जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विभाग में तैनात डॉ अंजनी भूषण सोमवार को रिटायर हो गए. इस मौके पर अस्पताल परिसर में आयोजित विदाई समारोह में सहकर्मी चिकित्सक और स्टाफ भावुक हो उठे. सभी ने डॉ भूषण की ईमानदारी और सरल कार्यशैली की जमकर सराहना की. समारोह के दौरान डॉ अंजनी भूषण ने अपने संघर्ष की कहानी साझा करते हुए कहा कि डॉक्टर शब्द मेरे लिए बहुत बड़ा था. पिता मजदूरी करते थे, घर पर एक गाय थी. आर्थिक हालात ठीक नहीं थे. पिता कहा करते थे-पढ़ाई करो या गाय चराओ, पैसा बर्बाद मत करो. मैंने पढ़ाई चुनी, लेकिन गाय भी चराई. धीरे-धीरे रास्ता बना और मैं डॉक्टर बना. यह मेरे पिता के संघर्ष और संस्कार का ही परिणाम है. उन्होंने आगे कहा डॉक्टर को समझना चाहिए कि समाज ने हमें क्यों बनाया है. अगर हम अपने दायित्व को समझ लेंगे तो सम्मान अपने आप मिल जाएगा. मैंने हमेशा मरीजों से सरल भाषा में बात करने और जूनियर को सिखाने की कोशिश की. मेरे लिए यह सम्मान की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि सहकर्मी मुझे बिना किसी शिकायत के विदाई दे रहे हैं. (नीचे भी पढ़ें)
शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रवींद्र कुमार ने कहा कि डॉ. भूषण की कमी हमेशा खलेगी. अब वे सरकारी दायित्व से मुक्त होकर अपने जीवन को नए तरीके से जी सकेंगे, लेकिन जरूरत पड़ने पर उनका सहयोग हमेशा लिया जाएगा. कार्यक्रम का संचालन डॉ केके चौधरी ने किया. एमजीएम कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दिवाकर हांसदा ने भी उनकी तारीफ करते हुए कहा कि शिशु रोग विभाग में डॉ अंजनी भूषण ही ऐसे डॉक्टर रहे जिनके खिलाफ कभी कोई आरोप नहीं लगा. जितनी ईमानदारी से वे काम करते थे, उतनी ही सहज भाषा में मरीजों से संवाद भी करते थे. आज के युवा चिकित्सकों को उनसे सीखना चाहिए. इस अवसर पर एमजीएम अधीक्षक डॉ आरके मंधान, उपाधीक्षक डॉ नकुल चौधरी सहित सभी विभागाध्यक्ष, सीनियर व जूनियर चिकित्सक मौजूद थे.




