जमशेदपुर : झारखंड पुलिस द्वारा कुख्यात अपराधी अमन साव उर्फ अमन साहू का एनकाउंटर किये जाने के बाद पुलिस के हौंसले बुलंद है. अब पुलिस वैसे और अपराधियों की तलाश कर रहे है, जो जेल से अपने गैंग को ऑपरेट कर रहे है या कारोबारियों को धमका रहे है या अपराध करा रहे है. ऐसे ही दो नाम और है, जिसको लेकर पुलिस रणनीति बना रही है. इसमें अमन श्रीवास्तव और विकास तिवारी का नाम शामिल है. अमन साव की मौत के बाद अमन श्रीवास्तव और विकास श्रीवास्तव गैंग के खिलाफ पुलिस रणनीति बना रही है. अगर इन लोगों द्वारा कोई ऐसा कार्रवाई किया गया, जिसमें खुद पुलिस को चुनौती दी गयी तो पुलिस उसका जवाबी कार्रवाई करेगा. (नीचे भी पढ़ें)
इसको लेकर डीजीपी ने अपने मातहत अधिकारियों को छूट दे दी है. इसमें जमशेदपुर के कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह, विकास दुबे समेत कई गैंग के लोग शामिल है, जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. दूसरी ओर, अमन साव के एनकाउंटर के मामले में पुलिस पर बम से हमला करने के मामले में 30 लोगों पर एफआइआर दायर किया गया है. इसके बाद उसके गैंग के और लोगों की तलाश की जा रही है ताकि यह गैंग फिर से उठ नहीं पाये. जेल से अपराध को अंजाम देने की घटना को रोकने की कोशिश शुरू की गयी है और ताबड़तोड़ जेल में ही छापामारी की जा रही है. राज्य में अमन चैन को बहाल करने के लिए ठोस कार्रवाई की जा रही है. (नीचे भी पढ़ें)
दूसरी ओर, अमन साव के परिजनों ने उसके शव को लेने से इनकार कर दिया है. अमन साव के पिता निरंजन साव ने कहा है कि वे पलामू जाकर लाश नहीं लेंगे, पुलिस ने जिस तरह उनके बेटे को मारा है, उसी तरह उनका शव को पुलिस लाकर पहुंचाये. दूसरी ओर, अमन साव की लाश पलामू के मेडिकल कॉलेज में रखा गया है. पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की टीम ने उसके शव का पोस्टमार्टम किया, जिसके बाद उसके शव को रख दिया गया है ताकि परिजन आकर ले जाये. वहीं, एनकाउंटर की खबर मिलने के बाद अमन साव का जेल में बंद भाई आकाश साव ने भी मांग की है कि उनको 13 दिनों की औपबंधिक जमानत दे दी जाये ताकि वह अपने भाई का अंतिम संस्कार कर सके. इस पर एनआइए की विशेष अदालत ने सुनवाई की है, जिसके बाद फैसला को सुरक्षित रख लिया गया है.



