
सरायकेला : सरायकेला-खरसांवा जिले के कुकड़ू प्रखंड क्षेत्र के पारगामा गांव के तांती टोला के करीब एक दर्जन ग्रामीण डायरिया की चपेट में आ गए है. ग्रामीणों के अनुसार शुक्रवार रात से ही एक-दो ग्रामीण डायरिया का शिकार हो गए. वही ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण पीड़ित परिवार का झोला छाप चिकित्सक के भरोसे ही ईलाज चल रहा था. वही इसके बाद ग्रामीणों ने इसकी जानकारी नीमडीह सीएसची के डॉक्टरों को दिया तो वहां से चिकित्सकों का दल गांव मे आया और ईलाज कर चले गए. वही दो-तीन मरीजों का इलाज होते-होते मरीजों की संख्या 13 हो गई. उधर ग्रामीणों ने कैम्प लगाकर ईलाज करने की मांग की है. बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग मौन धारण कर रखी है. आलम ये है कि गांव में अभी तक न ब्लीचिंग का छिड़काव हुआ है और न ही फॉगिंग की गई है. यदि जल्द ही स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में पहल नहीं करती है तो पूरा गांव इसकी चपेट में आ सकता है.

ये लोग है डायरिया के चपेट में
टिकी माझी (56), शक्ति महतो (62), चैती माझी (22), मंगल माझी (27), बुधनी माझी (60), केशारी माझी(60), कमलकांत तंतुबाई (61), यशोदा माझी (60), बनू माझी (61), भारती माझी (26) और जुरु प्रामाणिक (75).
चुआ का पानी पीते है ग्रामीण
पारगामा गांव के तांती टोला के लोग बुगबुगी डांडी ( चुआ) का पाने पीते हैं. ग्रामीणों ने बताया कि तांती टोला मे चापाकल आदि की सुविधा नही है, जिसके करण लोग आदिकाल से ही बुगबुगी डांडी( चुआ) का पानी पीने को मजबूर है. जो गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर में स्थित है. जहां से महिलाएं पानी भरकर लाती है. ग्रामीणों ने बताया कि चिकित्सको ने बुगबुगी डांडी (चुआ) का पानी को ही डायरिया होने का मुख्य कारण बताया.




