
जमशेदपुरः आज की भाग-दौड़ की जिंदगी में लोग इतना व्यस्त हो जा रहे हैं कि दूसरे के लिए तो दूर की बात, अपनों के लिए भी उनके पास समय नहीं होता है. इस नयी तकनीक वाली दुनिया में लोग अपने काम और फोन पर ज्यादा व्यस्त रहते हैं. लोगों से मिलना बंद कर फोन पर बातें करना पसंद करते हैं. यह समाज के लिए बड़ी चिन्ता का विषय बनता जा रहा है. इसके साथ ही 21वीं सदी में लोग पढ़ने से ज्यादा वीडियो देखने में रूची रखते हैं. देखा जाए तो किताबों पर धूल जम रही होती है. वहीं दूसरी ओर नए-नए वीडियो कांटेक्ट को समाज में बढ़ावा दिया जा रहा है. इस कार साहित्य का स्तर गिरता चला जा रहा है, ऐसे वक्त में “द अंब्रेला क्रिएशन” नामक संस्था ने आजमाइश नामक एक पहल की है. इसके अंतर्गत वीडियो के माध्यम से भारतीय साहित्य के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है. ‘आज बाजार’ में वीडियो द्वारा नज्म पेश की गयी है, जो समाज से विलुप्त होी जा रही है. इस नज्म के जरिए, नज्म क्या है व उसे समाज में बनाए रखने का प्रयास किया गया है. आजमाइश एक लोक काव्य, गीतों और अन्य साहित्य के साथ मिलकर एक ताल और लय के साथ प्रस्तुत किया गया है. इसमें सबसे पहले फैज अहमद फैज द्वारा नज़्म “आज बाज़ार में” को प्रस्तुत किया गया है. जिसमें शायर अहमद बद्र ने कविता पाठ किया, अर्थ समझाया वहीं अपूर्वा श्रीवास्तव ने नज्म को गाया और अजय राय द्वारा धुन तैयार की गयी है. इस वीडियो को द अंब्रेला क्रिएशन के बैनर तले बनाया गया है. इसका वीडियो संजय सोलोमन ने बनाया है. वहीं कैमरा का कार्य तकनीकी सहयोग से दीपांजन रॉय, दीपांशु तथा सरोज ने साथ मिलकर किया है.



