
बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड के पूर्वांचल स्थित शिशु भवन विद्यालय, झांजिया के चेयरमैन सह संस्थापक हरिहर दंडपाट का बीती रात पश्चिम बंगाल के मेदनापुर के अस्पताल में इलाज के दौरान हृदय गति रूकने से निधन हो गया. श्री दंडपाट कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे. श्री दंडपाट के निधन की खबर सुनते ही चारों तरफ शोक की लहर दौड़ गई. दंडपाट का निधन 65 वर्ष की आयु में हृदय गति रुक जाने से हो गया. वे अपने पीछे एक पुत्र छोड़ गए हैं, वे बंगलुरु में एक कंपनी में अभियंता के रूप में कार्यरत हैं. स्व दंडपाट ने समाज में हर वर्ग के लोगों के बीच अपने सेवा कार्य से अपनी एक अलग पहचान बनाई थी. वे हमेशा गरीबों और असहायों की मदद के लिए तत्पर रहते थे. उनके आकस्मिक निधन की सूचना से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी.
• शिक्षा के क्षेत्र में किया उल्लेखनीय कार्य : हरिहर दंडपाट ने पूर्वांचल में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किये. आपको बताते चलें कि ‘शिशु भवन विद्यालय की नींव वर्ष 2007 में रखी गई थी. हजारों छात्रों ने इनके संस्थान से शिक्षा में डिग्री हासिल किया है. इस क्षेत्र में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा मिल पाए इस सपने को साकार करने के लिए वह प्रयासरत थे. इस विद्यालय की शुरुआत पूर्वांचल क्षेत्र के लिए गर्व की बात है, इस विद्यालय को इस अंचल का पहला अंग्रेजी माध्यम की विद्यालय होने का गौरव प्राप्त है.
• क्षेत्र में गरीबों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते थे : स्व दंडपाट गरीबों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते थे और सामाजिक कार्यों में उनकी गहरी अभिरुचि थी. उनके निधन से सामाजिक क्षेत्र व भारतीय जनता पार्टी को अपूरणीय क्षति हुई है. उन्होंने विगत वर्ष लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को निजी स्तर पर काफी सहयोग किया था.
• समाज में हर जाति की गरीब बेटियों की शादी में निजी स्तर से मदद करते थे : स्व दंडपाट समाज के अति गरीब और असहाय बेटियों की शादी बड़ी धूमधाम से कराते थे. उनका सपना थी कि वे अपने जीवनकाल में समाज में कुल 108 गरीब बेटियों का धूमधाम से विवाह करायें और सिर्फ इतना ही नहीं विवाह का पूरा खर्च वे निजी स्तर से उठाते थे. वर्ष 2021 तक वे 90 गरीब बेटियों की विवाह करा चुके थे. समाज के जरूरतमंद वर्ग की सेवा करने का समाज के लिए एक उदाहरण थे. ऐसे गरीब जिन्हें अंत्येष्टि के लिए आर्थिक मदद की जरूरत हो, उन्हें वह आर्थिक मदद करते थे. किसी गरीब की मृत्यु के बाद परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए मदद उपलब्ध करते थे, साथ ही उसके श्राद्धकर्म के लिए भी सहायता करते थे.
• ऐसे ढूंढते थे जरूरतमंद लोगों को : उनके साथ जुड़े लोगों का विस्तार अलग-अलग क्षेत्रों में है. वे अपने आसपास के लोगों के संपर्क में रहते थे. अपने नेटवर्क से इस बात की जानकारी लेते थे कि वास्तव में किसी व्यक्ति को किस तरह की जरूरत है कि नहीं. अपने स्तर से जानकारी प्राप्त करने के बाद वे जरूरतमंद की मदद करते थे.
• हरिहर दंडपाट खुद इंजीनियर थे : हरिहर दंडपात बीसीसीएल से सेवानिवृत्त इंजीनियर सह शिशु भवन, झांजिया इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रबंध संचालक थे. वहीं उन्होंने कोल इंडिया लिमिटेड, धानबाद में ‘यांत्रिक अभियंता’ के रुप में सेवा प्रदान की. समाज में ऐसे व्यक्ति के निधन से खास कर अति गरीब और जरूरतमंद वर्गों को अपूरणीय क्षति हुई है.













