
रांची / नयी दिल्ली : रविवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में केद्रीय गृह मंत्री अमित साह ने नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ एक बैठक की. बैठक में नक्सलियों पर किस तरह अंकुश लगाया जाये, इस बात पर चर्चा की गई. इस दौरान अपनी बातों को रखते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि साल 2015 में 195 नक्सली घटना हुई जो साल 2020 में घटकर 125 ही रह गई है वहीं 2016 में कुल 61 लोगों की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी जो साल 2020 में 28 रही. इस बीच 715 नक्सली गिरफ्तार किए गए और 18 नक्सलियों को मार गिराया गया है. उन्होने कहा कि नक्सली संगठन के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है जिसका परिणाम यह है कि अब झारखंड में नक्सली सिर्फ पारसनाथ पहाड़, बुढ़ा पहाड़, सरायकेला, खूंटी, चाईबासा और कोल्हान के अलावा बिहार सीमा के इलाके तक सीमित रह गए है. साल 2020 से 2021 के अगस्त तक कुल 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. राज्य सरकार द्वारा आत्मसमर्पण नीति का प्रचार- प्रसार भई किया जा रहा है. नक्सल प्रभावित इलाकों में युवाओं के लिए सहाय योजना लेकर आ रही है जिसके अंतर्गत नक्सली क्षेत्रों के युवाओं को खेल से जोड़ा जाएगा. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा समय समय पर नक्सली उन्मूलन के लिए कई योजनाएं लागू की गई है. इन योजनाओं से काफी लाफ मिला है. पर कई जिलों में इन योजनाओं को बाद कर दिया गया है. इससे इस दिशा में प्रयासों को आघात पहुंचता है. शुरुआत में केंद्र सरकार द्वारा 16 जिले में योजना के तहत 3300 करोड़ रुपये दिए जाते थए पर यह योजना अब सिर्फ 8 जिलों में है. इसी प्रकार एसआरई योजना से कोडरमा, रामगढ़ और सिमडेगा को बाहर कर दिया गया. उन्होने कहा कि राज्य में कुल 192 एकलव्य विद्यालय स्वीकृत किए गए है इनमें 82 उग्रवाद प्रभावित जिले में बनेंगे. झारखंड में 261 प्रखंड है पर 203 प्रखंडों में ही केंद्र सरकार की सहायता से कस्तूरबा विद्यालय का निर्माण किया गया है. 57 विद्यालय राज्य सरकार अपनी निधि से चला रही है. नक्सल विरोधी अभियान में राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय बना रहेगा. सब मिलकर इस युद्ध को अवश्य जीत पाएंगे.












