
जमशेदपुर : भारतीय स्टील उद्योग में पहली बार स्टील रिबार के लिए ग्रीनप्रो फ्रेमवर्क विकसित करने के उद्देश्य से टाटा स्टील अब भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) ग्रीन बिजनेस सेंटर और अन्य संबंधित स्टेकहोल्डरों के साथ मिलकर काम करेगी. ग्रीनप्रो इकोलेबेल अंतिम-उपयोगकर्ताओं को सबसे कम पर्यावरणीय प्रभाव वाले स्टील खरीदने के बारे में एक सूचित विकल्प अपनाने की सुविधा प्रदान करता है. ग्रीनप्रो लेबल वाले उत्पाद उच्चतम गुणवत्ता मानकों से बने होने की गारंटी देते हैं और ग्रीनप्रो मानक के अनुसार सस्टेनेबल होते हैं. ग्रीनप्रो प्रमाणित उत्पादों को इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग सिस्टम से भी मान्यता प्राप्त है. स्टील रिबार एक प्रमुख निर्माण सामग्री हैं और इमारतों की स्थिरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं. भारतीय स्टील उद्योग को स्टील उत्पादों के निर्माण के दौरान इन्वायर्नमेंट फुटप्रिंट को कम करने और भारतीय बिल्डिंग सेक्टर के लिए न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव वाले स्टील आपूर्ति करने की आवश्यकता है. ग्रीनप्रो एक टाइप-1 इकोलाबेलिंग प्रोग्राम है, जिसे कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ) ग्रीन बिजनेस सेंटर द्वारा ऑफर किया गया है. अब तक, 125 से अधिक निर्माण उत्पाद और सामग्री निर्माण कंपनियों ने 1800$ उत्पादों के लिए ग्रीनप्रो इकोलेबेल अपनाया है और ये ग्रीन बिल्डिंग (हरित इमारत) के निर्माण के लिए बाजार में उपलब्ध हैं. सीआइआइ सोहराबजी गोदरेज ग्रीन बिज़नेस सेंटर के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर केएस वेंकटगिरी ने कहा कि सीआइआइ ग्रीन उपायों को लागू करने के लिए रि-रोलिंग मिलों और स्टील उत्पाद निर्माताओं को सपोर्ट करेगा, उनके संसाधनों की खपत को कम करेगा, साथ ही स्टील उत्पादों के लिए ग्रीनप्रो इकोलेबल अपना कर बिल्डिंग सेक्टर में महत्वपूर्ण बाजार पहुंच प्रदान करेगा. यह अंततः भारत में स्टील के उत्पादन और खपत में एक मार्केट ट्रांसफॉर्मेशन का कारण बनेगा. टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी संजीव पॉल ने कहा कि भारत में ग्रीन बिल्डिंग मूवमेंट की शक्ति दिनोंदिन बढ़ रही है. सफल ग्रीन बिल्डिंग मूवमेंट सुनिश्चित करने के लिए सस्टेनेबल सामग्रियों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है. भारतीय स्टील उद्योग को ग्रीन बनाने में स्टील रिबार के लिए ‘ग्रीनप्रो इकोलेबल’सही दिशा में एक कदम है. टाटा स्टील अपने सभी स्टील उत्पादों में ग्रीन उपायों को शामिल करने का नेतृत्व करेगी. एक सस्टेनेबल स्टील इकोसिस्टम बनाने का हमारा निरंतर प्रयास रहा है. ग्रीनप्रो रिबार्स के साथ हम सस्टेनबल भविष्य की दिशा में एक कदम आगे बढ़ा रहे हैं. रिबार्स के ग्रीनप्रो फ्रेमवर्क निर्माण के लिए सीआइआइ-जीबीसी द्वारा गठित टास्कफोर्स की अध्यक्षता करने वाले टाटा स्टील के चीफ ऑफ टेक्नोलॉजी विश्वजीत घोष ने कहा कि भारत में रिबार्स के लिए ‘ग्रीनप्रो इकोलेबेल’सस्टेनबल स्टील के लिए बाजार बनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। टाटा स्टील यह दर्शाने के लिए प्रतिबद्ध है कि स्टील उत्पादों में ग्रीन होना व्यापार को विवेकपूर्ण बनाता है और कार्बन डायऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने के राष्ट्रीय उद्देश्य में योगदान देता है. इमारतें और निर्माण एक साथ लगभग 36 प्रतिशत वैश्विक ऊर्जा और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से संबंधित 39 प्रतिशत ऊर्जा का उपयोग करता है. इमारत से 11 प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन होता है और यह मुख्यतः स्टील, सीमेंट, कंक्रीट, ग्लास इत्यादि जैसी सामग्रियों से होता है. ग्रीन या कम कार्बन वाली सामग्री के उपयोग से निर्माण क्षेत्र में जीवन-चक्र के पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने की क्षमता है. सामग्री दक्षता रणनीतियां 2050 तक भारत में निर्माण, परिचालन और घरों के टूटने से होने वाले उत्सर्जन को 50 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं. जलवायु परिवर्तन दिन के उजाले की तरह वास्तविक है और देशों के लिए आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाना और पर्यावरण की रक्षा करना अनिवार्य हो गया है. अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी का सह-अस्तित्व है और इस सह-अस्तित्व के लिए हरित भवन यानी ग्रीन बिल्डिंग समय की आवश्यकता है. टाटा स्टील यह सुनिश्चित करती है कि उत्पादों के निर्माण के लिए उपयोग की जाने वाली प्रोद्योगिकियां और प्रक्रियाएं संसाधनों को ईष्टतम करें और कुशल बनाएं. कंपनी प्रोडक्ट डिस्क्लोजर विकसित करने की आकांक्षा रखती है, जो विश्व स्तर पर अग्रणी ग्रीन बिल्डिंग सर्टीफिकेशन कार्यक्रमों का अनुपालन करती है.












