जमशेदपुर : जमशेदपुर में आयोजित सीआइआइ झारखंड का दो दिवसीय सम्मेलन एवं प्रदर्शनी ‘सीआइआइ झारखंड सेफ्टी टॉक 2025’ शनिवार को संपन्न हो गया. शुक्रवार, 31 अक्टूबर एवं शनिवार, 1 नवंबर को आयोजित उक्त सम्मेलन में शामिल 300 से अधिक प्रतिनिधियों एवं 800 से अधिक आगंतुकों ने कार्यस्थल पर सुरक्षा बढ़ाने पर सार्थक चर्चाओं के लिए साझा मंच प्रस्तुत किया. इसमें प्रतिभागी वक्ताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए व्यावहारिक रणनीतियों पर विचार किया एवं खतरों को कम करते हुए जीवन रक्षा के महत्व पर बल दिया. सम्मेलन में शामिल विभिन्न स्थानों से आये प्रसिद्ध वक्ताओं ने सुरक्षा की उन्नत रणनीति एवं उद्योगों में सुरक्षा के लिए साझा प्रयास किये जाने पर मंथन किया. (नीचे भी पढ़ें)

एमएसएमई लीडर्स गोलमेज सम्मेलन के तहत एमएसएमई के लिए सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर आयोजित सत्र में कार्यस्थल पर सुरक्षा के महत्व एवं एमएसएमई को सुरक्षित एवं बेहतर संचालन बनाने में विषय विशेषज्ञों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया. वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सुरक्षा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि हर प्रक्रिया का एक मूलभूत हिस्सा होनी चाहिए, चाहे वह असेंबली स्थापित करने से लेकर कर्मचारियों को आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित करने तक हो. उन्होंने जोखिम-मुक्त कार्य प्रवाह तैयार करने, नियमित सुरक्षा ऑडिट तथा उपकरणों व सुरक्षा उपायों के उचित रख-रखाव में विशेषज्ञ मार्गदर्शन की जरूरत की चर्चा की. इस सत्र को हाईको इंजीनियर्स प्रालि के सीएमडी तापस साहू, आरएसबी ट्रांसमिशन्स (इंडियाना) लिमिटेड के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट विश्वजीत जेना, एब्रेस्ट इंजीनियरिंग के पार्टनर अमरजीत सिंह एवं हिमालय एंटरप्राइजेज के राजजीव शुक्ला आदि ने प्रमुख रूप से संबोधित किया. (नीचे भी पढ़ें)

बड़े उद्यमों की सुरक्षा रणनीति पर नेक्स्ट होराइजन्स के तहत आयोजित सत्र में बड़े उद्यमों में कार्यस्थल सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं मज़बूत सुरक्षा संस्कृति के विकास के मार्ग में आनेवाली चुनौतियां एवं अवसर विषय पर चर्चा हुई. सत्र में शामिल वक्ताओं ने अलग-अलग कार्यबल के प्रबंधन की जटिलता की चर्चा करते हुए इसमें सुरक्षा प्राथमिकताएं तय करने एवं उदारहण पेश करने नेतृत्व की अहम भूमिका बताई. इसमें सुरक्षा प्रबंधन के लिए जिम्मेवार नेताओं की भूमिका पर चर्चा हुई जो अपने निर्णय को अमल में लाते हैं और सुरक्षा को उत्पादकता से भी ऊपर मानते हैं. इस सत्र को टाटा स्टील के टिनप्लेट डिवीजन के ईआइसी उज्ज्वल चक्रवर्ती, सेल के सुरक्षा एसएसओ सुरेश कुमार एवं टाटा पावर के सुरक्षा उत्पादन के प्रमुख अभिजीत एन दास ने मुख्य रूप से संबोधित किया. (नीचे भी पढ़ें)
इसी तरह “उद्योग की सुरक्षा : व्यवसाय और उत्पादन में साइबर खतरों और धोखाधड़ी का मुकाबला” विषय पर आयोजित सत्र में सुभारती विश्वविद्यालय समूह के ऑनलाइन कार्यक्रम और साइबर सुरक्षा के निदेशक मंसूर अहमद ने साइबर सुरक्षा और व्यक्तिगत तथा औद्योगिक दोनों संदर्भों में इसके बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला एवं डिजिटलीकरण के साथ बढ़ते साइबर खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने साइबर क्षेत्र में अपनी यात्रा के अनुभव साझा करते हुए बताया कि इसकी शुरुआत एक वैश्विक हैकर सम्मेलन में एक आकस्मिक मुलाकात से हुई. उन्होंने साइबर सुरक्षा शिक्षा के विकास में अपने बाद के शोध और कार्यों की भी चर्चा की. उन्होंने अपने देश में साइबर अपराध से अधिक साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि साइबर अपराधी लोगों में जागरूकता के अभाव का फायदा उठाते हुए घोटाले करते हैं. (नीचे भी पढ़ें)
सड़क सुरक्षा जागरूकता पर केंद्रित सत्र सड़क सुरक्षा एवं व्यवहार परिवर्तन पर केंद्रित रहा, जिसमें तकनीक एवं सरकारी नियमों की महत्ता स्वीकार करते हुए भी सच्ची सुरक्षा में व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया गया. इस सत्र में वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि करीब 80 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं मानवीय भूल के कारण होती हैं, न कि बुनियादी ढांचे की गड़बड़ी के कारण. उन्होंने बताया कि हमेशा सीट बेल्ट लगाने जैसे यातायात नियमों के पालन जैसे व्यवहार परिवर्तन जरूरी होते हुए भी मुश्किल काम है. उन्होंने बताया कि इस संबंध में कठोर कानून मददगार भर हो सकते हैं, किन्तु इसे स्थायी रूप से प्रभावी बनाने के लिए छोटे वय से ही इसकी शिक्षा एवं जागरूकता अधिक जरूरी है. वक्ताओं ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए वाहनों में एआइ जैसी उभरती तकनीकों के समावेश की चर्चा भी की. सत्र के वक्ताओं में टाटा स्टील सुरक्षा विभाग के प्रमुख नीरज सिन्हा, सड़क एवं रेल सुरक्षा के प्रमुख उदित वर्मा एवं गुड माइंड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक जेहान ए. कोटवाल शामिल रहे. (नीचे भी पढ़ें)
जीरो एक्सिडेंट माइंडसेट विषय पर आयोजित सत्र में डीबी कोचिंग सॉल्यूशंस के प्रशिक्षक एवं सलाहकार, डेव ब्राइट ने शून्य दुर्घटनाओं को प्राप्त करने के लिए हाई रिस्क वाले औद्योगिक वातावरण में एक सक्रिय एवं रोकथाम-केंद्रित सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत बताई. उन्होंने बड़ी दुर्घटनाओं को रोकने और सुरक्षा उत्कृष्टता की संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रमुख उपादानों के रूप में मजबूत प्रक्रिया सुरक्षा सिद्धांतों, सुदृढ़ सिस्टम डिजाइन, ऑपरेशनल डिसिप्लिन एवं खतरों के प्रति जागरूकता के महत्व पर भी जोर दिया.




