जमशेदपुर : जमशेदपुर के सिदगोड़ा टाउन हॉल में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की न्यास परिषद की बैठक आयोजित की गई. बैठक में सांसद एवं विधायकगण के प्रतिनिधि तथा विभिन्न पंचायतों के मुखिया, उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान, जिला खनन पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी समेत अन्य संबंधित पदाधिकारी शामिल हुए. बैठक में खनन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्रों के विकास एवं स्थानीय लोगों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए डीएमएफटी मद से संचालित की जाने वाली योजनाओं के चयन एवं प्राथमिकता निर्धारण पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया. बैठक में बताया गया कि जिले के सभी 11 प्रखंडों में 02 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं. इसके तहत 5,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इन प्रस्तावों के माध्यम से संबंधित गांवों की बुनियादी जरूरतों, विकास संबंधी अपेक्षाओं एवं स्थानीय समस्याओं को सामने लाया गया है. (नीचे भी पढ़ें)

इन योजनाओं पर जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित पदाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर आपसी सहमति से प्राथमिकताएं निर्धारित करने तथा योजनाओं को पारित करने का उद्देश्य है, ताकि डीएमएफटी की राशि का उपयोग वास्तविक जरूरतों के अनुरूप किया जा सके. उप विकास आयुक्त ने बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं मुखियागण से अपील की कि वे अपने-अपने पंचायतों के खनन प्रभावित क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त योजनाओं के चयन में सक्रिय भागीदारी निभाएं. उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने वाले लोगों के कल्याण को केंद्र में रखकर योजनाएं प्रस्तावित की जानी चाहिए. कौशल विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा आधारभूत संरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाओं की पहचान कर प्रस्ताव दें. उन्होंने कहा कि योजनाओं के चयन में सामूहिक विचार-विमर्श और आपसी सहमति महत्वपूर्ण है, जिससे स्वीकृत योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक प्रभावित आबादी तक पहुंच सके. उपायुक्त राजीव रंजन ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जिले में डीएमएफटी के तहत प्रतिवर्ष लगभग 12 से 13 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होती है, जबकि जिले के 1,506 गांव खनन से प्रत्यक्ष तथा 200 से ज्यादा गांव अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं. (नीचे भी पढ़ें)

प्रभावित गांवों की संख्या को देखते हुए उपलब्ध राशि सीमित है. ऐसे में योजनाओं का चयन अत्यंत सूझबूझ, आवश्यकता एवं प्राथमिकता के आधार पर किया जाना जरूरी है. उन्होंने कहा कि डीएमएफटी की राशि का उपयोग ऐसी योजनाओं में किया जाना चाहिए, जिनका लाभ व्यक्तिगत स्तर के बजाय व्यापक समुदाय को मिले और जिनसे खनन प्रभावित क्षेत्रों में दीर्घकालिक एवं स्थायी विकास सुनिश्चित हो. उपायुक्त ने विशेष रूप से सामुदायिक विकास से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता देने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण एवं सड़कों का निर्माण जैसी योजनाएं बड़ी आबादी को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित करती हैं. इसी दृष्टिकोण के तहत पूर्व में भी सामुदायिक उपयोगिता की योजनाओं को क्रियान्वित किया गया है. शहरी क्षेत्र में जोहार मार्ट का निर्माण भी इसी प्रकार की पहल का उदाहरण है. उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए योजनाओं का चयन उनकी उपयोगिता, सामुदायिक लाभ एवं क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर किया जाना चाहिए. उपायुक्त ने जनप्रतिनिधियों से प्राप्त प्रस्तावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करने तथा यह सुनिश्चित करने की अपील की कि डीएमएफटी की राशि का व्यय खनन से प्रभावित क्षेत्रों एवं वहां रहने वाले लोगों के कल्याण के उद्देश्य से हो. उन्होंने कहा कि योजनाओं का चयन करते समय स्थानीय जरूरतों और अधिकतम जनहित को प्राथमिकता दी जाए, ताकि सीमित संसाधनों से भी प्रभावी विकास कार्य किए जा सकें. बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त योजना प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास तथा आधारभूत संरचना के विकास से संबंधित आवश्यकताओं को प्रमुखता से उठाया गया. उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं मुखियागण ने भी अपने-अपने क्षेत्रों की आवश्यकताओं से अवगत कराते हुए योजनाओं के चयन को लेकर सुझाव दिए.












