जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित रुसी मोदी सेंटर फॉर एक्सीलेंस में आयोजित टेडएक्स बिष्टुपुर वीमेन के कार्यक्रम “शी लिड्स” एक प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक आयोजन के रूप में संपन्न हुआ. टेडएक्स बिष्टुपुर के पांचवें संस्करण ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि विचारों की शक्ति समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है. कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों, पेशेवरों, गृहिणियों और युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही. पिछले 15 वर्षों में पूरे देश में टेड एक्स वीमेन जैसे आयोजन अब तक लगभग एक दर्जन ही हुए हैं. ऐसे में पूर्वी भारत का पहला टेडएक्स वीमेन आयोजित करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही. इस पहल को सफल बनाने में टेडएक्स बिष्टुपुर टीम की भूमिका सराहनीय रही. कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन से हुई, जिसके बाद महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता, तकनीक में नवाचार और नेतृत्व के विभिन्न आयामों पर टेड के दिशा – निर्देशों के अनुरूप विचार साझा किए गए. (नीचे भी पढ़ें)

पूरे दिन चले इस आयोजन में 9 महिला वक्ताओं ने अपने अनुभवों और सोच के माध्यम से श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया. टेम्सुतुला इमसोंग ने स्वच्छता और “स्वच्छाग्रही” की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि छोटे प्रयास भी बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकते हैं. विनी भगत ने “दी माउंटेन विदइन” के माध्यम से यह संदेश दिया कि जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई हमारे भीतर होती है और आत्मविश्वास ही उसे जीतने की कुंजी है. गीतिका आनंद गुप्ता ने उद्यमिता की यात्रा में “फाइव पी” के माध्यम से योजना, धैर्य और निरंतरता के महत्व को सरल और प्रभावशाली ढंग से समझाया. पारुल सिंह ने अपने प्रभावशाली वक्तव्य में “क्यों कछुआ जीतता है” की अवधारणा के माध्यम से यह बताया कि जीवन में सफलता तेज़ी से नहीं, बल्कि रणनीति, धैर्य और निरंतर प्रयास से प्राप्त होती है. उन्होंने कहा कि “डर स्वाभाविक है, लेकिन पीछे हटना एक विकल्प है” और वास्तविक साहस भय के बावजूद आगे बढ़ते रहने में है. उनका संदेश “फिर भी बढ़ते रहना है” ने श्रोताओं को गहराई से प्रेरित किया. ऋतु माथुर ने जीवन के कठिन और टूटने वाले क्षणों को नई शुरुआत के रूप में देखने का दृष्टिकोण दिया. डॉ. समिता भट्टाचार्जी ने सजगता के साथ प्रतिक्रिया देने और परिस्थितियों को समझकर निर्णय लेने की आवश्यकता पर बल दिया. शिखा जैन ने संसाधनों को केवल वस्तु नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और सशक्तिकरण के माध्यम के रूप में देखने की सोच प्रस्तुत की, वहीं गरिमा मिश्रा ने जोखिम लेने, स्वयं पर विश्वास रखने और सीमाओं से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी. (नीचे भी पढ़ें)
सभी वक्ताओं के विचारों ने न केवल उपस्थित श्रोताओं को प्रेरित किया, बल्कि यह विश्वास भी मजबूत किया कि जब ये टेडएक्स वार्ता वैश्विक मंच पर साझा होंगी, तो वे व्यापक स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम होंगी. कार्यक्रम का समापन आभार ज्ञापन के साथ हुआ. इस अवसर पर टेडएक्स बिष्टुपुर की टीम ने आगामी मई माह में एक और बड़े आयोजन की घोषणा भी की, जिसमें 10 से अधिक परिवर्तनकर्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा. यह आयोजन एक कार्यक्रम से बढ़कर एक सशक्त आंदोलन के रूप में उभरा, जिसने यह संदेश दिया कि जब महिलाएं नेतृत्व करती हैं, तो समाज एक नई दिशा, ऊर्जा और संभावनाओं के साथ आगे बढ़ता है.




