जमशेदपुर: जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में एक मरीज की मौत के बाद एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं. भुईयांडीह नंदनगर कानू भट्ठा निवासी श्रवण कुमार की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है.परिजनों के अनुसार, श्रवण कुमार के पैर में सूजन थी और रविवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई. इसके बाद उन्हें इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल ले जाया गया. परिवार का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उनके पैर पर दवा लगाकर पट्टी कर दी और कुछ घंटों तक निगरानी में रखने के बाद कहा कि यदि मरीज को भर्ती रखना चाहें तो रख सकते हैं, अन्यथा घर भी ले जा सकते हैं.(नीचे भी पढ़े)
मृतक के छोटे भाई आशीष कुमार ने बताया कि डॉक्टरों की सलाह के बाद वे भाई श्रवण कुमार को घर ले गए. हालांकि शाम के समय उनकी तबीयत फिर बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें दोबारा एमजीएम अस्पताल लाया गया. यहां जांच के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.परिजनों का आरोप है कि उन्हें मरीज की स्थिति की गंभीरता के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. उनका कहना है कि यदि मामला गंभीर था तो मरीज को घर ले जाने की सलाह क्यों दी गई. साथ ही उन्होंने उपचार की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि केवल पैर में सूजन होने पर किस आधार पर पट्टी और अन्य उपचार किया गया तथा उन्हें मरीज की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति से अवगत क्यों नहीं कराया गया.(नीचे भी पढ़े)

घटना के बाद परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इसी तरह का शनिवार देर रात को सदर अस्पताल में कमर दर्द का इलाज कराने आए नामदा बस्ती के भुवनेश्वर मंडल की इंजेक्शन देने की बाद हो गयी थी. अगर मरीज की स्थिति ठीक नहीं रहती है तो परिजनों को बता देना चाहिए कि मरीज की स्थिति नाजुक है. इसे दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह तो दे ही सकते है.








