से जोड़कर चुटकी ली गई. इसके जवाब में सरोज सिंह ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए चयन प्रक्रिया में कथित सिफारिश और व्यक्तिगत निष्ठा की भूमिका पर सवाल उठाए. इससे ग्रुप में विवाद और गहरा गया. इसके बाद विभाकर कुमार राय की ओर से सरोज सिंह के पुराने चुनावी अनुभव और कथित समर्थन का जिक्र करते हुए ऐसी टिप्पणी की गई कि मजदूर अपनी लंगोट खोलकर लगा देंगे जैसे अशोभनीय, अश्लील और दोहरे अर्थ वाली भाषा का प्रयोग किया गया. ग्रुप में महिला कमेटी मेंबरों की मौजूदगी के बीच इस टिप्पणी को लेकर मर्यादा और आचरण पर गंभीर सवाल उठने लगे. एकाउंट्स डिवीजन के कमेटी मेंबर ओम प्रकाश शर्मा उर्फ बम बम ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यूनियन की तारीफ करना और आलोचना करना प्रत्येक सदस्य का अधिकार है, लेकिन भाषा की मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने ग्रुप में अशोभनीय और गली-मोहल्ले की भाषा के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए इसे अनुचित बताया. मामले ने तब एक और मोड़ ले लिया, जब टीएमएच के कमेटी मेंबर राकेश सिंह ने पिछले दिल्ली अधिवेशन के दौरान यात्रा में एक महिला सहयात्री के साथ कथित अभद्र व्यवहार से जुड़े पुराने मामले का उल्लेख किया. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने सवाल उठाया कि उस प्रकरण में क्या कार्रवाई हुई थी और महिला सुरक्षा से संबंधित नियमों के तहत क्या कदम उठाए गए थे. उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित मामले में पीड़िता और साक्ष्य दोनों उनके पास सुरक्षित हैं. पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सहायक सचिव एवं ट्यूब्स डिवीजन के कमेटी मेंबर सरोज ने ग्रुप में स्पष्ट किया कि आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन उनके संदेश को टैग करके की गई अभद्र टिप्पणी को वह बर्दाश्त नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि वह इस मामले में एथिक्स काउंसलर को ईमेल के माध्यम से शिकायत करने जा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी ओर से कानूनी सलाह लेने और उपलब्ध वैधानिक विकल्पों का इस्तेमाल करने का अधिकार है. सरोज सिंह ने अपने संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि टिप्पणी उनके संदेश को टैग करके की गई है, इसलिए एक कर्मचारी के रूप में इसकी रिपोर्ट करना उनका नैतिक दायित्व है. उन्होंने कहा कि यदि उनके इस कदम से किसी को ठेस पहुंचती है, तो वह उसके लिए क्षमा चाहते हैं. इस पूरे घटनाक्रम ने यूनियन के आंतरिक संवाद, सदस्यों के आपसी व्यवहार और आगामी चुनाव में संभावित गुटबाजी को लेकर चर्चा तेज कर दी है. (नीचे भी पढ़ें)
अध्यक्ष के समर्थन और विरोध से शुरू हुई बहस अब व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप, कथित आपत्तिजनक भाषा, पुराने विवादों तथा नैतिक आचरण के सवालों तक पहुंच गई है. व्हाट्सऐप ग्रुप में हुई इस बहस ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि मजदूर हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन में वैचारिक मतभेदों और आलोचना को किस प्रकार मर्यादित एवं जिम्मेदार तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए. अब देखना होगा कि इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत होती है या यूनियन नेतृत्व और संबंधित सदस्य आपसी संवाद के माध्यम से विवाद को सुलझाने की पहल करते हैं.





