
जमशेदपुर : अपनी योग्यता व काबिलियत के बल पर हमेशा अपना लोहा मानवाने वाले आइएएस अधिकारी अमित खरे एक बार फिर चर्चा में हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल में एक से बढ़ कर एक काम किये और लोगों के दिलों में अपनी जगह बनायी. नब्बे के दशक में जब झारखंड, बिहार से अलग नहीं हुआ था तब के सबसे बहुचर्चित चारा घोटला को उन्होंने ने ही उजागर किया था. उस वक्त अमित खरे पश्चिम सिंहभूम के उपयुक्त (डीसी) थे और आज के समय में उन्होंने नई शिक्षा नीति बनाने में अहम भूमिका निभाई है. चाईबासा डीसी के पद पर रहते हुए उन्होंने पशुपालन विभाग के गड़बड़झाले को भी उजागर किया था. इसके बाद पूरे मामले की जांच हुई और करोड़ों रुपये के चारा घोटाले का खुलासा हुआ, जिसमें आज भी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सह राजद सुप्रीमो लालू यादव जेल की सजा काट रहे हैं. इस मामले का उद्भेदन कर अमित खरे ने अपना लोहा मनवाया था. झारखंड कैडर के आइएएस अधिकारी अमित खरे इन दिनों केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और देश के अंदर नई शिक्षा नीति बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई है. तत्काल में अमित खरे उच्च शिक्षा सचिव के पद पर कार्यरत हैं. केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले बुधवार को नयी शिक्षा नीति 2020 पर मुहर लगा दी, जिसमें इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने उन्हें पिछले साल अक्टूबर में स्कूली शिक्षा विभाग और दिसंबर में उच्च शिक्षा विभाग का जिम्मा सौंपा था. उन्होंने मानव संसाधन मंत्रालय में तैनाती के साथ ही नयी शिक्षा नीति को लागू करने की दिशा में तेजी से काम किया. कई विशेषज्ञ, राज्य सरकार, पंचायत प्रतिनिधि व आम लोगों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर एक ऐसी शिक्षा नीति को अलग रूप प्रदान किया है. जिसे भारतीय परंपरा, संस्कृति और भाषाओं का ध्यान रखते हुए बदलते समाज की जरुरतों के हिसाब से बनाया गया है. नई शिक्षा नीति में बच्चों को जीवन जीने के जरूरी कौशल और जरूरी क्षमताओं को विकसित करने पर खास फोकस दिया गया है. 34 साल बाद लागू हो रही नई शिक्षा नीति को अंतिम रूप देना आसान नहीं था, लेकिन अमित खरे के मुश्किल भी नहीं. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने अनुभवों के आधार पर नीति को ज्यादा से ज्यादा उपयोगी बनाया है. बता दें कि अमित खरे झारखंड के शिक्षा सचिव, रांची विश्वविद्यालय के कुलपति सहित केंद्र सरकार में मानव संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. जिसकी वजह से देश की पुरानी शिक्षा नीति से भली भांति परिचित हैं. अमित खरे ने बताया कि नई शिक्षा नीति में उच्च शैक्षणिक संस्थानों में विश्वस्तरीय अनुसंधान और उच्च गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पर जोर दिया गया है. वर्ल्ड क्लास रिसर्च पर फोकस किया जाएगा. वहीं स्नातक प्रोग्राम के ढांचा में बदलाव किया जाएगा. अब कोर्स के दौरान कक्षा से निकलने या प्रवेश करने के कई विकल्प दिए जाएंगे. जिसका फायदा विद्यार्थियों को होगा.








