
जमशेदपुर : कोल्हान का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल एमजीएम है. इस अस्पताल ने कई बार मानवता को शर्मसार किया है. अस्पताल प्रबंधन की संवेदनहीनता के कारण करोड़ों रुपए सालाना बजट वाले इस अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती रही है. आज आपको हम वो दिखा रहे हैं जिसे देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे. इसके लिए हमारे रिपोर्टर दिन के उजालों में नहीं रात के सन्नाटे का इंतजार किया और रात के सन्नाटे में इस अस्पताल में क्या होता है उसे अपने कैमरे में कैद किया है. तस्वीरों में आप देखिए क्या होता है मुख्यमंत्री के गृह जिला और खाद्य आपूर्ति मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में पड़नेवाले कोल्हान के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में रात के वक्त मरीजों के साथ. हालात है कि पत्रकारों को भी अब इसकी रिपोर्टिंग करने में शर्म आने लगी है कि क्या बार बार लिखा जाये, लेकिन सरकारी अधिकारी या सरकार के लोगों का इतना मोटा चमड़ा हो गया है कि वह समझने को ही तैयार नहीं होता है.

एक ओर जहां वैसे मरीज जो अपनी पैरों पर खड़े नहीं हो सकते, जिनका मेजर ऑपरेशन दिन में हुआ हो, जो मरीज बुजुर्ग है उसे वार्ड में शिफ्ट करना हो तो निजी अस्पताल उन मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने के लिए अपने वार्ड बॉय के जरिए सुरक्षित तरीके से स्ट्रेचर के सहारे बेड तक पहुंचाते हैं, लेकिन के सामने जो दृश्य आप देख रहे हैं उसने तो पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

करोड़ों रुपए सालाना बजट वाले इस अस्पताल में लाचार मरीजों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जाता है वो भी रात के सन्नाटे में मीडियाकर्मियों से बचते- बचाते, लेकिन हमारे रिपोर्टर ने अस्पताल प्रबंधन के करतूतों को दिखाने की ठानी ताकि आप देख सकें झारखंड में स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर क्या हो रहा है. जिस मरीज को एक- एक क्षण सावधानी बरतनी होती है उन मरीजों को इस अस्पताल में भेड़- बकरियों की तरह वार्ड में शिफ्ट किया जाता है.

वो भी रात के सन्नाटे में. जहां मरीज के परिजन अपने मरीजों को भगवान भरोसे वार्डों में लेकर जाते साफ हमारे कैमरों में कैद हुए हैं. ये वो मरीज हैं जो महंगे और हाईटेक अस्पतालों में ईलाज नहीं करा सकते. वैसे ऐसी बात नहीं है कि इस अस्पताल में सरकार की ओर से लिफ्ट, स्ट्रेचर वॉर्ड ब्वॉय आदि की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, इस अस्पताल में सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन के संवेदनहीनता के कारण सरकार की किरकिरी होती है. वहीं रात के वक्त मरीजों के साथ इस अमानवीय बर्ताव पर हमारे रिपोर्टर ने मौजूद कर्मचारियों से बात करना चाहा लेकिन किसी ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया.







